उत्तराखंड के 44 हजार गैस उपभोक्ताओं को सरेंडर करना होगा सिलेंडर

एलपीजी व पीएनजी कनेक्शन वालों को करने होगा सरेंडर
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गैस सप्लाई को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया
देहरादून। खाड़ी देशों में चल रहे संकट के बीच भारत सरकार ने देश में एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन को लेकर हाल ही में संशोधित आदेश जारी किया है। जिसके तहत अब उपभोक्ता एक साथ एलपीजी और पीएनजी कनेक्शन नहीं रख सकते हैं। यानी पीएनजी धारकों को एलपीजी कनेक्शन को बंद करना होगा और सिलेंडर को सरेंडर करना होगा। भारत सरकार की ओर से जारी इस आदेश के दायरे में उत्तराखंड में मौजूद 44,488 उपभोक्ता आएंगे, जिनके पास पीएनजी कनेक्शन मौजूद हैं। आखिर क्या है प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन की स्थिति, खाद्य पूर्ति विभाग कैसे नियमों को कराएगा फॉलो? आपको इससे रूबरू करवाते हैं।
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की वजह से भारत समेत दुनिया के 25 देशों में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत देश में ईंधन की सीमित सप्लाई हो रही है। बावजूद इसके भारत सरकार ने एहतियातन कदम उठाया है। ताकि, भविष्य में एलपीजी की संकट नहीं रहे।
शुरुआती दौर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गैस सप्लाई को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद बीते शनिवार यानी 14 मार्च को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन में संशोधित कर दिया है। जिसके तहत कोई भी उपभोक्ता एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) और पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन एक साथ नहीं रख सकता है।
लिहाजा, जिन उपभोक्ताओं के घर में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी डोमेस्टिक पीएनजी कनेक्शन हैं, अब उन्हें एलपीजी सिलेंडर रखने, नया कनेक्शन लेने और सिलेंडर को रिफिल कराने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन में संशोधित करने के साथ ही तेल कंपनियों को भी आदेश जारी कर दिया है।
आदेश में साफ कहा गया है कि ऐसे उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन नहीं देंगे और ना ही वितरक एलपीजी रिफिल करेंगे, जिन लोगों के पास दोनों रूपों में कनेक्शन हैं। इसके साथ ही घरेलू पीएनजी कनेक्शन धारकों से एलपीजी कनेक्शन को तत्काल वापस लेना होगा। भारत सरकार के इस आदेश के दायरे में उत्तराखंड के चार जिलों में मौजूद 44,488 उपभोक्ता आएंगे।
उत्तराखंड में 44,488 डोमेस्टिक पीएनजी धारक
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में 44,488 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं। जिसमें से देहरादून जिले में 2,200 डोमेस्टिक पीएनजी धारक, हरिद्वार जिले में 25,600 डोमेस्टिक पीएनजी धारक, उधम सिंह नगर जिले में 16,088 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं। इसके अलावा नैनीताल जिले में 600 डोमेस्टिक पीएनजी धारक हैं। इन सभी डोमेस्टिक पीएनजी धारकों को अलग-अलग कंपनियों के जरिए गैस उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान समय में प्रदेश के चार जिलों के कुछ हिस्सों में पाइपलाइन के जरिए गैस उपलब्ध कराई जा रही है। उत्तराखंडमें 13 जिले हैं। इन सभी जिलों में पाइपलाइन के जरिए गैस उपलब्ध कराए जाने के लिए 5 कंपनियां काम कर रही हैं।
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इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए उत्तराखंड के घराट
कभी पिसाई का एकमात्र साधन थे घराट,


सुनसान गदेरों के साथ हो गए लगभग समाप्त
देहरादून। पहाड़ की जीवनशैली और लोकसंस्कृति का अहम हिस्सा रहे घराट अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं। कभी गांवों में अनाज पिसाने का एकमात्र साधन माने जाने वाले घराट आज सुनसान गदेरों और वीरान पगडंडियों के बीच अपनी अंतिम सांसें लेते दिखाई दे रहे हैं।
पहाड़ी इलाकों में बहते छोटे-छोटे गदेरे (जलधाराएं) घराटों की जीवनरेखा हुआ करते थे। इन गदेरों के किनारे लकड़ी और पत्थरों से बने घराटों में पानी की धार से चक्की चलती थी, जिसमें गांव के लोग गेहूं, मडुवा, झंगोरा और मक्का जैसे अनाज पिसवाते थे। उस दौर में घराट केवल पिसाई का साधन ही नहीं थे, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप के भी केंद्र हुआ करते थे। लोग अनाज की बोरियां लेकर आते, अपनी बारी का इंतजार करते और इसी दौरान गांव की खबरें, लोककथाएं और आपसी संवाद भी चलता रहता था।
समय के साथ तकनीक और आधुनिकता ने पहाड़ की इस पारंपरिक व्यवस्था को पीछे छोड़ दिया। गांवों में बिजली से चलने वाली आटा चक्कियां और शहरों से पैक आटा आने लगा, जिससे घराटों की उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती चली गई। इसके साथ ही पलायन की मार ने भी गांवों की रौनक कम कर दी। जहां कभी गदेरों के किनारे घराटों की खटर-पटर गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि कुछ दशक पहले तक हर गांव या उसके आसपास एक-दो घराट जरूर होते थे। घराट चलाने वाले परिवारों की आजीविका भी इसी से चलती थी। लेकिन अब अधिकांश घराट या तो जर्जर हो चुके हैं या पूरी तरह बंद हो गए हैं।
पर्यावरण और लोकसंस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि घराट केवल पिसाई की पारंपरिक तकनीक ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण और प्रकृति के अनुकूल जीवन शैली का भी उदाहरण थे। यदि इन्हें संरक्षित किया जाए तो ये ग्रामीण पर्यटन और पारंपरिक तकनीक के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि सरकार और समाज मिलकर इस विलुप्त होती धरोहर को बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी पहाड़ की इस अनूठी परंपरा को समझ सकें और उससे जुड़ाव महसूस कर सकें।
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निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा करें विभागः सीएस

भूमि एवं समन्वय से जुड़े मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर मिलकर करते हुए कार्यों को समय पर प्रारंभ कराएं
मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को प्राथमिकता में रखते हुए समय से पूर्ण करें
एलपीजी गैस की होम डिलीवरी कराएं आवश्यक मांग के अनुरूप व्यवसायिक सिलेंडरों की भी आपूर्ति समय पर हो
सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए उनका समय से निस्तारण किया जाय-मुख्य सचिव
नैनीताल। डॉ आर. एस. टोलिया प्रशासनिक अकादमी नैनीताल में मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार देर सायं नैनीताल जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं सहित अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुये मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रक्रियागत बाधा आ रही है, तो उसका त्वरित समाधान किया जाए यदि समस्या शासन स्तर की है तो तत्काल शासन के संज्ञान में लाया जाए।’ विकास कार्य रुकने नहीं चाहिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग मासिक लक्ष्य निर्धारित कर उसके अनुरूप नियमित कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुये कहा कि लंबित टेंडर, स्वीकृतियों और तकनीकी अनुमोदनों को शीघ्र पूरा किया जाए तथा जिलास्तर पर जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी परियोजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करें।’
उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति बढ़ने से राज्य के विकास कार्यों को गति मिलेगी व जनसुविधाओं में भी सुधार होगा।’ मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सुव्यवस्थित दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग की जाए, वर्क प्लान के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्य किए जाएं, पब्लिक ग्रीवांस व मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।’ मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए जनपद को एक आदर्श, योजनाबद्ध एवं तेज गति से विकसित होने वाले जनपद के रूप में स्थापित करें।
बैठक में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्वागत करते हुए मुख्य सचिव को जिले में संचालित महत्वपूर्ण परियोनाओं एवं विकास कार्यों की जानकारी से अवगत कराया। नैनीताल जिले में 20 करोड़ रुपये से अधिक लागत की परियोजनाओं के अंतर्गत कराए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान लगभग 41 करोड़ की लागत से मानस खण्ड मन्दिर माला मिशन के अन्तर्गत कैंची धाम सौन्दर्यीकरण एवं प्रकाशीकरण का कार्य जो जून 2026 तक पूर्ण होना है इन कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्वता का विशेष ध्यान देकर कार्य पूर्ण करने के निर्देश कार्यदाई संस्था लोकनिर्माण विभाग को दिए।
बैठक में मुख्य सचिव ने एस आई आर तथा जनगणना कार्य की तैयारी के बारे में भी जानकारी ली।
बैठक में आयुक्त कुमाऊं व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, जिला अधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, पुलिस अधीक्षक डॉ जगदीश चंद्रा, मनोज कत्याल, अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोहर सिंह धर्मशक्तू, पेयजल निर्माण निगम के अधीक्षण अभियंता अनूप पाण्डे सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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गर्मी से सीजन से पहले पेयजल संबंधित कार्य पूरा करने के दिए निर्देश
नैनीताल। पेयजल कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन के तहत कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए समयान्तर्गत कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा गर्मी का सीजन आ रहा है पेयजल से संबंधित कार्यों को समय पर पूर्ण किया जाय।
लगभग 24 करोड़ की लागत से इन्द्रानगर नाले के कैचमेंट सीवरेज एवं प्रदूषण रोकथाम कार्ययोजना, विधानसभा ओखलकांडा में कालाआगर पम्पिंग पेयजल योजना जो लगभग 23 करोड़ की लागत से बनने वाली योजना है, उक्त योजना को समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि पम्पिंग योजना से सुचारू तौर पर लोगों को पेयजल उपलब्ध हो। इस संबंध में कुमाऊं आयुक्त ने इन कार्यों में हो रही देरी एवं अन्य समस्याओं से मुख्य सचिव को अवगत कराया।
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जमरानी बांध परियोजना की वर्तमान प्रगति की विस्तार से जानकारी ली
नैनीताल। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग की समीक्षा के दौरान 3678.23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित जमरानी बांध परियोजना की वर्तमान प्रगति की विस्तार से जानकारी ली, तथा निर्धारित समय जून 2029 तक परियोजना को पूर्ण करने के निर्देश दिए। टनल निर्माण की प्रगति की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोना के अधिकारियों का विजिट शीघ्र ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन टनल एवं अन्य निर्माण कार्य स्थलों का कराएं ताकि वहॉं के कार्यों से अनुभव लेकर यहॉं के कार्यों में प्रगति आए’ 298 करोड़ रुपये की लागत से बलियानाला भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के उपचारात्मक कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए इस प्रमुख परियोजना को निर्धारित समय 2028 तक पूरा करने के निर्देश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दिए।
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मेडिकल कालेज में स्टेट कैसर संस्थान के निर्माण कार्यों की प्रगति जांची
नैनीताल। ब्रिडकुल कार्यदायी संस्था द्वारा जनपद में कुमाऊ विश्वविद्यालय में 45 करोड़ रुपये की लागत से बीएड विधि संकाय भवन निर्माण, 44 करोड़ रुपये की लागत से 100 शैया मानसिक चिकित्सालय गेठिया, तथा 39 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कालेज में स्टेट कैसर संस्थान के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान धीमी प्रगति पर अधिकारियो से कहा कि निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए गुणवत्ता एवं समयबद्धता से कार्य किया जाय।
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नैनीताल में ट्रैफिक प्लान सटल सेवा की बारे में ली जानकारी
नैनीताल। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी द्वारा जनपद में यात्रा सीजन के लिए तैयार ट्रैफिक प्लान सटल सेवा आदि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जिले में नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान के अंतर्गत की जा रही कार्रवाई से भी मुख्य सचिव को अवगत कराया। उन्होंने यात्रा सीजन हेतु जनपद को 160 अतिरिक्त होमगार्ड उपलब्ध कराने की मांग मुख्य सचिव के समक्ष रखी। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि भवाली बायपास मार्ग सहित आवश्यक स्थानों में जहां-जहां स्ट्रीट लाइट की आवश्यकता है ऐसे स्थानों में जिलाधिकारी,जिला विकास प्राधिकरण या अन्य मद से यात्रा सीजन से पूर्व स्ट्रीट लाईट लगाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आने वाले पर्यटन सीजन के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यस्था सुनिश्चित की जाय। पर्यटकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
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सीएम धामी आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर से मिले

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को ऋषिकेश में श्री श्री रविशंकर से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान दोनों के बीच सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पद्म विभूषण से सम्मानित श्री श्री रविशंकर ने स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था विश्वभर में शांति, योग और मानवीय मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उनके मार्गदर्शन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है, जो उत्तराखंड जैसे आध्यात्मिक प्रदेश के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।
श्री श्री रविशंकर ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए राज्य की उन्नति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं और इसे और सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री ने संत-महात्माओं के मार्गदर्शन को राज्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण बताया।
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दुर्गम क्षेत्रों में फाइबर केबल एवं वाईफाई के माध्यम से कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएः सीएस
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित हुई राज्य ब्रॉडबैंड समिति की बैठक
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में राज्य ब्रॉडबैण्ड समिति की 9वीं बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी से सम्बन्धित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गयी एवं मुख्य सचिव द्वारा दिशा निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने ऐसे क्षेत्रों जहां रोड एक्सेस नहीं है, 4जी उपकरण आदि पहुंचाने के लिए रोड कनेक्टिविटी के बजाय फाईबर केबिल बिछाकर एवं वाईफाई आदि के माध्यम से शीघ्र से शीघ्र कनेक्टिविटी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर उपयोग किए जाने जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने सभी पंचायत भवनों को भारतनेट कनेक्टिविटी सुविधा शीघ्र से शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि राज्य सरकार का आरओडब्ल्यू पोर्टल को आईटीडीए हैंडल करेगा। साथ ही उन्होंने अन्य पेयजल, बिजली, गैस एवं संचार से सम्बन्धित ऐसे विभागों, जो सड़कों आदि खुदाई कर अंडरग्राउण्ड लाइनें बिछाने का कार्य करते हैं, को आरओडब्ल्यू पोर्टल पर अपने सिस्टम को शीघ्र इंटीग्रेट किए जाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने स्ट्रीट फर्नीचर मैपिंग कार्य में तेजी जाए जाने के लिए सभी संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी सैचुरेशन के कार्य में किसी भी प्रकार की कोई समस्या आती है तो सीधे सम्बन्धित सचिव से बात कर समस्याओं का निराकरण किया जाए। उन्होंने जनपद स्तरीय समितियों की बैठकें निर्धारित समय में अनिवार्य रूप से आयोजित कराए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि समस्त गतिविविधों की प्रगति रिपोर्ट मासिक रूप से सचिव आईटी को नियमित रूप से प्रेषित की जाए।
इस अवसर पर सचिव नितेश कुमार झा, सी. रविशंकर, केन्द्रीय दूर संचार विभाग के अधिकारी, बीएसएनएल सहित अन्य प्राईवेट मोबाईल नेटवर्क सेवा प्रदाता एवं टावर्स एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोवाईडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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पंचायत भवनों के निर्माण व मरम्मत कार्यों में लायी जाये तेजी
मुख्य सचिव ने समस्त पंचायत भवनों में भारतनेट की कनेक्टिविटी दिए जाने से सम्बन्धित बिन्दु पर जहां पंचायत भवन निर्माणाधीन हैं, ऐसे स्थानों में विकल्प के तौर पर पास के सरकारी भवनों जैसे प्राथमिक विद्यालय अथवा आंगनवाड़ी केन्द्रों में अस्थायी रूप से कनेक्टिविटी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने पंचायत भवनों के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में भी तेजी जाए जाने के निर्देश दिए।
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टेलीकॉम कंपनियों को कॉल ड्रॉप के ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर नेटवर्क से सुधारे जाने के दिये निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी टेलीकॉम कम्पनियों को शहरी क्षेत्रों में भी कॉल ड्राप की समस्या को सुधारे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में ऐसे ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारे जाएं जहां लगातार कॉल ड्रॉप होती है। उन्होंने कहा कि यात्रा सीजन के दौरान प्रदेश के सभी यात्रा मार्गों में स्थायी टावर लगाए जाने तक अस्थायी मोबाईल टावर लगाकर कनेक्टिविटी सुविधा सुनिश्चित की जाए।
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राज्य आंदोलनकारियों ने किया सचिवालय कूच
लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बोला हल्ला

देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों के लंबित चिन्हीकरण के मामले में कोई परिणाम नहीं निकले जाने से आक्रोशित राज्य आंदोलनकारी मंच ने बुधवार को सचिवालय कूच करके प्रदर्शन किया। मंच से जुड़े आंदोलनकारी गांधी पार्क में इकट्ठा हुए। उसके बाद पैदल मार्च निकालते हुए सचिवालय की और बढ़े। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा शासन की हीलाहवाली के चलते पांच महीने बीतने के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। इस मामले में उम्र सीमा भी नहीं बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत क्षेतिज आरक्षण में उत्तीर्ण बेरोजगारों को नियुक्तियां नहीं दी जा रही हैं।
राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती का कहना है कि राज्य आंदोलनकारी मंच राज्य गठन के बाद से राज्य के आंदोलनकारियों के हितों को लेकर पूरी तरह से लामबंद रहा है, लेकिन सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। उनका कहना है कि 2011 के बाद से जिस चिन्हीकरण की प्रक्रिया को ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए था ,वह नहीं हुआ। आज स्थिति यह बन गई है कि 13 जिलों में चिन्हीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। प्रत्येक जिला प्रशासन अपनी तरफ से मानक तय कर रहा है। उसमें भी कोई लचीलापन नहीं दिखाया जा रहा है।
राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण में पक्षपात किये जाने का भी आरोप लगाया है। मंच का कहना है कि पिछले 5 वर्षों से अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से समय मांगा जा रहा है। उनकी व्यस्तता द केरला स्टोरी 2 देखने में है, लेकिन उनके पास राज आंदोलनकारी से मिलने के लिए समय नहीं है।
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घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग पड़ेगा भारी, होगी कानूनी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने दिए डोर-टू-डोर गैस वितरण के निर्देश, गोदामों से सप्लाई पर रोक
रुद्रप्रयाग। जनपद में घरेलू गैस सिलेंडर के दुरुपयोग और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले एलपीजी सिलेंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल कानूनन अपराध है। यदि कोई होटल, ढाबा संचालक या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान घरेलू सिलेंडर का उपयोग करते हुए पाया गया, तो उसके विरुद्ध तत्काल विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
वर्तमान में वैश्विक कारणों से गैस आपूर्ति व्यवस्था पर कुछ असर पड़ा है। डीएम ने बताया कि गोदामों में स्टॉक की कोई कमी नहीं है, लेकिन भारी संख्या में फोन कॉल आने के कारण बुकिंग, डीएससी और ओटीपी जनरेशन की प्रक्रिया बाधित हो रही है। इस वजह से गैस एजेंसियों पर भीड़ उमड़ रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और सुचारू वितरण में दिक्कत आ रही है।
उक्त के दृष्टिगत जिलाधिकारी के निर्देशन में उपभोक्ताओं को शीघ्र व सुचारू रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गैस एजेंसियों से घरेलू गैस सिलेंडर वितरण को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। साथ ही सभी गैस एजेंसियां बुकिंग से संबंधित नगरीय क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को डोर-टू-डोर एवं ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पूर्व में स्वीकृत वितरण केंद्रों से ही गैस वितरण करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जनपद के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति घरेलू गैस सिलेंडर का दुरुपयोग करता है अथवा उसे अवैध रूप से भंडारण करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। जिलाधिकारी ने जनपद के अंतर्गत संचालित समस्त गैस उपभोक्ताओं सहित होटल, ढाबा संचालकों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों कोघरेलू गैस सिलेंडर का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न करने के निर्देश दिए, साथ ही बताया कि जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर गैस एजेंसियों, गोदामों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तत्काल विधिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। जिलाधिकारी ने उपभोक्ताओं से गैस एजेंसियों पर भीड़ न लगाने की अपील की, साथ ही चेतावनी दी कि घरेलू गैस का अवैध भंडारण करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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स्थानीय व्यापारियों को बड़ी राहत, पूर्व की भांति संचालित होंगी कच्ची दुकानें और टेंट
केदारनाथ विधायक और डीएम की बैठक में लिया गया निर्णय, स्थानीय रोजगार और हितों को दी जाएगी प्राथमिकता: आशा
रुद्रप्रयाग। आगामी विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा को लेकर यात्रा मार्ग पर व्यवसाय करने वाले स्थानीय व्यापारियों और टेंट संचालकों को मिली बडी राहत। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाली कच्ची दुकानें और टेंट व्यवस्थाएं पूर्व वर्षों की भांति यथावत रहेंगी। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने व्यापारियों की समस्याओं को सुनने के बाद यह आश्वासन दिया।
बैठक में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि सरकार स्थानीय लोगों के स्वरोजगार और आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी विस्तार से चर्चा की गई थी, जिन्होंने स्थानीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए सकारात्मक रुख अपनाया है। विधायक ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय व्यापारियों के सहयोग के बिना यात्रा का सफल संचालन संभव नहीं है।
प्रशासन का भरोसाः सुगम यात्रा के साथ हितों की रक्षा
रुद्रप्रयाग। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने टेंट स्वामियों और दुकान संचालकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियों के हितों का संरक्षण करना भी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी केदारनाथ यात्रा को दिव्य और भव्य बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। बैठक में मौजूद दर्जाधारी राज्य मंत्री चंडी प्रसाद भट्ट और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट ने भी सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण को रेखांकित किया।
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स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं छोटे व्यापारी
रुद्रप्रयाग। भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट ने कहा कि यात्रा मार्ग पर वर्षों से व्यापार कर रहे लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार भी है। बैठक में व्यापारियों ने अपनी मांगें मजबूती से रखी थीं, जिस पर प्रशासन ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए पुरानी व्यवस्था को ही लागू रखने का निर्णय लिया है। इससे स्थानीय युवाओं और व्यापारियों में खुशी की लहर है।
दो दिनों से जारी आमरण-अनशन समाप्त
रुद्रप्रयाग। जिला प्रशासन की ओर से कच्ची दुकानों के आवंटन की निविदा निरस्त किए जाने के बाद ऊखीमठ तहसील परिसर में पिछले दो दिनों से चल रहा आमरण-अनशन समाप्त हो गया है। क्षेत्र पंचायत प्रमुख पंकज शुक्ला, केदार सभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, त्रिभुवन चौहान और तहसीलदार रमेश सिंह रावत ने अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। व्यापारियों की एकजुटता और प्रशासन के सकारात्मक रुख ने इस गतिरोध को खत्म कर दिया।
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सरकार और प्रशासन का जताया आभार
रुद्रप्रयाग। निविदा प्रक्रिया निरस्त होने और पुरानी व्यवस्था बहाल रहने पर व्यापारियों में खुशी की लहर है। केदार घाटी श्रद्धालु सेवा समिति के अध्यक्ष संदीप पुष्वाण, बीरेंद्र कोटवाल, जसवंत सिंह बिष्ट और यशपाल सिंह सहित समस्त व्यापारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा, विधायक आशा नौटियाल, राज्य मंत्री चण्डी प्रसाद भट्ट, गढ़वाल आयुक्त और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। व्यापारियों ने कहा कि इस निर्णय से हजारों परिवारों की आजीविका सुरक्षित हुई है।
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सिद्धपीठ कालीमठ में नवरात्र की तैयारियां पूर्ण
आज से शक्ति उपासना का महापर्व
5 किं्वटल फूलों से सजा मां काली का दरबार
मंदिर समिति ने किए चाक-चौबंद इंतजाम

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार सिद्धपीठ कालीमठ तीर्थ में बासंती (चैत्र) नवरात्र को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज से विधि-विधान और पौराणिक परंपराओं के साथ नौ दिवसीय नवरात्र अनुष्ठान का शुभारंभ होगा। आस्था, शक्ति और साधना के इस केंद्र में मां काली, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
नवरात्र पर्व को भव्य बनाने के लिए मुख्य मंदिर और परिसर को विभिन्न प्रजातियों के पांच किं्वटल फूलों से सजाया गया है। कालीमठ मंदिर प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कि गाजियाबाद निवासी श्रीजल मिश्रा और विपिन चंद्र भट्ट के विशेष सहयोग से मंदिर का श्रृंगार किया गया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति द्वारा पेयजल, प्रकाश और स्वच्छता के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू होने से पूरी कालीमठ घाटी में रौनक लौटने लगी है।
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रक्तबीज वध की साक्षी है यह पावन भूमि
रुद्रप्रयाग। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कालीमठ वही स्थान है जहां मां काली ने असुर रक्तबीज का संहार किया था। यहां देवी की प्रतिमा के स्थान पर एक पवित्र कुंड की पूजा की जाती है, जो इसे अन्य शक्तिपीठों से विशिष्ट बनाता है। केदारनाथ यात्रा मार्ग के समीप स्थित होने के कारण यात्री यहाँ दर्शन कर अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं।
9 दिनों तक गूंजेंगे मंत्र
रुद्रप्रयाग। पंडित दिनेश चंद्र गौड़ के अनुसार, नवरात्र के दौरान मंदिर में दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन-यज्ञ और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होगा। बद्री-केदार मंदिर समिति सहित स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों में इस उत्सव को लेकर भारी उत्साह है। प्रतिदिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।
सुरक्षा और सुविधा पर जोर
रुद्रप्रयाग। मंदिर समिति ने स्पष्ट किया कि बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं। स्थानीय प्रशासन और समिति के आपसी समन्वय से भीड़ नियंत्रण और पार्किंग की व्यवस्था को भी अंतिम रूप दिया गया है, ताकि भक्तों को सुगम दर्शन प्राप्त हो सकें।
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चुनावी दुराग्रह के तबादले
चुनाव होने हैं, शीर्ष अधिकारियों की अग्नि-परीक्षा नहीं होनी है। अधिकारी भाजपाई या तृणमूल के बंधक नहीं होते। वे कानून और संविधान के प्रति जवाबदेह होते हैं। कोई अपवाद हो सकता है कि ‘काली भेड़’ साबित हो। उसे दंडित किया जा सकता है। उसका तबादला किसी ‘काले पानी’ की तरफ किया जा सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में जिस तरह वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस के तबादले किए गए हैं, वे न तो न्यायसंगत हैं और न ही निरपेक्ष हैं। चुनाव आयोग ने अपराह्न 4 बजे चुनावों की तारीखें घोषित की हैं और गहरी रात, अर्थात् आधी रात, में बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, कानून-व्यवस्था के प्रमुख, कोलकाता के पुलिस आयुक्त आदि के एक साथ तबादले कर दिए गए। हम मानते हैं कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को व्यापक शक्तियां देता है, लेकिन ये तबादले राजनीतिक मंशा और दुराग्रह से किए गए हैं। यह भी सर्वाेच्च अदालत का फैसला है कि ऐसे शीर्ष अधिकारियों के तबादले दो साल से पहले नहीं किए जा सकते। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में वरिष्ठतम होते हैं और संघ लोक सेवा आयोग इनकी अनुशंसा करता है। कोई राजनीतिक बॉस इनका नियोक्ता नहीं है। सवाल यह भी है कि चुनाव आयोग को कैसे पता कि ये अधिकारी निष्पक्ष चुनाव और हिंसामुक्त माहौल में चुनाव नहीं करा सकते अथवा ये सभी अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वफादार हैं? आयोग ने एक ही झटके में बंगाल की शीर्ष नौकरशाही को हिला कर रख दिया। क्या रोजमर्रा का प्रशासन चुनाव आयोग चलाएगा? यदि बंगाल में प्रशासनिक बदलाव किया गया है, तो तमिलनाडु और केरलम में ऐसा क्यों नहीं किया गया? असम में दिखावे को पांच जिलों के एसएसपी बदले गए हैं। संदेह होता है कि चुनाव आयोग किसी की ‘कठपुतली’ बनकर काम कर रहा है। भारत के लिए यह विडंबना और दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि हमारा चुनाव आयोग वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण रहा है और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हमारे चुनावों के दौरान ‘पर्यवेक्षक’ की भूमिका में होते हैं।
बेशक बंगाल में राजनीतिक हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। पहले वामपंथी गांव-गांव, कस्बा-दर-शहर हत्याएं कराते थे। अब 2011 से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक काडर हत्याएं कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक मंच से इन राजनीतिक हिंसाओं का उल्लेख कर चुके हैं। लोकसभा चुनाव में 7 ऐसी हत्याएं की गईं और 740 लोग घायल हुए। उनमें से जिंदा बचने वालों का कोई अधिकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। घर तक जला दिए गए। हत्या के बाद शवों को पेड़ से लटकाया जाता रहा। केरलम में तो हिंसा का ऐसा बर्बर रूप है कि विरोधी पक्ष के सक्रिय कार्यकर्ताओं और नेताओं की टांगें तक तोड़ कर उन्हें अपाहिज बना दिया जाता है। कोई भी नौकरशाह इस राजनीतिक हिंसा को रोक नहीं सकता। चुनाव आयोग मुगालते में होगा! तमिलनाडु में भी द्रविड़ बनाम हिंदू और गैर-द्रविड़ के दरमियान उग्रता, क्रूरता के कई उदाहरण सामने आते रहे हैं। उन राज्यों के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सरीखे शीर्षतम नौकरशाहों को क्यों नहीं बदला गया? सिर्फ इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव, 2024 से पहले गुजरात, उप्र, बिहार, हिमाचल, झारखंड, उत्तराखंड आदि राज्यों में सिर्फ गृह सचिव बदले गए थे। हिमाचल और झारखंड को छोड़ कर शेष राज्यों में भाजपा-एनडीए सरकार थी और आज भी है। जब महाराष्ट्र, हरियाणा, उप्र, मप्र आदि में विधानसभा चुनाव थे और विपक्षी कांग्रेस ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को बदलने की मांग की थी, तो चुनाव आयोग ने खारिज क्यों कर दिया था? इन राज्यों में भी भाजपा-एनडीए सरकारें थीं और आज भी हैं। साफ लग रहा है कि चुनाव आयोग का व्यवहार पक्षपातपूर्ण रहा है। दरअसल संवैधानिक संस्था के मायने ये नहीं हैं कि आयोग निरंकुशता और स्वच्छंदता से काम करे, फैसले ले।
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