फेडरेशन आफ आल इंडिया व्यापार मंडल के तत्वाधान में महामंथन

Pahado Ki Goonj

फेडरेशन आफ आल इंडिया व्यापार मंडल के तत्वाधान में महामंथन

नई दिल्ली। दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हाल मे शुक्रवार को आयोजित जीएसटी के महामंथन कार्यक्रम मे राष्ट्रीय दलो के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष देश भर के व्यापारी नेताओं ने नई कर प्रणाली से व्यापार मे आ रही दिक्कतो पर व्यापक चर्चा करते हुए इसमे सुधार किए जाने की पुरजोर मांग की है। लगभग तीन घंटे से अधिक चले इस मंथन मे व्यापारी नेताओं ने जीएसटी की कानूनी, कर संबंधी और तकनीकी तौर पर मौजूद लगभग 35 से अधिक विसंगतियो की खोज की है। जीएसटी महामथन कार्यक्रम मे दर्जन भर राज्यों के सैकड़ो व्यापार मंडलो के व्यापारी प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।कार्यक्रम के शुरुआत में प्रकाश पांडे जो हल्द्वानी के ट्रांसपोर्टर बिजनेसमैन थे और नोटबंदी व GST के प्रभाव से पीड़ित हो करके आत्म हत्या करनी पड़ी थे उनकी आत्म कि शांति के लिए 2 मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गयी !इसके बाद कार्यक्रम की शुरुआत विवेक गुप्ता, MP (TMC) ने दीप प्रज्वलित कर किया !

फेडरेशन के इस गैर राजनीतिक कार्यक्रम मे लगभग सभी प्रमुख दलो के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। जिसमे जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू, टीएमसी के विवेक गुप्ता और एनसीपी के डीपी त्रिपाठी ने जीएसटी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसमे व्यापक सुधार किए जाने की व्यापारियों की मांग का समर्थन किया। वहीं उत्तराखंड के कारोबारी पंकज पाण्डेय- द्वारा जीएसटी से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की घटना के कारण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस कार्यक्रम मे नहीं आ सके लेकिन उन्होंने ऑनलाइन मोबाइल द्वारा सभा को सम्बोधित किया ! राधेश्याम शर्मा ने स्वागत भाषण में GST की खामियों और सरलीकरण के लिए मंच पर बैठे हुए विभिन्न पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं से आग्रह किया कि हमारी बातों को सरकार तक पहुचाये !

फेडरेशन के जीएसटी कमेटी के चेयरमैन आरके गौर ने कहा कि जीएसटी मे व्यापक सुधार बना पाने मे सरकार नाकाम रही है। सरकार को चाहिए व्यापारियों द्वारा यहां उठाए गए बिंदुओं पर गंभीरता से मनन करते हुए सुधार की कार्यवाही को अंजाम दे। इसके तहत आरसीएम और ईवे बिल को पूरी तरह से समाप्त करने और 28 फीसदी की उच्च श्रेणी की दर को हटाया जाना जरूरी है।, सभी के लिए तिमाही रिटर्न भरने की छूट | उन्होंने कहा कि क्रेता व्यापारी Input GST Credit सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर मिलना चाहिये । यदि कोई कारोबारी एकत्र किया हुआ GST सरकारी खाते में जमा नहीं करता या GST सरकारी खाते में जमा करने के उपरांत GST विवरणी दाखिल नहीं करता, ऐसी अवस्था में क्रेता कारोबारी का Input Tax Credit से वंचित नहीं करना चाहिए बल्कि उक्त क्रेता कारोबारी का सुचना के आधार पर टैक्स/विवरणी जमा न करने वाले कारोबारी का दण्डित करना चाहिए ।इसी प्रकार कम्पोजीशन व्यापारी पर अपने स्टेट में ही कारोबार करने का प्रतिबन्ध समाप्त होना चाहिये और सेवा क्षेत्र भी कम्पोजीशन में आना चाहिये । गौर ने कहा कि E Way Bill व्यापारियों के कन्धों पर अनावश्यक रूप से सौपा वह भार है जो बिलकुल अव्यवहारिक है और E Way Bill की निहित शर्तें पूरी कर पाना बेहद मुश्किल है! E way Bill पर हर राज्य ने अपने अपने अलग कानून एवं प्रक्रिया बनाई है जिनका पालन कारोबारियों एवं ट्रांसपोर्टरों द्वारा अत्यंत कठिन है ! अतः E Way Bill को सभी राज्यों में समाप्त किया जाना चाहिए |
विशिष्ट अतिथि विवेक गुप्ता, MP (TMC ) ने कहा कि GST कि शुरुआत ही गलत हो रखी है सरकार सारे व्यापारियों को कर चोर मानती है उन्होंने यहाँ तक कहा कि हमने तो सरकार को कहा है कि हमारी जितनी आमदनी है वो पूरी आप ले लो, और फिर उसमें से एक हिस्सा निकल कर हमें दे दो, जिससे कि हम अपने व्यापार व परिवार का भरण पोषण कर सकें ! साथ ही साथ उन्होंने व्यापारियों से कहा आप अपनी शिकायतें लिखित रूप में सरकार को दें ! जिससे कि कभी न्यायालय कि शरण में जाना हो तो व्यापारी कम से कम न्यायालय को समझा पाने में सक्षम होंगें, उनके सारे प्रयास करने के वाबजूद सरकार ने उनकी नहीं सुनी और अब उनके पास एक मात्र विकल्प न्यायालय ही रह गया है ! उन्होंने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि हम आपके लिए सदैव उपलब्ध हैं और व्यापारियों को संगठित होने की जरुरत है तभी उनकी बात सरकार द्वारा सुनी जाएगी !अन्य व्यापारी नेताओं अनिल भाटिया, अध्यक्ष, हरयाणा व्यापार हित मंडल, राकेश यादव, अध्यक्ष, सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन, के के गुप्ता, अध्यक्ष, नारायणा आयरन & स्टील मर्चेंट वेलफेयर एसोसिएशन इत्यादि ने भी सरकार को चेताया की आने वाले 2019 का चुनाव सरकार को भारी पड़ सकता है ! अगर उन्होंने व्यापारियों की समस्या का निराकरण नहीं किया! साथ ही साथ उन्होंने बोला व्यापारी देश की रीढ़ की हड्डी हैं उन्हें इतना परेशान न किया जाय कि उन्हें भी आत्म हत्या करना जैसा निराशावादी कदम उठाना पड़े ! और सभी व्यापारी नेताओं ने लगभग 35 बिंदुओं पर सहमति जताई और सरकार से अनुरोध किया कि तत्काल उस पर कार्यवाही की जाय ! शयाम जाजू, वरिष्ठ बीजेपी नेता एवं रष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीजेपी ने कहा कि सरकार व्यापारियों कि पूरी तरह से सुन रही है, नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार आगे बढ़ रही है और जहाँ जहाँ सुधारीकरण कि जरुरत पड़ रही है उन्हें पूरा किया जा रहा है ! और उन्होंने कहा कि मैं लगभग चार GST मीटिंग में इसी हॉल में आ चूका हूँ और हर बार पहले के मुकाबले में GST प्रतिरोध कम होता दिख रहा है यह खुद में ही एक संकेत है कि GST सुधारीकरण का असर साफ दिख रहा है, वो व्यापारी कि किसी भी समस्या के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं और आश्वाशन दिया कि सरकार व्यापारियों कि हर समस्या के लिए संवेदनशील है !फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री वी ०के० बंसल ने कहा कि अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का योगदान लगभग आधा है पर रोजगार के अवसर पैदा करने में असंगठित क्षेत्र की बहुत ही महत्त्व पूर्ण भूमिका है । असंगठित क्षेत्र द्वारा लगभग ४४ करोड़ को रोजगार मिला हुआ है जबकि संगठित एवं सरकारी क्षेत्र द्वारा सिर्फ ६ करोड़ लोगो को रोजगार उपलब्ध हुआ है । GST की मार सबसे ज्यादा असंगठित क्षेत्र पर पड़ी है जो न तो पड़ा लिखा है और नहीं संगठित क्षेत्र के तरह सुविधा संपन्न । दूसरे सामान के उत्पादक से लेकर उपभोगता तक पहुंचने में सिर्फ 20 प्रतिशत औसत Value Addition है और यह मूल्य संवर्धन 3-4 व्यापारिओं के हाथो होता है । यदि असंगठित क्षेत्र को GST मुक्त कर दिया जाए और इस Value Addition पर उत्पादक से ही GST वसूली कर ली जाए तो यह असंगठित क्षेत्र चिंता मुक्त वातावरण में कारोबार कर सकेगा और देश हित में अधिक से अधिक रोजगार के अवसर हमारे युवाओ को देगा । अतः फेडरेशन सरकार से मांग करता है कि असंगठित क्षेत्र को गस्त मुक्त कर दिया जाए । हरीश रावत भूतपूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस, उत्तराखंड एवं पूर्व मंत्री भारत सरकार, ने कार्यक्रम में शामिल न होने पर क्षमा मांगी और रामनगर, उत्तराखंड से सीधे मोबाइल के माध्यम से व्यापारियों को सम्बोधित किया कहा की हम व्यापारियों के साथ हैं कांग्रेस ने कभी ऐसे GST का विचार नहीं किया जैसे कि बीजेपी ने GST यानि गब्बर सिंह टैक्स के रूप में व्यापारियों के ऊपर थोपा है ! जो कि न व्यावहारिक है न ही व्यापारियों के लिए संवेदनशील है ! मध्यम क्षेत्र के व्यापारी भारतीय अर्थ व्यवस्था कि रीढ़ कि हड्डी है ऐसा शायद ही कभी हुआ होगा जैसा कि शहीद प्रकाश पांडे जो एक अच्छे व्यापारी थे बीजेपी के समर्थक थे पर उनकी भी बातें सरकार ने नहीं सुनी, नोटबंदी और GST के चलते इतनी तंगी में आ गए कि उन्हें सरकार के जनता दरबार में माननीय श्री सुबोध उनियाल के सामने जहर खाकर आत्म हत्या करनी पड़ी ! कांग्रेस सरकार से उम्मीद करती है कि सरकार इतना असंवेदनशील न हो व्यापारियों कि समस्या समझे, GST में व्यापक सूधार कर, कर वसूली में नम्रता वरते !फेडरेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेश्वर पैन्युली ने उत्तराखंड के व्यापारी पंकज पांडेय की आत्महत्या की घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जीएसटी के लागू होने के बाद से व्यापारी लगातार तनाव से गुजर रहे हैं। उत्तराखंड मे एक दिन पूर्व व्यापारी पंकज पांडेय द्वारा आत्महत्या की घटना इसका सबूत है। इसके पूर्व उत्तर प्रदेश और दिल्ली मे भी इस तरह की घटनाए हुई हैं। अब तक दर्जन भर से ज्यादा व्यापारी जीएसटी से तंग आकर मौत को गले लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने जीएसटी को लेकर इतना भय का वातावरण बना दिया है कि व्यापारी तनाव मे जीने को मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि देश भर मे जीएसटी को लेकर फैले भय और तनाव के माहौल को दूर करने की दिशा मे भी ऐसा काम करे कि व्यापारी मानसिक रूप से स्वस्थ रहे। सरकार का काम टैक्स वसूल करना जरूर है लेकिन इसके लिए ऐसा माहौल बनाना नहीं कि व्यापारी आत्महत्या करने को विवश हो जाए। सरकार तत्काल प्रभाव से E Way Bill स्थगित कर दे और विक्रेता के बिल को ही ट्रांपोर्ट करने के लिए आधिकारिक दस्तावेज मन जाय सरकार ने जो 5000 मानदंड या किलोमीटर का E Way Bill के लिए मानदंड रखा है वो कही से भी व्यावहारिक नहीं है जब सब कुछ सरकार के GST पोर्टल पर ही तो इस तरह के कागजी कार्यवाही से जनता को व ट्रांसपोर्टर भाइयो को मुक्त रखना चाहिए हमें एक देश एक कर कि व्यवस्था पर बढ़ना है न कि इंस्टेक्टर राज कि तरफ वापस जाना है ! शारद यादव, भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ राज्य सभा सदस्य ने भी विपिन कुमार बंसल, राष्ट्रीय महामंत्री की बात का समर्थन किया और कहा कि सिर्फ 20% व्यापारियों कि सुविधा के लिए 80% व्यापारियों पर GST नहीं लगनी चाहिए ! यह जो 80% व्यापारी हैं यही भारत को बेरोजगारी को दूर रखने में सफल हो रहे हैं शिक्षित व अशिक्षित युवाओं को यही व्यापारी है जो रोजगार का अवसर प्रदान करते हैं ये वो लोग है जिनके पास न तो कंप्यूटर कि बहुत अधिक जानकारी है वो स्वाभिमानी है और अपने सामर्थ्य से अपने परिवार का खर्चा और लगभग 44 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं सरकार के कुछ कामों में से रोजगार देने का भी एक काम है और GST नोटबंदी के चलते

इस क्षेत्र में रोजगार काम हो रहे हैं और इसी तरह से चलता रहा तो सिर्फ GST ही 7-5 करोड़ बेराजगारी कि फौज अगले एक से दो सालों में खड़ी कर देगी जो देश के लिए घातक होगा ! यादव का करोल बाग़ ज्वेलरी एसोसिएशन के अध्यक्ष व कई दूसरे नेताओं ने तह दिल से धन्यवाद दिया और कहा कि जिसके कारण सरकार झुकी थी और सर्विस टैक्स 5% से 3% करने को मजबूर हुए थी ! यादव ने सभी व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि हम आपके साथ हैं और सदैव आपके साथ रहेंगे आपके कंधे से कन्धा मिलाकर चलेंगे आप हमेशा हमें अपने साथ खड़ा पाओगे, मैं समाज का ही अंश हूँ मुझे समाजवादी कहा ही इसीलिए जाता है कि मैं समाज को साथ लेकर चलता हूँ ! इस देश कि अर्थव्यवस्था हाथी कि तरह है जो विशालकाय है, ताकतवर है पर वो मस्ती में आराम से चलने के लिए बनी है जैसे कि कभी भी आप हाथी को दौड़ाएंगे तो इससे नुकसान ही होता है हाथी को भी और जनता को भी, जिस ढंग से वर्तमान सरकार इस अर्थव्यवस्था को दौड़ाने कि कोशिश कर रही है और उसके नीचे व्यापारियों को कुचल रही है वो कभी भी हमें मान्य नहीं है हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और व्यापारियों से अनुरोध है कि वो एकजुट हों नहीं तो ये सरकार मदमस्त हाथी कि तरह से कुचलने में कोई देर नहीं लगाएगी ! श्री शरद यादव ने दिल्ली में रहे सीलिंग का विरोध किया और आश्वासन दिया कि हम व्यापारियों के साथ हैं और अंत में आवाहन किया कि GST मुक्त व्यापार के लिए आंदोलन करें !

उन्होंने कहा कि सरकार को अंतरराज्यीय कारोबार के लिए ईवे बिल व्यवस्था को समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटीएन पोर्टल के बार-बार खराब होने का खामियाजा देश के व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले चार दिनो से यह काम नहीं कर रहा है। इसके साथ ही रिफंड की समस्या भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। इस पर सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है जबकि पिछले तीन महीने से व्यापारी लगातार इस समस्या को सरकार और जीएसटी काउंसिल के समक्ष उठा रहे हैं। अब स्थिति यह है कि व्यापारियों की जमापूंजी सरकार के खाते मे फंसकर रह गयी है। जिसके चलते व्यापार प्रभावित है। उन्होंने कहा कि आज के जीएसटी महामंथन मे व्यापारियों ने जिन-जिन विसंगतियों पर चर्चा की है। उन्हें फेडरेशन अपने मांग पत्र के रूप मे केंद्र सरकार को जल्द ही सौपेंगा ताकि 18 जनवरी को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक मे इन पर विचार के बाद पूरा किया जा सके।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले नोटबंदी, जीएसटी तथा अब एकल ब्रांड खुदरा कारोबार के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सौ फीसदी कर कारोबारियों का गला घोंट दिया है। कार्यक्रम के आयोजक चार्टर्ड एकाउंटेंट राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि जीएसटी की खामियों के खिलाफ एकजुट होना आवश्यक है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण पहले किसान ही आत्महत्या कर रहे थे और अब जीएसटी के कारण व्यापारी आत्महत्या कर रहे हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में व्यापारी प्रकाश पांडे ने जीएसटी से परेशान होकर राज्य के एक मंत्री के समक्ष आत्महत्या कर ली। उन्होंने कहा कि इस सरकार की नीतियों ने छोटे व्यापार को चौपट कर दिया है इसलिए इसके खिलाफ भारत बंद होना चाहिए। श्री त्रिपाठी ने जीएसटी मुक्त कारोबार का आह्वान करते हुए कहा कि जीएसटी को सरल होना चाहिए था लेकिन यह कारोबारियों के लिए गरल यानी विष बन गया है। जीएसटी की प्रणाली को अत्यंत जटिल बनाया गया है और पूरी तरह से इसे डिजीटल पर आधारित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि देश में 60 लाख कारोबारी कम्प्यूटर में प्रशिक्षित नहीं हैं लेकिन उन पर कम्प्यूटर के जरिए जीएसटी की व्यवस्था थोपी गयी है।

फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष जयेंद्र तन्ना एवं केशव चंद गांगुली ने संयुक्त रूप से कहा कि ने एक जुलाई 2017 से लागू होने के बाद से सरकार अब तक जीएसटी मे एक दर्जन से अधिक दफा संशोधन कर चुकी है। इसके बावजूद जीएसटी एक परिपक्व कर प्रणाली नहीं बन पायी है। स्थिति यह है कि नई कर प्रणाली के लागू होने के बाद से व्यापार की हालत लगातार खराब हुई है और यह पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। लिहाजा इसमे तत्काल सुधार किए जाने की जरूरत है। व्यापारियों की मांग का सभी राष्ट्रीय दलो के वरिष्ठ नेताओं ने समर्थन किया। उन्होंने माना कि नई कर प्रणाली घरेलू व्यापार के लिए घातक सिद्ध हुई है। लघु और कुटीर उद्योगो पर भी जीएसटी का बुरा असर पड़ा है। नई कर प्रणाली के लागू होने के बाद से देश मे नए रोजगार के अवसर ठप हुए है और पहले से रोजगार व्यक्ति भी बेरोजगारी का शिकार हुए हैं।कार्यक्रम का संचालन श्री देवेंद्र अग्रवाल जी ने किया। उन्होंने फेडरेशन के विषय में बताया।कि

ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल ( सोसाइटी एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत) ,समस्त भारत के कारोबारियों के विभिन्न संगठनों के एक शीर्ष संस्था है और इसका प्रमुख उदैश्य कारोबारियों के मान , सम्मान ,सुरक्षा, सुविधा एवं नीति निर्धारण में कारोबारियों के सहभागिता सुनिश्चित करना है । फेडरेशन देश में चल रहे राष्ट्रीय स्तर , राज्य स्तर, प्रांतीय स्तर एवं जिला स्तर के विभिन्न व्यापारिक संगठन,ट्रेड एसोसिएशन एवं बाजार समितिओ को एक छतरी के नीचे ला कर , देश के व्यापारियोंको एक सशक्त मंच प्रदान करने की लिए प्रयत्न शील है ताकि देश के समस्त व्यापारी अपने हितो की रक्षा हेतु एक आवाज़ में अपना पक्ष रख सके ।फेडरेशन का मुख्यालय दिल्ली में स्थित है और एक कोर समिति, जिसमे व्यापारियोंके अतिरिक्त प्रोफेशनल्स और अर्थशास्त्री भी सम्मिलित है , फेडरेशन का कार्यकाज देखती है ।

सीऐ राजेश्वर पैनुली
राष्ट्रीय प्रवक्ता
+91 9868231957 / +91 9654431957
spokeperson@vyaparmahamandal.com

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