HTML tutorial

 नन्दा और गंगा के मायके, उद्गम में आस्था व विश्वास हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात ;भुवन नौटियाल

Pahado Ki Goonj

लाइक और शेयर कीजिये
इस विज्ञप्ति को अपने अपने समाचार पत्र पोर्टल मे प्रकाशित कर मा राष्ट्रपति जी मा प्रधान मन्त्री जी को मेल कर ने की कृपा कीजिये!! जय बदरी विशाल

मा सुप्रीम कोर्ट का सम्मान कर प्रेस को संवैधानिक अधिकार दिया जाय : जीतमणि पैन्यूली

आगे पढ़ें

नन्दा और गंगा के मायके, उद्गम में आस्था व विश्वास

हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात

भगवती नन्दा को मायके से ससुराल (कैलाश) भेजने की महायात्रा

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

 

हवीं शताब्दी में गढ़वाल के राजा ने राजधानी चांदपुर गढ़ी के समीप नौटी गांव में अपने राजगुरू नौटियालों को बसाया तथा यहां पर भगवती नन्दादेवी का श्रीयंत्र भूमिगत स्थापित कर पूजा अर्चना की जिम्मेदारी अपने राजगुरू नौटियालों को दी। यहीं से प्रति बारहवें वर्ष में नन्दादेवी राजजात आयोजित करने की परम्परा भी प्रारम्भ की। राजा द्वारा प्रारम्भ एवं संचालित इस यात्रा को राजजात यानी राजा की यात्रा भी कहा जाता है। राजा द्वारा प्रारम्भ इस यात्रा के आयोजन के नन्दा देवी मंदिर नौटी से प्रारम्भ होने का इतिहास है। मुख्य यात्रा के 20 पड़ाव हैं।

राजराजेश्वरी नन्दा

हिमालय की देवी नन्दा का मध्य हिमालय क्षेत्र में उत्तराखण्ड, नेपाल व तिब्बत तक विभिन्न रूपों में अपना वर्चस्व है इस क्षेत्र की यह आराध्य नन्दादेवी के प्रति है यहां की जनता व भू भाग पर राज करने वाले गढ़वाल व कुमाऊँ के राजाओं ने नन्दादेवी को राज राजेश्वरी का सम्मान दिया ताकि जनमानस का विश्वास राजाओं के साथ मित्रता पूर्ण हो। गोरखाओं के राज में भी नन्दादेवी का प्रभाव रहा है और नेपाल तक आस्था का क्षेत्र बढ़ा है। गोरखाओं के राज में यहां के इतिहास, संस्कृति को नष्ट करने के उद्देश्य से ताम्रपत्र, पाण्डुलिपियां आदि जो भी कांसुवा व नौटी में थी उन्हें नष्ट करने के कारण ये ऐतिहासिक दस्तावेज हमेशा के लिए समाप्त हो गये। लोकगीतों, जागरों और किदवंतियों आदि के माध्यम से नन्दा राजजात सहित अन्य इतिहास जीवित हैं। नौटी और कांसुवा में विगत 150 वर्षों की यात्राओं के दस्तावेज सुरक्षित हैं जिनके अनुसार सन् 1886, 1905, 1925, 1951, 1968, 1987, 2000, 2014 की यात्राओं के विवरण प्राप्त हैं।

गढ़वाल के राजवंशी राजकुंवर

गढ़वाल राज्य की राजधानी चांदपुर गढ़ी से बदलने पर राजा ने अपने छोटे (कानसा) भाई गढ़वाल के राजवंशी राजकुंवर जो चांदपुर गढ़ी के समीप कांसुवा गांव में रहते हैं उन्हें राज परिवार के प्रतिनिधि के रूप में यात्रा का आयोजन एवं नेतृत्व देने का अधिकार दिया जिसे राजकुंवर आज भी श्रद्धापूर्वक निभा रहे हैं। राजकुंवरों द्वारा नन्दादेवी राजजात से पूर्व नन्दा राजजात के प्रथम अनुष्ठान ऊपरांई देवी की मौडिवी पूजा 2024 में नौटी पहुंचकर भाग लिया गया। ऊपरांई देवी नौटी क्षेत्र की भूमि देवता है बसन्त पंचमी दि० 23 जनवरी 2026 को कांसुवा गांव के गढ़वाल के राजवंशी राजकुंवरों द्वारा विधिवत नन्दा राजजात की मनौती की छंतोली नन्दादेवी मन्दिर नौटी में पूजा-अर्चना के बाद अर्पित कर की जायेगी और इसी दिन यात्रा का दिन पट्टा (कार्यक्रम) की भी विधिवत घोषणा की जायेगी। नन्दा राजजात की इस राज छंतोली को भगवान शिव के शैलेश्वर मन्दिर में पहुंचाया जाता है, माना जाता है कि भगवान शंकर को नन्दा को मायके से ससुराल (कैलाश) भेजने की पूर्व सूचना दी जाती है।

क्रमश:-2

राज्यों के भारतीय गणराज्य में विलीनीकरण के बाद केन्द्र व राज्य सरकारों का दायित्व

नन्दा राजजात की व्यवस्थाओं की सम्पूर्ण जिम्मेदारी गढ़वाल के राजा एवं राज परिवारों की थी, वे इस क्षेत्र के 12 थोकी ब्रह्माणों 14 सयानों, पधानों, थोकदारों का सहयोग व्यवस्था में जिम्मेदारी के साथ लेते रहे हैं। लेकिन राज्यों के भारतीय गणराज्य में विलीनीकरण के बाद राजा की यात्रा की सामाजिक जिम्मेदारियां केन्द्र व राज्य के कन्धों में स्वतः ही आ गयी। राजाओं के प्रिवीपर्स भी बन्द हो गये। फिर भी राज परिवार, राजकुंवर अपनी धार्मिक जिम्मेदारियों का निर्वहन श्रद्धापूर्वक कर रहे है। यात्रा के स्वरूप अति व्यापक विश्वव्यापी होने से ढांचागत व मूल-भूत सुविधाओं के सृजन में यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से सरकारें नैतिक रूप से उत्तरदायी हो गयी हैं।

राज्य विलीनीकरण के बाद प्रथम यात्रा वर्ष 1968 में हुयी थी। भारत सरकार के फिल्म डिवीजन ने यात्रा की फिल्म (न्यूजरील नं. 1042) द एक्सपेडिशन आफ फेथ (विश्वास का अभियान) बनायी। राज्य सरकार ने यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में प्रतिभाग किया। चांदपुरगढ़ी गढ़वाल (टिहरी राज्य) नरेश महाराजा मानवेन्द्र शाह की ओर से यात्रा में भगवती नन्दा की पूजा अर्चना की गयी। महाराजा द्वारा चांदपुर दुर्ग से नन्दा राजजात में बलिप्रथा को बन्द करने की घोषणा की गयी जिसका पूर्णतया पालन वर्तमान तक की यात्राओं में किया जा रहा है। सन् 1987 की यात्रा में आयुक्त गढ़वाल मण्डल की अध्यक्षता में व्यवस्था समिति बनी थी। आयुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस अधिक्षक सहित सभी विभागाध्यक्ष यात्रा का प्रबन्धन यात्रा के साथ देख रहे थे। पहली बार यात्रा के पैदल पुलों के निर्माण में राज्य सरकार द्वारा मदद की गयी।

उ० प्र० विधान परिषद् में भी नित्यानन्द स्वामी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव यात्रा से सम्बन्धित व्यवस्था व सुरक्षा की चिंता व्यक्त की और सरकार ने पूर्ण आश्वसन दिया। ढांचागत एवं मूलभूत सुविधाओं के सृजन में राज्य सरकार की पहली बार भागीदारी हुयी। उ० प्र० सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के फोटो फिल्म प्रभाग ने फिल्मांकन किया। केन्द्रीय पैट्रोलियम मंत्री श्री ब्रह्मदत्त हेलीकॉप्टर से नौटी पहुंचे।

सन् 2000 की यात्रा को उ० प्र० की सरकार ने और अधिक सक्रिय बनाया। केन्द्रीय मंत्री डा० मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा की वेबसाइट तथा उ० प्र० के कैबिनेट मंत्री डा० रमेश पोखरियाल निशंक ने यात्रा के शुभांकर (लोगो) का लोकार्पण किया। दूरदर्शन लखनऊ ने फिल्म बनायी। अनेक निर्माण कार्य हुए, मेजर जनरल वी० सी० खण्डूरी एवं श्री मनोहरकान्त ध्यानी ने सांसद निधि से यात्रा पड़ावों पर सामुदायिक मिलन केन्द्रों का निर्माण कराया। यात्रा में 75 वर्ष के बाद नन्दकेशरी में अल्मोड़ा की नन्दा कुमाऊँ के राजा के०सी० सिंह बाबा के साथ शामिल हुए, ठीक इसी दिन भारत की संसद में उत्तराखण्ड राज्य के गठन का संकल्प प्रस्तुत किया गया और 02 माह बाद नव सृजित राज्य उत्तराखण्ड का गठन भी हुआ। इतिहासकारों का मानना है कि राज्य का निर्माण जहां सघर्ष बलिदान से प्राप्त हुआ वहीं उत्तराखण्ड हिमालयी सचल महाकुम्भ नन्दादेवी राजजात के अनुष्ठान ने भी राज्य को शीघ्र दिलाने में मदद की, यही नहीं राज्य निर्माण के बाद 26 जनवरी 2001 को नई दिल्ली राजपथ पर उत्तराखण्ड का प्रतिनिधित्व नन्दा राजजात की झांकी ने किया तब से राज्य के प्रत्येक पर्व/समारोह में नन्दा राजजात की झांकी को राज्य व राज्य के बाहर भी प्रमुख स्थान मिला। राज्य के पाठ्यक्रम में यात्रा को शामिल किया गया। यात्रा में सांसद मे.ज.वी. सी. खण्डूरी, श्री मनोहरकान्त ध्यानी, केन्द्रीय मंत्री श्री बच्ची सिंह रावत, उ० प्र० के कैबिनेट मंत्री डॉ० रमेश पोखरियाल निशंक, श्री भगत सिंह कोश्यारी, डा० शिवानन्द नौटियाल आदि प्रमुख रूप से शामिल हुये। उ०प्र० विधान परिषद् में श्री प्रकाश पंत ने यात्रा की तैयारियों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा मुख्य सचिव पर उ० प्र० सरकार ने एक समिति का भी गठन किया। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गढ़वाल व कुमाऊँ में भी यात्रा व्यवस्था समितियां बनी।

वर्ष 2013 में नन्दा राजजात की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी थी। उत्तराखण्ड सरकार ने नन्दादेवी राजजात यात्रा विकास परिषद का गठन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य सचिव स्तर, गढवाल व कुमाऊँ आयुक्तों की अध्यक्षता में, जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में समितियां बनी। उपजिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी, 05 पड़ावों के एक सेक्टर प्रभारी व पड़ावों पर जिला स्तरीय अधिकारियों का पड़ाव अधिकारी तैनात किया गया, पड़ावों पर पड़ाव, यात्रा मार्ग व सम्बन्धित पक्षों की ओर से पड़ाव समितियों का गठन श्री नन्दादेवी राजजात समिति ने किया ताकि स्थानीय परिस्थिति के अनुरूप तालमेल से यात्रा सुसम्पन्न हो। सन् 2013 में आयी भयंकर आपदा के कारण यात्रा स्थगित करनी पड़ी फिर यात्रा 2014 में हुई। यात्रा की तैयारियों को लेकर राज्यसभा में श्री तरूण विजय ने सरकार से यात्रा व्यवस्थाओं को समय पर करने के लिये प्रस्ताव रखा। राज्य सरकार के सहयोग सफल यात्रा रही। राष्ट्रपति की ओर से भी यात्रा में पूजा करायी गयी। उत्तराखण्ड के राज्यपाल यात्रा के शुभारम्भ पर नौटी पहुंचे थे, उत्तराखण्ड सरकार के सभी मंत्रीगण यात्रा के विभिन्न स्थानों पर पहुंचे थे। ढांचागत व मूलभूत सुविधाओं के सृजन पर 150 करोड़ रूपये राज्य सरकार ने व्यय किये वित्तीय स्वीकृतियों के विलम्ब से अनेक कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाये।

वर्ष 2014 की यात्रा में राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नन्दादेवी राजजात यात्रा विकास परिषद् का गठन किया। मुख्य सचिव आयुक्त गढ़वाल एवं कुमाऊँ मंडल, जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में अनुश्रवण समितियां गठित हुई, उपजिलाधिकारी नोडल अधिकारी बने, सेक्टर मजिस्ट्रेट के साथ ही पड़ावों पर जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती हुई, मुख्य यात्रा मार्ग व सहायक यात्रा मार्ग पड़ावों पर ढांचागत व्यवस्थाओं व मूलभूत सुविधाओं का सृजन हुआ। भारत सरकार के अनेक मंत्रालयों का भी सहयोग प्राप्त हुआ।

वर्ष 2026 में प्रस्तावित नन्दा राजजात की तैयारियों के लिये वर्ष 2023 से राज्य सरकार विभिन्न स्तरों पर तैयारी कर रही है। मा० प्रधानमंत्री जी जब माणा गांव के प्रवास पर आये थे तब भी मा० मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी व मा० प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री महेन्द्र भट्ट जी ने नन्दा राजजात की तैयारियों के लिये केन्द्र के सहयोग का जिक्र किया था। हाल ही में जब प्रधानमंत्री जी उत्तरकाशी आये थे तो प्रधानमंत्री जी की जनसभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री जी ने हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात 2026 को मा० प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भव्य व दिव्य बनाने का संकल्प लिया, इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिये प्रयास प्रारम्भ हो गये हैं। श्री नन्दादेवी राजजात समिति द्वारा दिये गये 57 प्रस्तावों में से 42 प्रस्तावों पर उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी अध्यक्षता में की गयी उच्चस्तरीय बैठक दि० 11 अप्रैल 2025 में स्वीकृति प्रदान कर दी है, उनके निर्देश पर कर्णप्रयाग में भी यात्रा से सम्बन्धित पक्षों की बैठक हुई है जिसके प्रस्तावों पर भी कार्यवाही गतिमान है। भारत सरकार के नीति आयोग की मा० प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक में भी माननीय मुख्यमंत्री ने हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात के आयोजन में केन्द्र सरकार के सहयोग का प्रस्ताव किया है।

क्रमश:-4

प्रधानमंत्री जी गंगा के मायके का भ्रमण कर चुके हैं। गंगा के महाकुम्भ का भी सफल आयोजन करवा चुके हैं। अब नन्दा के मायके नौटी में यात्रा से पूर्व वर्ष 2025 में भगवती नन्दा पूजन तथा यात्रा की तैयारियों को देखने के लिये सादर आमंत्रित हैं। काशी, महाकाल, केदारनाथ, जागेश्वर, छोटा कैलाश का मास्टर प्लान के तहत सौन्दर्याकरण कर भगवान शिवशंकर को प्रसन्न करने का भगीरथ प्रयास किया गया है। भगवान शिव की अर्धाग्नि हिमालय की देवी नन्दादेवी को प्रसन्न करने का अवसर आ गया है।

यात्रा में गढ़वाल एवं कुमाऊँ मण्डलों से 500 से अधिक देवडोलियां, छंतोलियां, निशान, ध्वज आदि नौटी से पातरनचौंणियां तक शामिल होते हैं। यात्रा में 20 दिनों तक पूरा उत्तराखण्ड नन्दामय हो जाता है। इसलिए इस महायात्रा को हिमालय का सचल (चलता-फिरता) महाकुम्भ कहा जाता है। शेष कुम्भ तो एक ही स्थान पर होते हैं।

गंगा के बाद अब नन्दा ने बुलाया है गंगा व नन्दा के उद्गम उत्तराखण्ड

गंगा के मायके मुखबा में प्रधानमंत्री जी द्वारा गंगा पूजन एवं शीतकालीन यात्रा का शुभारम्भ करने के बाद अब गंगा व नन्दा के उद्गम व मायके में नन्दादेवी मंदिर नौटी में शारदीय नवरात्र (दि० 22 सितम्बर 2025 से दि. 2 अक्टूबर 2025 के मध्य) में भी नन्दाभक्तों ने प्रधानमंत्री जी को बुलाया है कि यहां पर भी नन्दा की पूजा कर हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात की तैयारियां का पूरे उत्तराखण्ड के लिये शुभारम्भ करें। गंगा के बाद अब नन्दा के बुलावे को भी प्रधानमंत्री जी अवश्य शिरोधार्य करेंगे। वर्ष 2026 में नन्दा के महाकुम्भ के बाद संयोग से वर्ष 2027 में हरिद्वार में गंगा का अर्द्धकुम्भ भी आयोजित हो रहा है, दोंनो महाकुम्भ मा० प्रधानमंत्री जी के दिशा निर्देशन में तथा मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में दिव्य-भव्य व सुरक्षित होंगे।

हिमालय में देवी-देवताओं के साथ रिश्ते-नौटी गांव आज भी भगवती नन्दा को अपनी बहिन मानता है

हिमालय में यहां का जनमानस अलग-अलग क्षेत्रों में देवी-देवताओं के साथ अपने रिश्ते बनाये हुए है, और अनादि काल से उसे मानता ही नहीं बल्कि निभाता भी है।

नौटी गांव के लोग भगवती नन्दा को अपनी बहिन मानते हैं। उत्तराखण्ड में प्रतिवर्ष चैत्र माह (आलू, कलेऊ, भेंटुली) देने की परम्परा है। चैत्र माह की संक्रान्ति को गांव के हर घर में नवरात्रि की हरियाली मालू के पूड़ों (दोंनो) में डाली व पूजी जाती है। 9वें दिन गांव की महिलायें सजाधजा कर एक टोकरी में हरियाली पूजा, नैवेटा, भगवती के वस्त्र भेंट आदि को नन्दादेवी मंदिर में चढ़ाते हैं, इस अवसर पर यहां पर बड़ा मेला भी लगता है।

भाई-बहिन के इस रिस्ते को निभाते हुए प्रति 12 वर्ष बाद भगवती नन्दा को मायके से ससुराल (कैलाश) भेजने की यह महायात्रा श्री नन्दादेवी राजजात को गढ़वाल के राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुंवर नन्दा मन्दिर नौटी से प्रारम्भ करते हैं।

क्रमश:-5

हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात 2026 प्रस्तावित कार्यक्रम (मुख्य यात्रा)

पड़ाव

प्रस्थान

आगमन

किमी. (पैदल)

01

नन्दादेवी मंदिर नौटी से यात्रा का शुभारम्भकांसुवा के राजवंशी कुंवरों द्वारा

ईड़ाबधाणी

10 (पैदल)

02

ईड़ाबधाणी

नौटी

10

03

नौटी

कांसुवा

10

04

10

05

कांसुवा

सेम

10

06

कोटी

सेम

कोटी

भगोती

12

07

भगोती

कुलसारी

12

08

कुलसारी

चोपडियूं

10

09

चोपडियूं

नन्दकेशरी

05

10

नन्दकेशरी

फल्दियागांव

10

11

फल्दियागांव

मुन्दोली

10

15

12

मुन्दोली

वाण

14

वाण

गरोलीपातल

10

13

15

गरोलीपातल

वेदनी

03

16

वेदनी

पातरनचौंणियां

09

17

पातरनचौंणियां

शिलासमुद्र

15

शिलासमुद्र से होमकुण्ड में पूजा कर वापस

चन्दनियाघट

16

18

चन्दनियाघट

सुतोल

18

19

सुतोल

नन्दानगर (घाट)

25 बस द्वारा

20

नन्दानगर (घाट)

नौटी

60 बस द्वारा

कुल 280 किमी.

यात्रा के दुर्गम व उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश के साथ ही यात्रा की सफलता व यात्रियों की सुरक्षा के लिये नन्दादेवी मंदिर नौटी में श्रीमद् देवी भागवत का शुभारम्भ होता है, यात्रा की वापसी नौटी पहुंचने के दूसरे दिन श्रीमद् देवी भागवत का समापन होता है तथा गढ़वाल के राजवंशी कुंवरो को कांसुवा के लिए विदाई दी जाती है।

नोट :

1) यात्रा का विधिवत कार्यक्रम वसंत पंचमी दि. 23 जनवरी 2026 को गढ़वाल के राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुंवर नन्दा देवी मंदिर नौटी में घोषित करेंगे।

2) राजवंशी कुंवर कांसुवा गांव से यात्रा की पूर्व संध्या पर चौसिंग्याखाडू व पवित्र राजछंतोली के साथ नन्दा देवी मंदिर नौटी पहुंचेगें यहां पर स्वर्ण प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कर राजछंतोली प्रतिष्ठित की जायेगी। हिमालयी सचल महाकुम्भ श्री नन्दा देवी राजजात की पवित्र राजछंतोली, नन्दादेवी की स्वर्ण प्रतिमा, चौसिंग्याखाडू को लेकर राजवंशी कुंवर सम्पूर्ण यात्रा का शुभारम्भ व नेतृत्व सदियों से परम्परानुसार गौरवशाली ढंग से करते आये हैं और वर्तमान व भविष्य में भी करते रहेगें।
[21/07, 5:26 pm] Anu ed: -6-

3) नौटी से महादेव घाट (कांसुवा) तक राजगुरू नौटियाल तथा महादेव घाट से होमकुण्ड तक कोटी गांव के ड्यूडी ब्राह्मण पवित्र राज छंतोली को पूजा-अर्चना करते हैं।

4) गढ़वाल नरेश की राजजात पूजा गढ़‌वाल राज्य की राजधानी चांदपुरगढ़ी में सम्पन्न होती है। यहां पर लाखों की संख्या में तीर्थयात्री भाग लेते हैं। बहुत बड़ा मेला लगता है।

5) यात्रा के भगवती पड़ाव से कुलसारी जाते समय केवर गदेरा तक भगवती नन्दा का मायका माना जाता है तथा आगे ससुराल का क्षेत्र होता है, ससुराल क्षेत्र में प्रवेश के समय बड़ा मेला लगता है जिसमें लाखों तीर्थयात्री भाग लेते हैं।

6) कुलसारी में आमावस्य की रात्रि को कालीयंत्र की महापूजा होती है। जिसमें देशभर के काली के भक्त पहुंचते हैं।

7) नन्दकेशरी में बधाण की भगवती नन्दा की डोली, कुमाऊँ क्षेत्र की अल्मोड़ा की भगवती नन्दा की डोली के साथ कुमाऊँ की अधिकांश देव डोलियां कुमाऊँ के राजा के नेतृत्व में नन्दादेवीं राजजात में सम्मिलित होती हैं। यहां पर गढ़वाल व कुमाऊँ का बहुत बड़ा मेला लगता है।

8) मुन्दोली और वाण पड़ाव के मध्य लोहाजंग में बड़ा मेला लगता है, मुन्दोली में शताब्दी पूर्व स्थापित पितृदेव वन मुख्य आकर्षण यात्रियों के होता है।

१) वाण में जनपद चमोली के वि० ख० जोशीमठ, दशोली, नन्दानगर, नारायणबगड़, थराली, देवाल, वि० ख० कर्णप्रयाग, (कपीरी, डिम्मर, तल्ला दशोली) आदि की सैकड़ों देव डोलियां शामिल होती हैं।

10) वाण से आगे लाटू देवता की अगुवाई एवं आशीर्वाद से यात्रा प्रारम्भ होती है। योसिंह देवता, पातचनचर्चीणियां में शामिल होते हैं।

11) वेदनी कुण्ड में रूपकुण्ड के शहीद कन्नौज के राजपरिवार और तीर्थयात्रियों को गढ़वाल के राजवंशी कुंवरों द्वारा तर्पण किये जाते हैं। वाण से होमकुण्ड तक कुनियाल, गौड़ ब्रह्माणों के द्वारा पूजा-अर्चना में सहयोग प्रदान किया जाता है।

केन्द्र सरकार का विशेष पैकेज

संयोग से वर्तमान में डबल इंजन की सरकार है। यात्रा के मुख्य मार्ग व सहायक यात्रा मार्गों में ढांचागत व मूलभूत सुविधाओं के सृजन हेतु केन्द्र सरकार से 05 हजार करोड़ रू. के विशेष पैकेज की आवश्यकता राज्य सरकार को होगी, केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से भी अनेक कार्य होने हैं।

यात्रा के सफल एंव सुरक्षित आयोजन हेतु निवेदन

केन्द्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास, उत्तराखण्ड व जनमानस, यात्रा एवं मन्दिरों से सम्बन्धित समितियों के सहयोग से हिमालयी सचल महाकुम्भ 2026 में ढांचागत एवं मूलभूत सुविधाओं का सृजन युद्धस्तर पर तत्काल प्रारम्भ हो यात्रा के अब मात्र 17 महीने ही शेष रह गये हैं। आगामी वित्त वर्ष 2025-26 में स्थायी प्रवृति के कार्य पूर्ण हों तथा वर्ष 2026-27 के प्रथम तिमाही में अस्थायी प्रवृति के कार्य हों। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में श्री नन्दादेवी राजजात विकास परिषद का अधिकार सम्पन्न संवैधानिक गठन हो। केन्द्र में भी उत्तराखण्ड के मंत्री की अध्यक्षता में समिति बने जो केन्द्र सरकार से सम्बन्धित विभिन्न मंत्रालयों के कार्य की देखरेख करे तथा पी. एम. ओ. में भी केन्द्र/राज्य सरकारों के बेहतर तालमेल के लिये सेल का गठन हो। विगत यात्रा में अनुभवी अधिकारियों की भी सेवाएँ ली, पी. एम. ओ. में तैनात श्री मंगेश घिल्डियाल की सेवाएँ अवश्य ली जायें जिन्होंने विगत यात्रा में विशेष योगदान दिया था। (भुवन नौटियाल)

महामंत्री श्री नन्दादेवी राजजात समिति

नौटी (चमोली) उत्तराखण्ड, मो. 9456307927

आगे पढ़ें

 

Next Post

परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि 50 लाख से बढ़ाकर की गई डेढ़ करोड़ जानिए सभी समाचार

  मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित कर शहीद को दी श्रद्धांजलि। *परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि 50 लाख से बढ़ाकर की गई डेढ़ करोड़। *चमोली जिले के कालेश्वर में ई.सी.एच.एस एवं सैनिक विश्राम गृह और नैनीताल में सैनिक विश्राम गृह बनाया जायेगा-सीएम* […]

You May Like