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उत्तराखंड में युवकों की शादी बन रही चुनौती, पलायन और बेरोजगारी प्रमुख वजह ।

Pahado Ki Goonj

उत्तराखंड में युवकों की शादी बन रही चुनौती, पलायन और बेरोजगारी
प्रमुख वजह ।

उत्तरकाशी। मदन पैन्यूली।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में युवकों की शादी न होना अब सामाजिक चिंता का विषय बनता जा रहा है। गांवों से लगातार हो रहे पलायन, सीमित रोजगार के अवसर और आर्थिक अस्थिरता के कारण कई युवक विवाह योग्य उम्र पार करने के बावजूद अविवाहित रह जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि आजकल लड़कियों के परिवार नौकरी, स्थायी आय और शहरों में बसे परिवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में पहाड़ के गांवों में रहने वाले युवकों के लिए रिश्ते मिलना कठिन होता जा रहा है।
बड़कोट पोल गांव के युवा धनीराम जगूड़ी बताते है सामाजिक स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि पहाड़ी गांवों से युवतियां शिक्षा और नौकरी के लिए शहरों की ओर जा रही हैं, जबकि गांवों में रहने वाले युवकों के लिए रिश्ते कम आ रहे हैं।
यदि पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया जाए तो पलायन कम होगा और सामाजिक संतुलन भी बेहतर बनेगा। वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर कई गीत और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें युवाओं की पीड़ा और पहाड़ की वास्तविकता दिखाई जा रही है ।
राज्य के अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने इस विषय को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में युवक शादी की उम्र पार करने के बावजूद अविवाहित हैं, जबकि समान आयु वर्ग में अविवाहित युवतियों की संख्या काफी कम है।
राज्य की राजधानी देहरादून में 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 35 हजार युवक अविवाहित हैं, जबकि इसी वर्ग में अविवाहित युवतियों की संख्या केवल 11 हजार के आसपास है। यानी करीब 24 हजार का बड़ा अंतर सामने आया है।
इसी तरह 30 से 34 वर्ष आयु वर्ग में 10,103 युवक अविवाहित हैं, जबकि युवतियों की संख्या मात्र 3,031 है। वहीं 35 वर्ष से अधिक आयु के 7,025 पुरुष और 40 वर्ष से अधिक आयु के 3,281 पुरुष अब भी अविवाहित हैं।
पहाड़ी जिलों में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। कई गांवों में औसतन 50 से अधिक युवक शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन उन्हें जीवनसाथी नहीं मिल पा रहा है।
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि लड़कियां केवल सरकारी नौकरी या शहर में घर वाले युवकों को ही प्राथमिकता देती हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अच्छी नौकरी और व्यवसाय वाले कई युवक भी विवाह नहीं कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या के पीछे लिंगानुपात में असंतुलन, पलायन, बदलती सामाजिक सोच और युवतियों द्वारा देर से शादी करने की प्रवृत्ति प्रमुख कारण हो सकते हैं।
उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग का बढ़ता आकर्षण जहां एक ओर राज्य को नई पहचान दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं के विवाह संकट ने समाज और सरकार दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

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