अनिल पंछी
देहरादून। पूरे देश से हर जगह से प्रवासी मजदूर अपने घरों को क्यों भाग रहे है। यह अब खुलकर सामने आने लगा है। लाॅकडाउन के दौरान बरोजगार हुए गरीब कामगारों व मजदूरों को प्रधानमंत्री द्वारा राशन उपलब्ध कराने के मामले में भी राजनीतिक पक्षपात व वोट बैंक की राजनीति उभरकर सामने आने लगी है। शायद इसी तमाशे के बाद देशभर में प्रवासी मजदूर अपने घरों को भागने के लिए मजबूर हुआ। प्रशासन की राहत हर किसी तक नही पहंुच पाई यह एक अलग विषय है। पर इसकी आड में राजनीतिक दलों ने जो वोटबैंक की राजनीति का खेल खेलना शुरू किया वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच को शर्मशार करने वाला एक काला अध्याय बनकर रह गया है।
भारत की आजादी के सत्तर साल के बाद भी देश में जातिवाद,संप्रदायवाद,क्षेत्रवाद, पक्षपात की राजनीति समाप्त होने का नाम नही ले रही है। जोकि देश के लोकतंत्र पर किसी खतरे की घंटी से कम नही है। कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए किए लाॅकडाउन के चलते रोजगार छिनने के कारण प्राईवेट कामगारों और मजदूरों पर आर्थिक संटक इस कदर छा गया कि भूखमरी तक की नौबत आने लगी। जिसे देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रदेश सरकारों व देश के अमीर या समाज सेवी संगठनों से गरीबों को राशन वितरण के लिए अपील की थी। जिससे कि इस विकट घड़ी में देशभर में कोई गरीब भूखा भूखा न सोए। जिसके फल स्वरूप कई समाज सेवी संगठन और प्रशासन राशन वितरण के लिए सक्रिय हो गया। शासन- प्रशासन ने समस्त समाजसेवी संगठनों, राजनीतिक दलों व आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से अपील की इस विकट घड़ी में राशन वितरण चंदा देकर अपना सहयोग प्रदान करें। प्रदेश के कई गणमान्य लोगों ने प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री कोष में अपने स्तर से धनराशी जमा की। जिसे प्रदेश सरकार ने प्रशासन को वितरित कर गरीबों को राशन वितरण के लिए दे दिया। साथ ही प्रशासन ने सभी संगठनों व राजनीतिक दलो से अपील की कि जो कोई संगठन व्यक्ति या संस्था गरीबों को राशन वितरित करना चाहता हैं वह प्रशासन को दे दे। प्रशासन उसे जरूरत मंद तक पहंुचाने का काम करेगा। किन्तु प्रशासन की मुहीम के इतर राजनीतिक दल गरीबों को राशन वितरण करने के मामले का भी राजनीतिकरण करने से बाज नही आए। फलस्वरूप कांग्रेस ने इंदिरा अम्मा भोजनालय शुरू किया तो भाजपा ने भी कहीं प्रधान मंत्री मोदी के नाम पर कई अटल के नाम पर भोजनालय शुरू कर दिया। इसके साथ ही उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी विधायकों व संगठनों को गरीबों की राशन उपलब्ध कराने की अपील की। हर विधायक को जिम्मेदारी सौंपी गयी कि वे गरीबो को चिन्हित कर उस तक राशन पहंुचाए जिससे कि कोई परिवार उनके विधानसभा क्षेत्र में भूखा न सोए। किन्तु पार्टी सगठन व कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की मंशा पर पलीता लगाने का काम किया है। मसूरी विधानसभा क्षेत्र में राशन वितरण का पूूरी तरह से राजनीतिकरण हो गया है। मसूरी विधायक अपने कार्यकर्ताओं व पार्टी के पार्षदों से अपने अपने क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों की सूची मांगकर उनतक राशन पहंुचा रहे है। जिससे में पूरी तरह से राजनीतिक पक्षपात हो रहा है। क्योंकि सूची उनके पार्षद व कार्यकर्ता दे रहे है। इसलिए उसमें पूरी तरह से राजनीतिक पक्षपात पूर्ण हो रही है। क्षेत्र के राजनीनिक गलियारों में चर्चा यह है कि सोमवार को हाथीबड़कला गांव में भाजपा कार्यकर्ताओं व पार्षद ने अपने अपने लोगों की सूची दी थी। उन्हे एक दिन पूर्व भाजपा के कार्यकर्ता उनके घर तक देकर आए और सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं पार्षद देखरेख में हाथीबड़कला स्कूल में उन्ही को राशन वितरित किया गया। जिन्हे भाजपा कार्यकर्ताओं व पार्षद का आर्शिवाद प्राप्त था। इतना ही नही सूची में वो लोग भी शामिल है। जोकि आर्थिक रूप से सक्षम थे। किन्तु मुफ्त का राशन कौन छोडता है। देशभर में प्रवासी मजदूर क्यों भाग रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि वो प्रवासी मजदूर देहरादून के किसी विधानसभा क्षेत्र का वोटर नही था। तो उसे कौन मुफ्त का राशन देता। आलम यह है कि जिन्हे भाजपा कार्यकर्ता चाह रहे है उन्हे राशन उपलब्ध हो पा रहा है। उसमें से आधे वो लोग शामिल है। जोकि गरीबी के दायरे में आते नही है। सूत्रों का यह कहना है कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में विधायक गणेश जोशी की देखरेख में यही खेल चल रहा है। वे पूरी तरह से कोरोना काल में भी राजनितिक पक्षपात की राजनीति कर रहे हे। उनका मात्र यही उद्देश्य है कि उनके वोटबैंक में इजाफा हो। चर्चा यह भी है कि विधायक महोदय की नजर सिर्फ अपने वोटबैंक पर है बाकी कोई गरीब भूखा सोए उससे क्या लेना देना। बाकी क्षेत्र में अन्य गरीब लोग आज भी दाने दाने को मजबूर है। यह तो एक विधानसभा क्षेत्र की नमूने मात्र खबर है। यही शायद पूरे देशभर हुआ होगा तभी मजदूरों ने अपने घरों को वापस लोटने मेे भलाई समझी सच्चाई सामने लाना मेरा धर्म है। यहां यह भी गौरेबाबिल है कि मैं इस मुद्दे का राजनीतिक करण नही करना चाह रहा हंू इसलिए किसी अन्य राजनीतिक दल का वर्जन नही लिया।
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Mon Jun 8 , 2020
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