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नेपाल सरकार से भी ज्यादा लोगों की दुर्गति भारत-सरकार ने कर रखी हैं

Pahado Ki Goonj

साइंटिफिक-एनालिसिस

नेपाल सरकार से भी ज्यादा लोगों की दुर्गति भारत-सरकार ने कर रखी हैं

भारत आज के 15 वर्षो पहले ही दुनिया का नम्बर वन देश बन गया होता और चारों तरफ खुशहाली होती यदि भारत-सरकार ने नेपाल-सरकार से बहुत गिरी हुई निम्न दर्जें की सरकारी प्रक्रिया नही चलाई होती | इस सरकारी प्रक्रिया में कई राज्यों के विभाग व सरकारों के साथ केन्द्र सरकार के कही विभाग, मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ राष्ट्रपति-भवन भी शामिल है | इस प्रक्रिया में राष्ट्रपति-भवन व प्रधानमंत्री कार्यालय के हाईप्रोफाइल अधिकारी ही नहीं स्वयं राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री रहे लोग भी शामिल हैं | इनके सारे कागजी दस्तावेज हम समय-समय पर देते आ रहे है |

गरीबी, बेरोजगारी, भूखमरी, सरकारी टैक्सों को हिस्सैदारी वाला आयाम बनाकर आम लोगों से धन की खूली लूट लगभग पुरी तरह खत्म हो गई होती यदि भारत-सरकार ने सरकारी तन्त्र ने पूरे मामले को वर्षों तक एक टेबल से दुसरी टेबल पर धूल साफ करने के लिए फाईल को घुमाने का सिलसिला चालू न रखा होता | आज भी हर एक-दो माह पर सीधे राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री कार्यालय, केन्द्रिय मंत्रालयों, उच्चतम न्यायालय व हर राज्य के हाईकोर्टों व न्यायाधीशों को सीधा रिमाइंडर पत्र जाता हैं परन्तु कुछ होता नहीं हैं | इस पत्र को राष्ट्रपति-भवन किसी न किसी मंत्रालय के सचिव को भेज देता हैं जबकि अन्तिम फैसला लेने के लिए राष्ट्रपति कानूनी रूप से अधिकृत है | इन मंत्रालयों के सचिव उस का जवाब देना तो दूर तिरछी नजर से भी नहीं देखते और कूड़ेदान में फेंक देते हैं | यह हैं भारत लोकतन्त्र के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति की ईज्जत, गरिमा और मर्यादा |

एक आविष्कार जिसे भारत-सरकार ने दुनियाभर के रिकार्ड को जांचकर पेटेन्ट दे दिया | भारत 350 वर्षों से पुराने आधुनिक शल्य चिकित्सा विज्ञान में दुनिया में अग्रणी बन गया | दुनिया के करिबन हर हिस्से से खरीदने के अरबों-खरबों डालर के एडवांस आर्डर आ गये | सयुक्त राष्ट्र-संघ (26-07-2008) , इंटरनेशनल रेड क्रॉस एन्ड क्रीसेंट सोसायटी (24-08-2011) , द ग्लोबल फण्ड (20-06-2011) , पावती मेल (E-mail Dated 13-05-2009 Time: 08:51 PM Official E-mail id: president(at)messages(dot)whitehouse(dot)gov ) बराक-ओबामा , बिल एंड मेलिना गेट्स फाउंडेशन (06-08-2009) , क्लिंटन फाउंडेशन (25-03-2009) , वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की प्रतिक्रिया सम्बंधित ईमेल/लेटर आ गये | यह सभी कागजी दस्तावेजों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को 09 नवम्बर, 2011 को भेज दिये | इसके पश्चात् भी कुछ नहीं हुआ सिर्फ सरकारी प्रक्रिया चालू हैं |

आपको यह जानकर पैरों तले से जमीन खिसक जायेगी की यह आविष्कार भारत-सरकार के अधीन रहने व सारा पैसा देश के खजाने में जाने की बात आविष्कारक ने लिखकर दे दी और कानून सम्मत उतना मांगा जिससे वो सामाजिक जीवन जी सके व नये अविष्कार कर सके | समस्या यह हैं कि हर कुर्सीधारी अपने व अपने परिवार के लिए पैसा चाहता हैं सरकारी खजाने के लिए बिलकुल नहीं. ….

एक आविष्कार से देश में हजारों नई कम्पनीया खुलती व करोड़ों युवाओं को सीधी नौकरी मिलती हैं परन्तु राजनैतिक सत्ता, राजनेता व अधिकांश कुर्सीधारी यही नहीं चाहते हैं | इस एक आविष्कार नहीं उसके इम्पलीमेन्ट करने के तरीके से विकास का एक नया रास्ता खुलता हैं जो आये दिन होने वाले हर आविष्कार से सैकडों कम्पनीया खूलने व लाखों नये रोजगार का मार्ग बन जाता हैं परन्तु सत्ता में बैठे लोगों को यह कतही मंजूर नहीं है। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की नये पेटेन्ट से बने उत्पाद विदेश से खरीदने के लिए सरकार के पास पैसों की कमी नहीं हैं परन्तु पेटेंट के लिए व उससे सम्बद्धित उत्पाद बनाने के लिए सरकार व बैंकों के पास एक पैसा भी नहीं हैं। लडाकू विमान व लडाई के अधिकांश हथियार इसी दायरे में आते हैं |

आपका सिर यह जानकर चकरा जायेगा कि यह अविष्कार नये खतरनाक वायरसों के उत्पन होने से रोकने से जुडा हैं जिसमें कोरोना वायरस भी हैं | कोरोना वायरस पैदा नहीं हुआ उससे पहले बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, इबोला, जीका वायरस आया तब से हर बार सरकार को सचेत करा था | कोरोना वायरस पैदा नहीं हुआ उससे पहले यह फाईल हर प्रमुख के पास थी परन्तु किसी ने कुछ नहीं करा उल्टा फाईल रोकने वाले एक राष्ट्रपति को बाद में कोरोना निगल गया | कोरोना से खतरनाक वायरस अब आयेगा उसकी डिटेल सभी प्रमुख कुर्सीधारीयों के ध्यान में हैं परन्तु कोई कुछ नहीं करता, सबको बस अपनी जेब भरने से मतलब हैं चाहे जेब भरने के बाद वो व उसका परिवार खत्म हो जाये |

यह सिलसिला अब पुरी मानव प्रजाति को निगल जाने की तरफ बडी तेजी से बढ रहा हैं | नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका इत्यादि-इत्यादि देशों में जन विद्रोह के बाद भी कुछ बदलने वाला नहीं हैं क्योंकि देर-सवेर वापस सभी पुरानी लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर आ जायेंगे क्योंकि आगे बढने के लिए अपडेट लोकतान्त्रिक व्यवस्था से पुरी दुनिया अज्ञान हैं | इसी फाईल के कवर पेज पर दुनिया में पहली बार किसी लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बना अपडेटेड ग्राफिक्स रूप था जो सीधे भारत के राष्ट्रपति को सम्बोद्धित करते हुए था व उस पर राष्ट्रपति-सचिवालय की आधिकारिक मोहर व जवाबदेही अधिकारी के साईन वाला दस्तावेज हमारे पास मौजूद हैं | जब ईंसानी सभ्यता ही खत्म होने लगेगी तो यह कागजी दस्तावेज व कागजी नोट या डालर किस ईंसान के काम आयेंगें | मैं न तो भूख हडताल करूगा, न ही कोई आन्दोलन और न किसी के द्वार पर माथा रगडने जाऊगा आख़िरकार दुनिया में सिर्फ मुझे अकेले को ही तो नहीं जीना हैं |

शैलेन्द्र कुमार बिराणी
युवा वैज्ञानिक

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