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मुख्यमंत्री ने विजय दिवस पर शहीद स्मारक में पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि जानिए सभी समाचार

Pahado Ki Goonj

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी से जी न्यूज के रिपोर्टर श्री विनोद कांडपाल के पिताजी श्री दिनेश कांडपाल के निधन पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार जनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

सूचना महानिदेशक श्री बंशीधर तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार श्री विनोद कांडपाल के पिताजी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की है।

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*मुख्यमंत्री ने विजय दिवस पर शहीद स्मारक में पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि*

*भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा का दिन है विजय दिवस*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध के सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सैनिक कल्याण निदेशालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (डीडीहाट, हरबर्टपुर, पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार) इन सभी पाँच कार्यालयों में सरकारी वाहन दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी वीर बलिदानियों को समस्त प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से 1971 के युद्ध में राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा की। आज भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा को स्मरण करने का दिन है, जो हमारे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 248 बहादुर सपूतों ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे प्रदेश के 74 सैनिकों को अपने अदम्य साहस और शौर्य के लिए विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंधु के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे सैनिकों के साथ-साथ हमारे स्वदेशी हथियार भी किसी से कम नहीं हैं। इस अभियान में भारत में निर्मित आकाश मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों ने पूरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। आज दुश्मन की एक-एक गोली का जवाब गोलों से दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है और उन्हें उनके ठिकानों में ही नेस्तनाबूद कर देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वीर जवानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन योजना हो, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि कर सैनिकों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो, या बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना—ऐसे अनेक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार भी सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। अशोक चक्र की राशि 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, महावीर चक्र और कीर्ति चक्र की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये तथा वीर चक्र और शौर्य चक्र की एकमुश्त राशि 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं। राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। देहरादून के गुनियाल गाँव में ‘‘भव्य सैन्य धाम’’ का निर्माण भी किया जा रहा है।

सैनिक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान करीब 4 हज़ार सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 248 शहीद सैनिक शामिल थे। करीब 9 हज़ार सैनिक घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए, जो हमारे राज्य के लिए गौरव की बात है। सैनिकों का सम्मान हर देशवासी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है। सैनिकों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक श्री खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव सैनिक कल्याण श्री दीपेन्द्र चौधरी, मेजर जनरल (से.नि.) सम्मी सबरवाल तथा पूर्व सैनिक और वीरांगनाएँ उपस्थित थीं।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार श्री पंकज मिश्रा के असामयिक निधन पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार जनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

सूचना महानिदेशक श्री बंशीधर तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार श्री पंकज मिश्रा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की है।
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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (NUJ Uttarakhand) की प्रदेश अध्यक्ष (वरिष्ठ पत्रकार, दैनिक भास्कर की कुमाऊं प्रभारी) श्रीमती दया जोशी जी की माता जी श्रीमती पार्वती लोहनी के निधन पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार जनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

सूचना महानिदेशक श्री बंशीधर तिवारी ने भी वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती दया जोशी के माताजी जी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से कामना की है।

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मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक ली। बैठक के दौरान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ अभियान के तहत प्रदेशभर की विभिन्न न्याय पंचायतों में कैम्प लगाकर जन सामान्य को राज्य एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंचाए जाने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मूल उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि 17 दिसम्बर से अगले 45 दिनों तक प्रदेश की प्रत्येक न्याय पंचायत के प्रत्येक पात्र नागरिक को 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं से संतृप्त किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए प्रत्येक जनपद को रोस्टर तैयार कर कैम्प लगाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक को मिले इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने अंतर्गत न्याय पंचायतों की संख्या के आधार पर रोस्टर निर्धारित कर सकता है। कहा कि ज्यादा न्याय पंचायतों वाले जनपद इस अभियान को तब तक जारी रखेंगे जब तक सभी प्रदेशवासी योजनाओं के लाभ से संतृप्त नहीं हो जाते। उन्होंने कहा कि जनपद में अधिकारियों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक सप्ताह में 2 से 3 कार्य दिवसों में प्रत्येक तहसील की प्रत्येक न्याय पंचायत को संतृप्त किया जाना है।

मुख्य सचिव ने कहा कि कैम्प लगाए जाने से पहले न्याय पंचायत में इसका प्रचार प्रसार अनिवार्य रूप से कर लिया जाए ताकि कैम्प में पात्र अभ्यर्थी विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें, साथ ही अपने जरूरी दस्तावेज भी तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रचार प्रसार के लिए सोशल मीडिया टूल का भी इस्तेमाल किया जाए ताकि लोगों को जानकारी रहे कि किस न्याय पंचायत में कौन-कौन से दिन कैम्प लगना है। उन्होंने निर्देश दिए कि कैम्प लगने से 2-3 दिन पूर्व उस न्याय पंचायत में अनिवार्य रूप से सभी प्रकार के आवेदन पत्र और जानकारी उपलब्ध करा दी जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों द्वारा कैम्प के उपरान्त न्याय पंचायत के आसपास के गांवों का भ्रमण कर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के पात्र अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र भरवाए जाएं। प्रयास किए जाएं कि न्याय पंचायत के सभी पात्र निवासीगण सरकारी जनहित की योजनाओं से संतृप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण की विभिन्न पेंशन योजनाओं, प्रमाण पत्रों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण आदि सहित कुल 23 विभागों की विभिन्न योजनाओं का लाभ इस बहुद्देशीय कैम्प के पात्र लाभार्थियों को दिया जाना है। राज्य एवं जनपद स्तर बैंकर्स समिति को भी विभिन्न योजनाओं के तहत् ऋण लाभ के लिए इस कैम्प में शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रभारी सचिवों द्वारा अपने अधीन जनपदों में लगने वाले बहुद्देशीय कैम्पों का औचक निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प में आमजन की शिकायतों का तत्काल निस्तारण के निर्देश देते हुए लगातार इसकी मॉनिटरिंग किए जाने की भी बात कही। कहा कि प्रत्येक सप्ताह आयोजित कैम्पों की प्रगति आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय एवं सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को सभी आयोजित कैम्प का डेटाबेस तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कैम्प का डॉक्यूमेंटेशन के लिए एक ऐप तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव श्री शैलेश बगौली, श्री दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री श्रीधर बाबू अद्धांकी, डॉ. वी. षणमुगम एवं श्री विनोद कुमार सुमन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
*सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाव*

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