HTML tutorial

ज्योति कलश यात्रा में देवभूमि उत्तराखण्ड की झांकी ने मोहा मन ।

Pahado Ki Goonj

ज्योति कलश यात्रा में देवभूमि उत्तराखण्ड की झांकी ने मोहा मन ।

हरिद्वार ।  रिपोर्ट मदन पैन्यूली ।

ज्योति कलश यात्रा के दौरान देवभूमि उत्तराखण्ड की अद्भुत एवं अलौकिक झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। हिमालयी संस्कृति, लोकआस्था और आध्यात्मिक गरिमा से सजी इस झांकी ने उत्तराखण्ड की देवतुल्य परम्पराओं, लोकसंस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का सजीव दर्शन कराया। जैसे ही यह झांकी यात्रा में आगे बढ़ी, श्रद्धालु भावविभोर होकर नमन करने लगे और पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। ज्योति कलश यात्रा केवल आस्था की यात्रा ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का जीवंत महाकाव्य बनकर उभरी। यात्रा में सम्मिलित छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोकनृत्य ने अपनी सहजता, ऊर्जा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली का भावपूर्ण प्रदर्शन किया। ढोल-मांदर की गूंज के साथ थिरकते कदमों ने जनजातीय संस्कृति की जीवंतता को साकार कर दिया।
वहीं गुजरात का पारंपरिक ‘तलवार राठवा नी घेर’ नृत्य वीरता, शौर्य और अनुशासन का प्रतीक बनकर उभरा। तलवारों की लयबद्ध गतियों के साथ नर्तकों की सशक्त प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। ओडिशा का डाकूल नृत्य अपनी विशिष्ट वेशभूषा और प्रतीकात्मक भाव-भंगिमाओं के माध्यम से लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की गहराई को उजागर करता रहा।
इसी क्रम में मध्यप्रदेश का भगोरिया एवं भड़म-गौर नृत्य उत्साह, उमंग और लोकजीवन की मस्ती को अभिव्यक्त करता हुआ यात्रा का विशेष आकर्षण बना। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सामूहिक नृत्य-लय ने सम्पूर्ण यात्रा को उल्लास से भर दिया।
ज्योति कलश यात्रा में विविध राज्यों की इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि गायत्री परिवार केवल आध्यात्मिक चेतना का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय समरसता का भी सशक्त माध्यम है। जब ज्योति के साथ लोकसंस्कृति की धड़कनें जुड़ीं, तो यह यात्रा भारत की आत्मा का सजीव उत्सव बन गई।

 

 

Next Post

आत्मोत्थान की पुकार और संतत्व की दिशा: शताब्दी समारोह में गूंजा युगऋषि का संदेश ।

आत्मोत्थान की पुकार और संतत्व की दिशा: शताब्दी समारोह में गूंजा युगऋषि का संदेश । हरिद्वार। रिपोर्ट मदन पैन्यूली । शताब्दी समारोह के सायंकालीन सत्र में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और आत्मोत्थान के सूत्रों से ओतप्रोत विचारों की त्रिवेणी प्रवाहित हुई। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री […]

You May Like