देहरादून,राज्य सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस की दिशा में प्रभावी पहल करते हुए मंत्रिमण्डल की बैठकों को धीरे-धीरे पेपरलेस किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए, सोमवार को सचिवालय में ई-मंत्रिमण्डल से सम्बन्धित जानकारी सभी मंत्रीगणों को उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नवम्बर माह में आयोजित होने वाली मंत्रिमण्डल की बैठक को ई-मंत्रिमण्डल के रूप में आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, ई-मंत्रिमण्डल पोर्टल पर अब तक हुई मंत्रिमण्डल की बैठकों में लिये गये निर्णयों को भी अपलोड किया जायेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हम ग्रीन कैबिनेट की ओर बढ़ रहे हैं। यह ई-गवर्नेंस की दिशा में बढ़ाया गया एक बेहतर कदम है। इससे पेपर की बचत होगी और कम से कम पेपर के उपयोग से पर्यावरण को भी बचाने में सहायता मिलेगी। साथ ही निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के साथ ही पारदर्शिता भी आयेगी। इससे शासन की योजनाओं की जानकारी भी त्वरित रूप से आम जनता को उपलब्ध करायी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की यह पहल अन्य राज्यों को भी पेपरलेस गवर्नेंस के लिए प्रेरित करेगी।
अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने बताया कि ई-मंत्रिमण्डल की शुरूआत होने के उपरान्त मंत्रिमण्डल के कार्यों हेतु गोपन विभाग का पूर्णतः कम्पयूटराईजेशन किया जाना है। इससे सभी विभाग, मंत्रिमण्डल की बैठक सम्बन्धित कार्य हेतु, गोपन विभाग से सीधे जुड़ जाएंगे। साथ ही इससे मंत्रिमण्डल के निर्णयों के कार्यान्वयन का कागज रहित अनुश्रवण एवं समीक्षा की जा सकेगी। ई-मंत्रिमण्डल को एन.आई.सी. द्वारा तैयार किया गया है।
एन.आई.सी. के अरूण शर्मा ने बताया कि गोपन विभाग द्वारा प्रणाली का परीक्षण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि सचिवालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, उपसचिव, अनुसचिव एवं 110 अनुभाग अधिकारियों को इसके लिये प्रशिक्षित किया जा चुका है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, मदन कौशिक, यशपाल आर्य, अरविन्द पाण्डेय, श्रीमती रेखा आर्या एवं डॉ. धनसिंह रावत सहित शासन एवं एन.आई.सी. के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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