पिथौरागढ़। धारचूला तहसील में चीन सीमा को जोड़ने वाला अहम तवाघाट मोटरपुल टूट गया है। बताया जा रहा है कि मालपा से आगे सड़क काटने के लिए पुल से जेसीबी मशीन को लेकर ट्राला गुजर रहा था, उसी वक्त पुल भरभरा कर गिर गया। हादसे में ट्राला चालक नवीन सिंह (32 ) निवासी हिमाचल और पोकलैंड ऑपरेटर सुरेंद्र कुमार (40 ) निवासी पंजाब घायल हो गए हैं। इसी पुल के जरिए सुरक्षाबल चीन सीमा तक पहुंचते थे। यही नहीं पुल टूटने से बॉर्डर के दर्जनों गांवों का भी दुनिया से संपर्क टूट गया है। मानसरोवर यात्री भी इसी पुल से पवित्र कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए जाते थे। यह पुल बीआरओ के अधीन है। पुल के टूटने से अब जवानों और सीमांत लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। पुल के ध्वस्त होने से भारत-चीन सीमा पर तैनात सेना, एसएसबी और आईटीबीपी की अग्रिम चैकियों तक सामान पहुंचाने में दिक्कत आएगी। वहीं व्यास घाटी के सात गांवों और चैदास घाटी के कई गांवों के लिए आवाजाही बाधित हो गयी है। करीब 20 हजार की आबादी संकट में फंस गई है। क्षेत्र के लोगों ने फिलहाल बैली ब्रिज बनाने और बाद में स्टील गार्डर पुल का निर्माण करने की मांग की है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि 15 दिन के भीतर बैली ब्रिज का निर्माण हो जाएगा।
दिल्ली के विधानसभा चुनाव से उत्तराखण्ड में भी राजनीतिक माहोल गर्म
Mon Jan 20 , 2020
देहरादून। प्रदेश की राजधानी देहरादून से करीब ढाई सौ किलोमीटर दूर दिल्ली में विधानसभा चुनावों को लेकर माहौल गर्म है। भले ही चुनावों में दिल्ली की 70 सीटें दांव पर लगी हों लेकिन उनकी गर्माहट उत्तराखंड में भी महसूस की जा रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि हर […]

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ब्रेकिंग न्यूज़ उत्तरकाशी के पुरोला को जिला बनाओजिला मुख्यालय पुरोला से 150 से 200 किमी की दूरी में होने से उन्हें काफी सारी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। -स्थानीय लोगों को हर छोटी या बड़ी समस्या के लिये इतना लम्बा सफर तय करना पड़ता है। -जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण वहां के विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता है। -उनका कहना है कि पुरोला को जिला बनाने से यह सारी परेशानी खत्म हो जाएंगी। अलग जिला बनाने की मांग क्षेत्रवासियों ने बताया कि 24 फरवरी 1960 में उत्तरकाशी जिला टिहरी से अलग हुआ था। उस समय रवांई परगना उत्तरकाशी जिले में शामिल किया गया था। यह क्षेत्र बड़कोट, पुरोला, नो गांव, मोरी तहसील के अंदर आता है। 1960 में रवांई के लोगों ने अलग जिले की मांग शुरू कर दी थी। उसके बाद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद पृथक जिले की मांग और तेज हुई, जिसके चलते सरकार ने राज्य के 4 नए जिलों की घोषणा में यमुनोत्री को जिला बनाने की बात कही थी। जिससे पुरोला के लोग भड़क गए और तब से लगातार पुरोला को जिला बनाने की मांग की जा रही है।
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