
उत्तरकाशी, मोरी । मदन पैन्यूली।
उत्तराखंड के दूरस्थ मोरी ब्लॉक के दुचानू गांव में स्थित “भीम शिला” आज भी अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही है। पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी यह विशाल शिला क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह पर्यटन के मानचित्र से अभी तक दूर है।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह शिला महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। गांव के निवासी बताते हैं कि “यह भीम शिला हमारे गांव की एक अनोखी पहचान है, लेकिन जानकारी के अभाव में यह आज भी पर्यटकों की नजर से दूर है।”
ग्रामीणों का मानना है कि यदि इस स्थल को पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र धार्मिक और ग्रामीण पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। यहां आने वाले पर्यटक न केवल इस अद्भुत शिला को देख सकेंगे, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली का भी अनुभव कर पाएंगे।
विकास की अपार संभावनाएं।
भीम शिला को पर्यटन मानचित्र में शामिल करने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। होमस्टे, गाइड सेवा, स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे गांव की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
प्रशासन से उम्मीदें
ग्रामीणों ने प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर का सर्वे कर इसे संरक्षित किया जाए और प्रचार-प्रसार के माध्यम से इसकी पहचान बनाई जाए। साथ ही सड़क, संकेतक बोर्ड और बुनियादी सुविधाओं का विकास भी जरूरी है, ताकि पर्यटकों को यहां तक पहुंचने में कोई कठिनाई न हो।
दुचाणु गांव की “भीम शिला” आज भी अपनी पहचान की राह देख रही है। जरूरत है तो बस एक पहल की, जो इस अनमोल धरोहर को दुनिया के सामने ला सके।

