एक साल बाद भ्रमणकाल के लिए निकले नाग देवता

Pahado Ki Goonj
  1.  एक साल बाद भ्रमण काल के लिए बाहर निकले नाग देेेवता                                                 उत्तरकाशी. बडकोट/   (मदनपैन्यूली )                      पौंटी क्षेत्र में महीने भर के भ्रमणकाल के लिए एक साल बाद नाग देवता बाहर निकले हैं। बाहर निकलने पर गांव में आयोजित मेले में नाग देवताओं के दर्शन तथा आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। वहीं गांव-गांव में नागों के स्वागत के लिए दूध-मक्खन के साथ तैयार ग्रामीण काफी उत्साहित हैं। भ्रमण के दौरान नाग देवता 12 गांव में पहुंचकर लोगों को सुखसमृद्धि एवं क्षेत्र की खुशहाली का आशीर्वाद देंगे। उत्तरकाशी जिले की यमुनाघाटी में पौंटी एवं मोल्डा गांव में नाग देवताओं का थान (निवास स्थान) है। एक साल में 11 महीने तक अपने थान में विराजमान के बाद हर साल श्रावण माह में अपने थान से नाग देवताओं की डोली भ्रमण के लिए बाहर निकलती है। नाग देवताओं को एक को भौंसर तथा दूसरे को पौंसर नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि दोनों नाग भगवान शिव के अंगों से निकले हैं। भौंसर बाहों से तथा पौंसर पांव ने निकला है, जो क्रमशः मोल्डा तथा पौंटी गांव में पौराणिक काल में उपजे हैं। पौंटी गांव निवासी पंडित महिमानंद तिवारी बताते हैं कि पौराणिककाल से चली आ रही नाग देवताओं के पूजा अर्चना की परंपरा आज भी विद्यमान है। नाग देवताओं का श्रावण माह में पौंटी, मोल्डा, कांसी, कंताड़ी, छोटी बेणाई, हुड़ोली, पाणीगांव, पलेठा, डंडालगांव सहित 12 गांव में नाग देवताओं का मेला लगता है। बीते सोमवार, मंगलवार के से नाग देवताओं का भ्रमण पौंटी गांव से शुरू हुआ तथा बुधवार को मोल्डा में नाग देवताओं का भव्य मेला लगा। जिसके बाद परंपरानुसार अन्य गांव में भी मेलों का आयोजन किया जाएगा। आचार्य हरीश प्रसाद डिमरी कहते हैं कि श्रावण के महीने नाग देवताओं के बाहर निकने के बाद इन 12 गांव में कोई भी लोग मांस व शराब का सेवन नहीं करते हैं। सभी लोग सातवित विचारधारा का निर्वाहन करते हुए नियमित नाग देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। नाग देवताओं के यह मेले शुद्धता एवं पवित्रता के प्रतीक हैं।

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