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Good news उपनल कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर ‘ कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया ,पढ़ें सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

( जीत मणि पैन्यूली संपादक पहाड़ों की गूंज हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र एवं पोर्टल वेव चैनल ) जन्म तिथि 15 अक्टूबर 1951

जय बद्रीविशाल

उपनल कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर ‘समान कार्य–समान वेतन’ पर कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय के लिए व्यक्त किया आभार

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज सचिवालय में उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की। इस अवसर पर उपनल कर्मचारियों ने समान कार्य–समान वेतन के संबंध में आज राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।

उपनल कर्मचारियों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को पूरा करने के साथ-साथ उनके सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों में उत्साह एवं विश्वास का वातावरण बना है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार उपनल कर्मियों के हितों की रक्षा, उनके सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके योगदान को सरकार पूरी गंभीरता से मान्यता देती है। प्रदेश सरकार कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े सभी मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

इस अवसर पर उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि वे सरकार की नीतियों एवं निर्णयों के अनुरूप पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे।

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जन–जन तक सरकार, हर समस्या का समाधान : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक उपलब्धि*

‘ *जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम से प्रदेशभर में त्वरित समाधान और प्रभावी सुशासन*

*अब तक 3.47 लाख से अधिक शिविर, 2.77 लाख से अधिक जनसुनवाई, 1.89 लाख से अधिक शिकायतों का निस्तारण*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील और जनोन्मुखी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसमस्याओं के समाधान का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। आज 15 जनवरी 2026 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस बात की सशक्त पुष्टि करती है कि सरकार सीधे जनता तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है।

उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सभी जनपदों में अब तक पिछले दिवस तक 328 शिविरों का आयोजन किया जा चुका था, जबकि आज 19 नए शिविर आयोजित किए गए। इस प्रकार कुल मिलाकर 347 शिविरों के माध्यम से जनता को सीधे प्रशासनिक सेवाओं से जोड़ा गया है। इन शिविरों में पिछले दिवस तक 2,54,137 नागरिकों ने प्रतिभाग किया, जबकि आज 23,517 नागरिकों की सहभागिता रही, जिससे कुल प्रतिभागियों की संख्या 2,77,654 तक पहुँच गई है। यह आँकड़ा जनविश्वास और सरकार की पहुँच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

जनसमस्याओं के समाधान की दृष्टि से भी यह कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। अब तक 20,814 शिकायतें प्राप्त हो चुकी थीं, जिनमें आज 1,479 नई शिकायतें प्राप्त हुईं। इस प्रकार कुल 22,293 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 18,168 शिकायतों का पूर्व में निस्तारण किया जा चुका था तथा आज 807 शिकायतों का समाधान किया गया, जिससे कुल 18,973 शिकायतों का सफल निस्तारण सुनिश्चित किया गया है। यह उपलब्धि सरकार की त्वरित कार्यप्रणाली और जवाबदेही को रेखांकित करती है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा नागरिकों को प्रमाण पत्र एवं लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया भी निरंतर गति से आगे बढ़ी है। 36,753 प्रकरणों में पूर्व में लाभ प्रदान किए गए थे, जबकि आज 1,502 नए मामलों में प्रमाण पत्र अथवा लाभ वितरित किए गए। इस प्रकार कुल 38,255 नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त हुआ है, जो सेवा वितरण की प्रभावशीलता का स्पष्ट प्रमाण है।

इसके अतिरिक्त, अन्य कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित व्यक्तियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1,38,011 नागरिक पूर्व में विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हो चुके थे, जबकि आज 13,554 नए लाभार्थी जोड़े गए। इस प्रकार कुल 1,51,565 नागरिकों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा चुका है, जो सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की सीधी पहुँच सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह अभियान उसी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण है।

यह समग्र उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार की उस कार्यसंस्कृति को दर्शाती है, जिसमें जनसंवाद, त्वरित निर्णय, पारदर्शिता और परिणाम आधारित शासन को सर्वोपरि रखा गया है। प्रदेशभर में मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया यह सिद्ध करती है कि यह मॉडल आने वाले समय में सुशासन की एक मिसाल बनेगा।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, आपदा-पूर्व तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों तथा सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। साथ ही, तकनीकी नवाचार, अनुसंधान सहयोग एवं साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में ठोस रणनीतियां तैयार की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमस्खलन एवं वनाग्नि का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका दुष्प्रभाव वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समयबद्ध तैयारी एवं सामूहिक प्रयासों से कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए 4P (Predict, Prevent, Prepare, Protect) मंत्र दिया है, उसी के आधार पर 10-सूत्रीय एजेंडा पर इसके लिए कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आपदा-पूर्व तैयारी, एआई आधारित चेतावनी प्रणालियां, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग, रैपिड रिस्पॉन्स टीमें, फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम एवं वनाग्नि प्रबंधन कार्ययोजना पर निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग, वन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आईआईटी रुड़की के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। राज्य सरकार आईआईटी के सहयोग से इस प्रणाली के विस्तार, भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग एवं बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए राज्य में पौधारोपण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक कार्य किए जा रहे हैं। जल संरक्षण तथा संवर्धन की दिशा में स्प्रिंग रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) द्वारा कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सुरक्षित घरों एवं इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ध्यान देने तथा अधिकारियों से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर जोनल कॉर्डिनेटर, प्रज्ञा प्रवाह, श्री भगवती प्रसाद राधव , निदेशक, आईआईटी रुड़की प्रो. के. के. पन्त , उपनिदेशक, आईआईटी रुड़की, प्रो. यू .पी.सिंह , प्रो.संदीप सिंह एवं विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक उपस्थित थे।

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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में सेब की अति सघन बागवानी योजना सम्बन्ध में शासन में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। इस अवसर पर मुख्य सचिव ने प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट का उत्पादन बढ़ाए जाने के सम्बन्ध में अधिकारियों से चर्चा की। मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता एवं अन्य राज्यों की उत्पादन क्षमता के सापेक्ष उत्तराखण्ड की उत्पादन क्षमता पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि “सेब की अति सघन बागवानी योजना” के अंतर्गत सेब की नवीनतम प्रजातियों के बागान स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए मुख्य सचिव ने जनपदों में किसानों को क्लस्टर बेस्ड एप्रोच अपनाए जाने हेतु प्रेरित किया जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य में सेब उत्पादन को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। प्रदेश में अभी सेब उत्पादन क्षेत्र बढ़ाए जाने की अत्यधिक सम्भावना है, जो प्रदेश में सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट उत्पादन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रदेश की उत्पादन क्षमता विशेषकर सेब की उत्पादन क्षमता का आंकलन किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपदों को सेब उत्पादन में क्षमता के अनुरूप 2030, 2040 एवं 2050 में कितना उत्पादन होगा, इसके लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजना को धरातल पर उतारा जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि झाला (हर्षिल, उत्तरकाशी) स्थिति कोल्ड स्टोरेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। इससे किसान अपना सेब और अन्य उत्पाद ऑफ सीजन में मार्केट में उतार कर अधिक लाभ ले सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अभी भी पुरानी कम उत्पादन क्षमता वाली किस्म की फसलों का उत्पादन हो रहा है। उन्हें हाई डेंसिटी ऐपल प्लांट्स से रिप्लेस करने की आवश्यकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर किसानों से संवाद करते हुए इस दिशा में कार्य किया जाए। उन्होंने इसकी भावी मांग के अनुरूप नर्सरियों को अपग्रेड किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि बड़े पैमाने पर हाई डेंसिटी प्लांट्स तैयार किए जाने के लिए नर्सरियां विकसित की जाएं। फुल टाईम टैक्निकल सपोर्ट के लिए पीएमयू गठित किया जाना चाहिए, ताकि वृहद स्तर पर इस योजना को संचालित किया जा सके। इससे धरातल पर योजनाओं को सफल बनाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. वी. षणमुगम एवं डॉ. एस.एन. पाण्डेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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*मुख्यमंत्री ने किया नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैम्पियनशिप का शुभारंभ*

*बीता एक दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय, खेल परिदृश्य में आया अभूतपूर्व बदलाव*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए कहा कि बीते एक दशक में भारत के खेल इतिहास में अभूतपूर्व बदलाव आया है, यह दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है।

रुड़की स्थित कोर यूनविर्सिटी में आयोजित उद्घाटन समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि ये प्रतियोगिता केवल खेल आयोजन नहीं बल्कि भारत की उस अदम्य इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो हर बाधा को चुनौती में और हर चुनौती को अवसर में बदल देती है। उन्होंने कहा कि पावरलिफ्टिंग अपने आप में अनुशासन, धैर्य, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है, ये खेल केवल ताकत ही नहीं, बल्कि हौंसले और आत्मसम्मान की अद्वितीय मिसाल है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत के दिव्यांग भाई-बहन, आज प्रत्येक क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर ने 1972 के ग्रीष्मकालीन पैरालंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। इसी क्रम में सत्येंद्र सिंह लोहिया पहले ऐसे भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी बने, जिन्होंने 12 घंटे में इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया। भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने दोनों हाथ न होने के बावजूद विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर ये साबित कर दिया कि कमजोरी को किस प्रकार अपनी ताकत बनाया जाता है। इसी तरह दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम ने कोलंबों में टी-20 ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट वर्ल्ड कप-2025 जीतकर भारत का नाम रोशन किया है। इसके अलावा टोक्यो पैरालंपिक में अवनी लेखरा ने शूटिंग और सुमित अंतिल ने जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व पटल पर अपनी धाक जमाई। इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में तो पेरिस में आयोजित पैरालिंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर इतिहास रचा साथ ही 2025 में दुबई में हुई एशियन यूथ पैरा गेम्स में 110 पदक जीतकर पूरे विश्व को ये बता दिया कि भारतीय पैराओलंपिक खिलाड़ी किसी से कम नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने समारोह में उपस्थित पद्मश्री दीपा मलिक का उल्लेख करते हुए कहा कि आप भारत की पहली महिला पैरालंपिक खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 2016 के रियो पैरालंपिक की शॉटपुट प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। इसके अलावा आप एक सफल बाइकर, तैराक और कार रैली चालक भी हैं, आपका पूरा सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि बीते एक दशक में भारत के खेल इतिहास में अभूतपूर्व बदलाव आया है, यह दशक भारतीय खेलों का स्वर्णिम अध्याय बन चुका है। भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अपनी सीमाओं को तोड़ते हुए दुनिया को दिखाया है कि भारत अब केवल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाला देश नहीं रह गया है, आज का “नया भारत” मुकाबला जीतने के लिए खेलता है। इस परिवर्तन के पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की स्पष्ट सोच और मजबूत नीति रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का खेलों के प्रति प्रेम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके नेतृत्व में भारत का खेल बजट पहले के मुकाबले तीन गुणा बढ़ चुका है। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “खेलो इंडिया” मुहिम देश के प्रत्येक हिस्से से विभिन्न खेल प्रतिभाओं को आगे लाने में कामयाब हो रही है। वहीं इससे देश में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि पिछले वर्ष हमारे राज्य में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन ने उत्तराखंड को “देवभूमि’’ के साथ – साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर 7वां स्थान प्राप्त किया। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य में विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रयास कर रही है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तराखंड केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन करने में भी सक्षम बन सका है।
मुख्यमंत्री ने दिव्यांग खिलाड़ियों के माता-पिताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि आप सभी ने दिव्यांग बच्चों को कभी कमजोर नहीं समझा, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बनाया। आज ये बच्चे पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ऐसे हर प्रयास में दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ खड़ी है।

इस अवसर पर खेल रत्न पद्श्री डॉ दीपा मलिक, पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव श्री जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावर लिफ्टिंग के चैयरपर्सन श्री जेपी सिंह, पैरा राव लिफ्टिंग के उपाध्यक्ष श्री शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चैयरमैन श्री जेसी जैन, पैरालंपिक पावर लिफ्टर श्री परमजीत कुमार, श्री अशोक, श्री कस्तूरी उपस्थित हुए।

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: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कन्हैया लाल डीएवी महाविद्यालय, रुड़की में आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक, समाज की चेतना को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। जिस समाज में शिक्षक सुरक्षित, सम्मानित और संतुष्ट होता है, वही समाज प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हुए उन्नति के शिखर को छूता है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को प्रमुखता देते हुए राज्य में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हम शिक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, व्यावहारिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए भी कई स्तरों पर कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार, शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे स्किल डेवलपमेंट से जोड़कर राज्य में रोजगार के साथ स्वरोजगार के क्षेत्र में भी युवाओं को आगे बढ़ाना चाहती है। सरकार ने देश में सबसे पहले नई शिक्षा नीति को लागू कर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट कर दिया है। नई शिक्षा नीति के तहत अब हमारे विश्वविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे कई नए कोर्स शुरू हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार द्वारा राज्य में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। छात्र-छात्राओं की सुविधा के लिए महिला छात्रावास, आधुनिक आई.टी. लैब और नए परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है। हमने ब्रिटेन के साथ शेवनिंग उत्तराखण्ड छात्रवृत्ति के लिए समझौता किया है। इसके तहत हमारे 5 सबसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मास्टर्स के लिए ब्रिटेन भेजा जाएगा। युवा देश के 100 श्रेष्ठ रैंकिंग वाले संस्थाओं में प्रवेश लेंगे, हमारी सरकार उन्हें 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि भी देने का कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड का युवा केवल नौकरी मांगने वाला न बने, बल्कि स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बने, इसके लिए भी राज्य सरकार काम कर रही है। उत्तराखंड के महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उत्कृष्ट शोध पत्रों के प्रकाशन पर राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा युवाओं के भविष्य से खेलने वाले नकल माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। 100 से अधिक नकल माफिया सलाखों के पीछे हैं। साढ़े चार वर्षों में हमारे 26 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियाँ प्राप्त हुई हैं। ये संख्या राज्य गठन के बाद किसी भी सरकार द्वारा दी गई कुल नियुक्तियों से दो-तिहाई से भी अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब 1 जुलाई 2026 के बाद देवभूमि में केवल वही मदरसा संचालित होंगे, जो सरकार द्वारा निर्धारित आधुनिक सिलेबस पढ़ाएंगे, वरना उन्हें बंद किया जाएगा। उन धार्मिक गुरुओं पर भी नियंत्रण लगाया जाएगा, जो बिना किसी शैक्षिक योग्यता के केवल धार्मिक आधार पर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। हमारा प्रयास है कि राज्य के शिक्षा मंदिरों में तय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को उनके समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करना होना चाहिए, ना कि उन्हें 500 साल पुरानी कबीलाई मानसिकता की ओर धकेलना।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. कल्पना सैनी, विधायक श्री प्रदीप बत्रा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेंद्रपाल सिंह एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
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*यूएसडीएमए की कार्यप्रणाली से रूबरू हुए प्रशिक्षु डिप्टी एसपी*

*आपदा प्रबंधन में पुलिस की भूमिका पर प्रदान की गई जानकारी*

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में वर्ष 2024 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी पुलिस अधीक्षक राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली, संस्थागत ढांचे तथा आपदा प्रबंधन के विभिन्न चरणों में पुलिस के अधिकारियों तथा विभाग की भूमिका से रूबरू हुए।
इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों को आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यप्रणाली, आईआरएस (इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम) की अवधारणा एवं संरचना, चेतावनी प्रसारण तंत्र, आपदा पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा उपरांत पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण की प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका, नीतिगत दिशा-निर्देशों तथा राज्य स्तर पर उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारी एसईओसी और डीईओसी की कार्य प्रणाली से भी रूबरू हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन के संपूर्ण चक्र-आपदा पूर्व, आपदा के दौरान एवं आपदा के बाद की प्रक्रिया में पुलिस विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले प्रमुख एजेंसियों में से एक होता है, जिसकी जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय सहयोग देना भी होती है।
उन्होंने बताया कि आपदा के समय पुलिस की प्रमुख भूमिका में प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना, सुरक्षित निकासी (एवैक्यूएशन), भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, राहत सामग्री के निर्बाध वितरण में सहयोग, संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा, अफवाहों पर नियंत्रण तथा सटीक सूचना का संप्रेषण शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य, अग्निशमन, एसडीआरएफ एवं अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य में एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के रूप में आपदा प्रबंधन से जुड़ी रणनीतिक एवं नेतृत्वकारी भूमिकाओं का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में डेडिकेशन, डिवोशन, मानवीय संवेदनशीलता, अनुशासन और त्वरित निर्णय क्षमता ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की कुंजी होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के अभिमुखीकरण कार्यक्रम प्रशिक्षु डिप्टी एसपी को आपदा प्रबंधन की जमीनी समझ प्रदान करेंगे तथा वे भविष्य में राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डाॅ. पीडी माथुर, श्री मनीष भगत, डाॅ. पूजा राणा के साथ ही प्रशिक्षु डिप्टी एसपी श्री दक्ष शोखंद, श्री आदित्य तिवारी, श्री लव शर्मा, श्री दिव्येश उपाध्याय, श्री अंकित थपलियाल, श्री समीरण भट्ट, श्री विनय सिंह, सुश्री अवनी तिवारी, सुश्री दीप्ति कैड़ा एवं सुश्री तनुजा बिष्ट उपस्थित रहे।
[16/01, 8:05 pm] +91 94101 89723: *मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से डॉ. दीपा मलिक ने की शिष्टाचार भेंट*

*मुख्यमंत्री ने पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर दिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश*

आज मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से देश की प्रतिष्ठित पैरा एथलीट एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. दीपा मलिक ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने डॉ. दीपा मलिक को सम्मानित कर उनके योगदान की सराहना की और पैरा स्पोर्ट्स के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों को देश और समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

भेंट के दौरान डॉ. दीपा मलिक ने उत्तराखंड में पैरा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक पैरा स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का अनुरोध मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में प्रतिभाशाली पैरा खिलाड़ियों की अपार संभावनाएं हैं और यदि उन्हें संरचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. दीपा मलिक के प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों और पैरा खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश अपर सचिव श्री आशीष चौहान को दिए, ताकि प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर आगे की ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इस अवसर पर पैरालम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव श्री जयवंत हम्मुनावा, इंडिया पैरा पावर लिफ्टिंग के चैयरपर्सन श्री जेपी सिंह, पैरा राव लिफ्टिंग के उपाध्यक्ष श्री शुभम चौधरी, कोर यूनिवर्सिटी के चैयरमैन श्री जेसी जैन, पैरालंपिक पावर लिफ्टर श्री परमजीत कुमार, श्री अशोक, श्री कस्तूरी उपस्थित रहे।

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जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम में रिकॉर्ड उपलब्धि: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लाखों लोगों को मिला त्वरित समाधान*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेशभर में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम ने जनसेवा, पारदर्शिता और त्वरित समाधान के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। आज 16 जनवरी 2026 तक आयोजित शिविरों के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि राज्य सरकार आमजन की समस्याओं को उनके द्वार तक जाकर सुनने और समाधान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जनपदों में अब तक कुल 363 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें से 347 शिविर पूर्व दिवसों तक और 16 शिविर आज आयोजित हुए। इन शिविरों के माध्यम से कुल 2,80,030 नागरिकों ने सहभागिता की, जिनमें 2,77,654 लोग पूर्व दिवसों तक और 10,376 लोग आज शामिल रहे। यह दर्शाता है कि सरकार की इस पहल को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

शिविरों में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 29,086 शिकायतों का निस्तारण किया गया है, जिनमें 28,293 शिकायतें पूर्व दिवसों तक तथा 793 शिकायतों का निस्तारण आज किया गया। इसके साथ ही कुल 19,491 शिकायतें पंजीकृत की गईं, जिनमें 18,973 शिकायतें पूर्व दिवसों तक और 518 शिकायतें आज दर्ज की गईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री धामी की मंशा के अनुरूप शिविरों में प्राप्त आवेदनों के समर्थन में विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र भी बड़ी संख्या में बनाए गए। कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 39,689 प्रमाण पत्र तैयार किए गए, जिनमें 38,255 प्रमाण पत्र पूर्व दिवसों तक और 1,444 प्रमाण पत्र आज बनाए गए। यह सुविधा नागरिकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और सुलभ बना रही है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किए गए नागरिकों की संख्या भी उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम के माध्यम से अब तक कुल 1,58,239 व्यक्तियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया, जिनमें 1,51,565 लाभार्थी पूर्व दिवसों तक और 6,674 लाभार्थी आज शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम का उद्देश्य केवल समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि उनका त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनता से प्राप्त प्रत्येक शिकायत और सुझाव पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाए, ताकि शासन और जनता के बीच विश्वास और अधिक मजबूत हो।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह कार्यक्रम उत्तराखंड में सुशासन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ते हुए सेवा, समाधान और संतुष्टि की नई मिसाल कायम की है।

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भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का प्रहार जारी, हरिद्वार में रिश्वत लेते जिला पूर्ति अधिकारी व सहायक गिरफ्तार*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों एवं जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति के तहत प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विजिलेंस विभाग की टीम ने हरिद्वार जनपद में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य एवं उनके सहायक को ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून से आई विजिलेंस टीम को काफी समय से जिला पूर्ति कार्यालय हरिद्वार से जुड़े इन अधिकारियों की रिश्वतखोरी की लगातार सूचनाएं प्राप्त हो रही थीं। सूचनाओं के सत्यापन एवं सटीक योजना के बाद विजिलेंस टीम ने जाल बिछाकर यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम द्वारा दोनों आरोपियों से जिला पूर्ति कार्यालय हरिद्वार में ही गहन पूछताछ की जा रही है, साथ ही संबंधित कार्यालय के अभिलेखों एवं अन्य दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा किया जा सके।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि सरकारी सेवा को जनता की सेवा मानते हुए यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजिलेंस, एसटीएफ एवं अन्य जांच एजेंसियों को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में बीते वर्षों में प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार आक्रामक अभियान चलाया गया है। चाहे वह रिश्वत लेते अधिकारियों की गिरफ्तारी हो, अवैध संपत्ति पर कार्रवाई हो या भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय दंड, राज्य सरकार ने हर स्तर पर कड़ा संदेश दिया है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के लिए कोई स्थान नहीं है। इन निरंतर कार्रवाइयों से आमजन में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी प्रशासन उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं भी भ्रष्टाचार की शिकायत हो, तो निःसंकोच संबंधित माध्यमों से सूचना दें, सरकार उनकी पहचान गोपनीय रखते हुए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

हरिद्वार में हुई यह कार्रवाई मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उस प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है, जिसके तहत उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त, सुशासन युक्त और विश्वास आधारित शासन प्रणाली की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

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