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Good news मुख्यमंत्री  ने पर्यावरणविद श्री सुन्दरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए पढ़ें सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने पर्यावरणविद, चिपको आंदोलन के प्रणेता तथा पद्म विभूषण से सम्मानित श्री सुन्दरलाल बहुगुणा की जयंती पर उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में सुन्दरलाल बहुगुणा जी द्वारा दिया गया अमूल्य योगदान हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।
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LIVE: देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा आयोजित Coldwave-2025 : Preparedness की एक दिवसीय कार्यशाला*


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LIVE: देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह*


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23 दिन में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम में दो लाख से अधिक नागरिकों की सहभागिता*

*16 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर निस्तारण*

*1,11,326 नागरिकों ने उठाया विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ*

*सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की सशक्त मिसाल बन रहा जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम राज्य में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की सशक्त मिसाल बनकर उभरा है। 23 दिन पूर्व 17 दिसंबर से शुरू हुए इस कार्यक्रम के तहत अब तक उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में कुल 300 से अधिक शिविर आयोजित किए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य शासन को सीधे जनता के द्वार तक पहुँचाकर आमजन की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।

इन शिविरों के माध्यम से प्रशासन और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है, जिससे वर्षों से लंबित मामलों के समाधान के साथ-साथ जनता का शासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। अब तक आयोजित शिविरों में 1,97,522 नागरिकों ने सहभागिता कर अपनी समस्याएं, सुझाव और आवश्यकताएं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखीं।

कार्यक्रम के दौरान आमजन से 22,645 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 16,000 से अधिक शिकायतों का निस्तारण मौके पर अथवा निर्धारित समयसीमा के भीतर कर दिया गया है, जबकि शेष शिकायतों पर भी नियमानुसार कार्रवाई प्रगति पर है। यह आंकड़े राज्य सरकार की तत्परता, जवाबदेही और कार्यसंस्कृति में आए सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाते हैं।

इसके अतिरिक्त, शिविरों में विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए 31,070 आवेदन प्राप्त किए गए, जिससे नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर से राहत मिली है। वहीं, प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,11,326 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया गया, जिससे सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और आजीविका से जुड़े प्रयासों को नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के निर्देशानुसार यह कार्यक्रम केवल शिकायत निवारण तक सीमित न रहकर, पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित करने और सुशासन को जमीनी स्तर पर सशक्त करने का एक प्रभावी मंच बन रहा है।

राज्य सरकार का संकल्प है कि इस अभियान को निरंतर और व्यापक रूप से आगे बढ़ाया जाए, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं और सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो सके तथा उत्तराखंड में पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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मुख्यमंत्री ने किया ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर कार्यशाला का शुभारंभ**
**आपदा प्रबंधन सामूहिक जिम्मेदारी, सभी विभाग समन्वित रूप से करें कार्य -मुख्यमंत्री**

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़कला में ‘शीतलहर पूर्व तैयारी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शीतलहर, बाढ़, मॉक अभ्यास, हवाई यातायात सहायता की एस.ओ.पी., आपदा प्रबंधन विभाग के नववर्ष कैलेंडर 2026 एवं आपदा प्रबंधन हस्तपुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा आपदा मित्रों एवं वर्ष 2025 में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव में सराहनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया। आपदा प्रबंधन के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए चार वाहनों का भी मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा प्रबंधन किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि समस्त प्रशासन, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संगठनों और आम जनता की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को एक प्रमुख एजेंडा बनाया गया है। उत्तराखंड सरकार भी उन्हीं के मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग एवं अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेंसर लगाने, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम एवं आधुनिक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों के गठन जैसे कदमों से आपदा जोखिम को घटाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में हिमस्खलन (एवलांच) एक गंभीर प्राकृतिक जोखिम है। राज्य के कई क्षेत्र हिमस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन, तीर्थाटन एवं पर्वतारोहण गतिविधियों को सुरक्षित बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग, प्रशिक्षित रेस्क्यू बलों की तैनाती तथा सुरक्षित पर्यटन प्रोटोकॉल को और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शीतलहर और अत्यधिक हिमपात से उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी रूप से निपटने के लिए भी राज्य में कई ठोस और व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। सभी जिलों को अर्ली वार्निंग सिस्टम से जोड़ा गया है और अलाव, रैन बसेरों तथा कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश भी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन आपस में बेहतर तालमेल बनाए रखें और अर्ली वार्निंग सिस्टम को और अधिक सुदृढ़ करते हुए शीतलहर तथा हिमपात वाले क्षेत्रों में समय पर चेतावनी और आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करें। शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया, जुकाम, फ्लू, निमोनिया जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए सभी जिला अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल मेडिकल टीमों को सक्रिय रखना होगा। विशेष रूप से सीमांत और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आवश्यक दवाइयों, हीटिंग उपकरणों एवं प्राथमिक उपचार सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए ‘युवा आपदा मित्र’ एवं ‘आपदा सखी’ जैसी पहल को और सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के माध्यम से शीत ऋतु के दौरान होने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा तथा विभागों के मध्य समन्वय को मजबूत किया जाएगा।

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि शीतलहर धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाती है, परंतु इसका असर भयावह होता है। यह आमजन की स्वास्थ्य सेवाओं और विशेष रूप से संवेदनशील लोगों के जनजीवन को प्रभावित करती है। शीतलहर प्रबंधन को हमें केवल मौसमी प्रबंधन की चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व के रूप में देखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य में आपदा प्रबंधन को सशक्त, संगठित और नीति-आधारित स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य श्री राजेन्द्र सिंह, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री विनय रोहिला, सचिव आपदा प्रबंधन श्री विनोद कुमार सुमन, श्री आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।

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: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में टिहरी बांध विस्थापित क्षेत्र संघर्ष समिति,भाग–1 पथरी हरिद्वार एवं ग्राम पंचायत आदर्श टिहरी नगर, बहादराबाद के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की।

प्रतिनिधि मंडल ने विस्थापितों को भूमिधरी अधिकार दिए जाने एवं पुनर्वास से जुड़े विषयों पर अपनी बात मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सम्बन्ध में मौके पर ही जिलाधिकारी हरिद्वार एवं जिलाधिकारी टिहरी से दूरभाष पर वार्ता की। मुख्यमंत्री ने सम्बंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकरण में वैधानिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे विस्थापित परिवारों को शीघ्र राहत मिल सके।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टिहरी बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और उनके अधिकारों का संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद तथा सचिव श्री एस. एन. पाण्डेय, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती आशा नेगी व ग्राम प्रधान भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री द्वारा तत्काल संज्ञान लेकर दिए गए निर्देशों के लिए आभार व्यक्त किया।

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*सूचना का अधिकार जन सशक्तिकरण और पारदर्शी शासन का मजबूत आधार- मुख्यमंत्री*

*आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले लोक सूचना तथा अपीलीय अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित।*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में आरटीआई अधिनियम (सूचना का अधिकार कानून) के लागू होने के 20 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में आरटीआई अधिनियम के तहत सराहनीय कार्य करने वाले 5 लोक सूचना अधिकारियों तथा 5 अपीलीय अधिकारियों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने जिन अधिकारियों को सम्मानित किया उनमें जिलाधिकारी बागेश्वर श्रीमती आकांक्षा कोंडे (तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार), श्री अभिनव शाह मुख्य विकास अधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी श्री आयुष अग्रवाल, लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड के उपसचिव डॉ. प्रशांत, उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा श्री एस.एस. चौहान, उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अनु सचिव श्री राजन नैथानी, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली, पिथौरागढ़ श्री ललित मोहन जोशी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामनगर वन प्रभाग श्रीमती कमला शर्मा, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा, से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी से श्री लियाकत अली खान और जिला विकास अधिकारी हरिद्वार श्री वेद प्रकाश शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है और पारदर्शी शासन व्यवस्था की आधारशिला है। इस अधिनियम ने शासन और नागरिकों के बीच विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही का एक नया अध्याय खोला है। उन्होंने कहा कि इस क़ानून ने प्रत्येक नागरिक को शासन की नीतियों, निर्णयों और कार्यप्रणाली को समझने, प्रश्न पूछने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की शासन व्यवस्था में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस, ई-ऑफिस, ऑनलाइन पोर्टल, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और जन-सुनवाई जैसे माध्यमों ने शासन और जनता के बीच संबंध को और मजबूत बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पारदर्शी, उत्तरदायी और जनोन्मुखी शासन व्यवस्था की दिशा में सतत कार्य कर रही है। राज्य में प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है और अधिकांश सरकारी सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जिससे नागरिकों को जानकारी और सेवाओं की उपलब्धता में सुगमता आई है। मुख्यमंत्री ने आरटीआई ऑनलाइन पोर्टल और आयोग की हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे न्याय प्रक्रिया और भी सुलभ हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक राज्य सूचना आयोग में 13 लाख से अधिक आरटीआई आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से अधिकांश का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है। वर्तमान में केवल 700 प्रकरण लंबित हैं, जो आयोग की दक्षता का प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की निष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिक अधिकारों की रक्षा में प्रशंसनीय भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही इसके उपयोग में जिम्मेदारी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में इस अधिनियम का दुरुपयोग देखा गया है, जिस पर रोक लगाने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विभाग उन सूचनाओं को अपनी वेबसाइट पर नियमित रूप से प्रदर्शित करे जिनकी बार-बार मांग की जाती है, ताकि नागरिकों को स्वतः जानकारी मिल सके और पारदर्शिता बढ़े।

इस अवसर पर मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी, राज्य सूचना आयुक्त श्री देवन्द्र कुमार आर्य, श्री दलीप सिंह कुंवर, श्री कुशलानन्द, उत्तराखण्ड अवस्थापन अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर मौजूद थे।

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*मुख्यमंत्री ने उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को दिलाई शपथ*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब, परेड मैदान, देहरादून में उत्तरांचल प्रेस क्लब की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई।

मुख्यमंत्री ने सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तरांचल प्रेस क्लब, प्रदेश की लोकतांत्रिक चेतना का सशक्त मंच है। उत्तरांचल प्रेस क्लब ने हमेशा अपनी गरिमा, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखा है। उन्होंने कहा पत्रकारिता, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। यह सरकारों को उत्तरदायी, समाज को जागरूक और आम नागरिक को सजग करता है। स्वतंत्र, जागरूक और जिम्मेदार पत्रकारिता, सरकार और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल युग में, सोशल मीडिया के माध्यम से फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाएँ तेज़ी से फैल रही हैं, ऐसे में पत्रकारों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। सही तथ्यों के साथ निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग ही समाज को भ्रम से बचा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड के पत्रकारों ने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में साहस के साथ अपना काम किया है। उन्होंने कहा पत्रकारों की कलम में वह शक्ति है, जो समस्याओं को उजागर करने के साथ-साथ समाधान का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, आकस्मिक सहायता एवं आवासीय योजनाओं को लेकर कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा मान्यता प्राप्त पत्रकारों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के साथ दिया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार सम्मान योजना के अंतर्गत अनेक वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया गया है। पत्रकार पेंशन में वृद्धि के साथ-साथ, विभिन्न जिलों से देहरादून आने वाले पत्रकारों के लिए सूचना विभाग के माध्यम से आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी प्रयास किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि *उत्तरांचल प्रेस क्लब के भवन निर्माण के मुद्दे को उन्होंने स्वतः ही कैबिनेट में रखा। जिसपर कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की है। उन्होंने कहा जल्द ही यह भवन एक मॉडल भवन के रूप में बनेगा।* मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पत्रकार पेंशन योजना के अंतर्गत पत्रकार कल्याण कोष का बजट 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है। उन्होंने कहा उत्तराखंड प्रत्येक क्षेत्र की भांति जनसंचार के क्षेत्र में भी अपनी एक नई पहचान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि *मीडिया सेंटरों के आधुनिकीकरण और प्रेस क्लबों के सशक्तिकरण पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा 2026-27 के सामान्य बजट में भी मीडिया सेंटरों को लेकर प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने कहा इससे आने वाले समय में अन्य जिलों में भी पत्रकारों को अच्छी सुविधाएं मिल सकेंगी।* मुख्यमंत्री ने कहा कि *उत्तराखंड राज्य के प्रति उनका भी ऋण और उत्तरदायित्व है। उन्होंने कहा वो स्वयं भी सामान्य परिस्थितियों से उठकर राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। वो अपने कर्तव्य का निर्वाह करते रहेंगे। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने अपनी कर्तव्यों का निर्वहन पहले भी किया है और आगे भी करते रहेंगे।*

उत्तरांचल प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री अजय सिंह राणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हमेशा पत्रकारों के कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा पत्रकार, पत्रकारिता के साथ अन्य क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने उत्तरांचल प्रेस क्लब के भवन निर्माण को लेकर कैबिनेट में हुए फैसले के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री अजय सिंह राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री गजेन्द्र सिंह नेगी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष सोबन सिंह गुसाई, महामंत्री श्री योगेश सेमवाल, संयुक्त मंत्री श्री शिवेश शर्मा, श्रीमती मीना नेगी, कोषाध्यक्ष श्री मनीष डंगवाल, सम्प्रेक्षक श्री विजय जोशी एवं कार्यकारिणी सदस्य श्री वीरेन्द्र डंगवाल ‘पार्थ’, श्री मनमोहन लखेड़ा, श्रीमती रश्मि खत्री, सुलोचना पयाल, श्री मनोज सिंह जयाड़ा, श्री हरीश थपलियाल, श्री मनबर सिंह रावत, श्री ओम प्रकाश जोशी, श्री हिमांशु जोशी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलवाई।

इस अवसर पर विधायक श्री खजान दास, मेयर श्री सौरभ थपलियाल, दायित्वधारी डॉ. देवेंद्र भसीन, महानिदेशक सूचना श्री बंशीधर तिवारी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति की*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता की अनुरोध व उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी प्रकरण की CBI जांच कराए जाने की संस्तुति प्रदान की है ।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी के साथ हुई इस अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और ट्रायल के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। SIT द्वारा गहन विवेचना के पश्चात अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि यह पूरे प्रकरण में इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन पर जांच की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से मुलाकात की, जिसमें बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की CBI से जांच कराने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार पहले भी न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी पूरी दृढ़ता एवं संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय बहन अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध रहेगी।
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जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” अभियान के माध्यम से लाखों नागरिकों तक पहुँची धामी सरकार*

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। 09 जनवरी 2026 तक आयोजित शिविरों के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकार सीधे जनता के द्वार तक पहुँचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सभी 13 जनपदों में अब तक 297 कैंपों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 2,13,341 नागरिकों ने प्रत्यक्ष सहभागिता की। इन शिविरों के माध्यम से जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए 24,247 शिकायतें प्राप्त की गईं, जिनमें से 16,458 शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन कैंपों के माध्यम से नागरिकों को सरकारी सेवाओं से जोड़ने का कार्य भी प्रभावी ढंग से हुआ है। विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों हेतु 33,158 आवेदन प्राप्त किए गए, वहीं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,21,375 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाया गया।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि “जन–जन की सरकार, जन–जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सेवा, समाधान और संवेदनशीलता का अभियान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाला प्रत्येक नागरिक भी सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त कर सके।

उन्होंने कहा कि जनपदवार आयोजित कैंपों में अल्मोड़ा, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, उधम सिंह नगर, देहरादून सहित सभी जिलों में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली है, जो इस बात का प्रमाण है कि जनता सरकार पर भरोसा कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों और आवेदनों का समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ जनता के द्वार तक पहुँचेगी और सुशासन, पारदर्शिता एवं जनकल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखेगी।

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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि यह भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार की उच्च प्राथमिकता वाली परियोजना है, और इसे जल्द से जल्द पूर्ण किए जाने का कार्य दिया गया है।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही कोई ढिलाई न हो, इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने सभी संस्थानों के साथ बैठक कर कार्यों में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए हैं। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना के सम्बन्ध में विस्तार से सभी संस्थानों के स्तर से किए गए कार्यों की प्रगति की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना से सम्बन्धित सभी प्रकार की ड्रॉइंग्स और केन्द्रीय जल आयोग से उनका पुनरीक्षण कार्य ससमय करा लिए जाए। उन्होंने परियोजना को समय से पूर्ण किए जाने हेतु सभी स्तरों की पर्ट चार्ट के साथ टाईमलाईन तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने दक्ष मैनपावर, मशीन और निर्माण सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा हाईड्रॉ मैकेनिकल ड्रॉइंग्स शीघ्र उपलब्ध करायी जाए।

मुख्य सचिव ने परियोजना से सम्बन्धित सभी प्रकार के अध्ययन आवश्यक रूप से उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने यूजेवीएनएल और जिला प्रशासन को लगातार परियोजना से जुड़े सभी स्टेक हॉल्डर्स और प्रभावितों से लगातार संवाद किया जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को अपने स्तर पर पाक्षिक रूप से कार्यों की प्रगति की समीक्षा किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वयं उनके स्तर से भी नियमित रूप से प्रगति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियों के लिए सम्बन्धित मंत्रालयों से भी लगातार संवाद कर फाईल प्रोसेसिंग में तेजी लाए जाने की बात कही।

बैठक में बताया गया कि यमुना नदी पर स्थित लखवाड़ बहुद्देश्यीय परियोजना के अंतर्गत बनाया जाने वाला बांध 204 मीटर ऊंचा और इसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 330.40 एमसीएम है। इसकी 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, एमडी यूजेवीएनएल डॉ. संदीप सिंघल, सीडब्ल्यूसी के प्रतिनिधि एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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