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भारत-सरकार के नाम से कैसे लोगों व उच्च स्तर की पढाई करने वाले लोगों को ढग कर बेबकूफ बनाया जा रहा है इसका प्रमाण सहित पुरा मामला आपके तत्वाधान में हैँ

Pahado Ki Goonj

[31/10, 10:36 am] Dr Shailendr Kumar Virani: आपका National IP Award 2025 से सम्बन्द्धित एक ईमेल मुझे 18-10-2025 को 12:24 PM को भेजा वो मुझे मीला | इसके लिए आपको धन्यवाद देना चाहिए या नहीं देना चाहिए उसके लिए मैं भ्रमित हूँ अत: आप स्वयं इस पत्र को पढकर निर्धारित कर ले | यह ईमेल National IP Award 2025 से सम्बन्द्धित हैं और इसके लिए आवेदन करने की अन्तिम तारीख 30/10/2025 बताई गई हैं | इस ईमेल को पढने व लिंक वेब पते पर जाकर चेक करने पर पता चला की आवेदन करने की अन्तिम तारीख 02-10-2025 निर्धारित कर रखी हैं | यह आपके ईमेल भेजकर सुचित करने से पहले ही निकल चुकी हैं |

इस तरह के अवार्ड शुरू करने की बात मैंरे द्वारा आधिकारिक रूप से किये गये प्रयासों के बाद शुरू हुई | यह व्यक्तिगत रूप से बौद्धिक सम्पदा अधिकार प्राप्त करने वालो के लिए आगे बढने व उसका व्यवसाहीकरण करने के लिए अति जरूरी था क्योंकि देश के बैंकिंग सिस्टम, वित्तिय सिस्टम में पेटेन्ट का मतलब शून्य था और जहां तक मुझे जानकारी आज भी शून्य हैं | इसके लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के तत्वाधान (1446/CMS/PUB/2007 Dated 08/02/2007) में मध्यप्रदेश के वैज्ञानिक सलाहकार और मध्यप्रदेश काउन्सिल आफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी (MPCOST) के महानिर्देशक के अधीन ऐसा निवेदन सरकारी चैनल से पेटेन्ट विभाग को भेजा (F 05-03/2007/41/S&T Dated 20-07-2007) गया था | इस तरह के दो पत्र केन्द्रिय विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी मंत्रालय के अन्तर्गत TIFAC (VI – D&P/Misc./09-10/TDT Dated 31/08/2009) व NRDC (IPR/04260/2008 Dated 16-04-2008) को भेजे गये थे | इस तरह के पत्रों के साथ मध्यप्रदेश शासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड लिया था जबकि यह मध्यप्रदेश राज्य के इतिहास का व्यक्तिगत रूप से बिना किसी एजेन्ट के पहला पेटेन्ट अधिकार था |

भारतीय पेटेंट विभाग ने उस समय इस पर कुछ नहीं किया परन्तु TIFAC, भारत-सरकार ने पेटेंट धारकों के लिए एक राष्ट्रिय अवार्ड की शुरूआत करी | यह भारत-सरकार के नाम से या उसमें शीर्ष पदों पर बैठे कुछ माननीयों की तरफ से विज्ञान के साथ, देश के भविष्य युवा व कुछ शिक्षित प्रतिभाशाली लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा, छल, कपट व सबसे बडा राष्ट्रद्रोह था | इस तरह का कपट व पीठ में छुरा भौंकने का काम अंग्रेजों ने भी गुलाम भारत के लोगों के साथ नहीं किया था |

वर्तमान 2025 में National IP Award 2025 के तहत अधिकतम पुरुस्कार राशि एक लाख रुपये हैं जबकि TIFAC भारत-सरकार के राष्ट्रीय अवार्ड में पुरूस्कार राशी पांच लाख और पांच लाख मीलाकर कुल दस लाख भारतीय रूपये थे | TIFAC के राष्ट्रीय अवार्ड में आवेदन के साथ पेटेन्ट धारक का हस्ताक्षर व उसको धोखे में रखकर पेटेंट को इस पुरूस्कार के झाल से हडप लेने का सबसे घटिया व निम्न दर्जे का खेल था | आपके इस नये अवार्ड में क्या हैं, मुझे नही पता क्योंकि मैंने उसे डिटेल में नहीं पढा हैं |

मेरे आविष्कार व उसके पेटेन्ट (,202881) ने दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई थी | दुनिया की सर्वोच्च संस्थाओं के समर्थन आये थे | इसकी संक्षिप्त जानकारी इस प्रकार हैं | भारत 370 वर्ष पुराने आधुनिक शल्य चिकित्सा विज्ञान विशेष रूप से सुई आधारित इंजेक्शन व अन्य उपकरणों में अग्रणी बना था | संयुक्त राष्ट्र संघ (26-07-2008), इंटरनेशनल रेड क्रॉस एन्ड क्रीसेंट सोसायटी जिनेवा (24-08-2011), द ग्लोबल फण्ड (20-06-2011), पावती मेल ( Email Dated 13-05-2009 time 08:51 PM official email id :- president(at)message(dot)whitehouse(dot)gov) बराक ओबामा, बिल एंड मेलिना गेट्स फाउंडेशन (06-08-2009), क्लिंटन फाउंडेशन (25-03-2009), वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) इत्यादि-इत्यादि | दुनिया के हर हिस्से से चालिस से ज्यादा देशों की कम्पनियों के करोड़ों-अरबों डालर में एडवान्स आर्डर के पत्र व ईमेल आये थे |

दुनिया के सबसे बडे बिजनेस टू बिजनेस के लन्दन स्थित अन्तर्राष्ट्रीय आफिस से सीधा फोन आ गया था | भारत को प्रति वर्ष इतना पैसा मीलता जितना उस पर विदेशी कर्ज नहीं था | पेटेन्ट के अधिकार के रूप में एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था का भारत में खुलना सुनिश्चित था और पुरा अधिकार भारत के पास रहता | भारत को सिर्फ अपनी कम्पनीयों से माल बनाकर देना था क्योंकि बिक तो पहले ही चुका था | निचे से लेकर ऊपर तक कोई कुर्सीधारी अधिकारी, महानुभव यह नहीं चाहते थे | सभी यही चाहते थे और शायद आज भी चाहते हैं कि भारत मानसिक रूप से गुलाम ही बना रहे | हमने सारे प्रमाण, दस्तावेज व दुनियाभर के सारे ईमेल, पत्र राष्ट्रपति महोदय को क्रियान्वय की पुरी योजना के साथ भेज (Letter Ref No. P1/D/1908110208 Dated 19-08-2011) दिये |

इसके बाद कहीं मंत्रालयों व विभागों में दस्तावेजों की फाईल चली और अन्तिम फैसला लेने के लिए राष्ट्रपति को अधिकृत कर दिया | इन सभी आधिकारिक पत्रों व आदेशों की डिटेल इस पत्र में लिखूंगा तो ईमेल की शब्द सीमा से बाहर चला जायेगा और पत्र क्रमांक व तारीखों के रूप में आपको लगेगा की मैंने गालीया लिखकर भेजी हैं |

भारत के राष्ट्रपति ने आजतक अन्तिम फैसला नहीं लेकर इसे विचाराधीन रखा और भारत को विकास पथ पर एक जगह बांध दिया हैं व दुनिया कई आगे निकल चुकी हैं | मैं समय-समय पर राष्ट्रपति महोदय को रिमाइंडर पत्र भेजता रहता हूँ जो हर बार आधिकारिक रूप से दर्ज होता हैं और किसी न किसी मंत्रालय की टेबल पर धुल झाडने भेज दिया जाता हैं | एड्स, हेपेटाइटस, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, ईबोला, जीका व कोरोना सबकुछ आ गये | मैंने एड्स व हेपेटाइटस को छोडकर हर बार समय से पहले सचेत किया और बचने का उपाय भेजा था | अब भी अफसोस जताकर मामला खत्म कर चले जाने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि कोरोना से आगे आने वाले वायरस की डिटेल मैंने राष्ट्रपति को भेज रखी हैं | इस बार इतने डेथ जोन बनेंगे की आप में से अधिकांश लोगों को इस आविष्कार पर सोचने व लोगों तक पहुचाने के महत्तवपूर्ण काम से ही नहीं जीवन से भी मुक्त कर देगा | भारत के एक राष्ट्रपति ने इस फाईल को बहुत दबा कर रखा और अन्त में कोरोना के ही मुंह के निवाले बन गये |

भारत के राष्ट्रपति और यहां के सिस्टम ने भारत को रोक रखा हैं अन्यथा भारत कभी का विकसित बन गया होता | 2020, 2025 और 2045 सभी बहकावे हैं क्योंकि इन समय तक वादा करने वाले कुर्सीधारी जीवित ही नहीं रहेंगे | यह सभी जानकारी जनता में तारिख व सरकारी दस्तावेजों के साथ लगातार प्रकाशन के रूप मे सामने हैं | हम सभी डिटेल राष्ट्रपति महोदय को लगातार अवगत करा रहे हैं | इससे हजारों कम्पनीया व करोडो रोजगार भारतीयों को मिलने से रूके पडे है व हर मिनिट दो निर्दोष ईंसान अपनी जिन्दगी गवा रहे है | आपको बता दूं कि इस आविष्कार को रोके रखने से दुनिया की आधुनिक चिकित्सा विज्ञान वर्षो से एक जगह पर अटकी पडी है और आगे नही बढ पा रही हैं | इंडियन काउन्सिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने इसे प्राइवेट आविष्कार बताकर कुछ नहीं करा और लाखों भारतीयों को मौत के मुंह में धकेल दिया | अब इन्हे कौन समझाये की राष्ट्रपति की जिन्दगी व हजारों सरकारी कर्मचारियों की मौत भी प्राईवेट थी |

आप अवार्ड देना नहीं चाहते यह ईमेल की भूमिका से ही तय हैं वैसे इस दुनिया में मुझे अकेले को नहीं जीना, आप सभी व दुनिया के हर नागरिक को जीना हैं | आप पैसा, धन-दौलत व बडे बनने और भौतिक सुविधा भौगने का अधिकार अपने अधीन रख ले जिन्दगी नहीं मिलने वाली हैं क्योंकि ईलाज को दबाकर रखा है | दुनिया के कही देश भारत से बहुत आगे निकल गये और आगे की दिशा में बढते जा रहे हैं परन्तु भारत की बर्बादी व विज्ञान में पिछडने का यह भी बहुत बडा कारण हैं | भारत के राष्ट्रपति रहे एक महानुभव भी अपने आप को नहीं बचा सके तो आप कैसे अपने आप को बचा लेंगे | जब जीवन ही नहीं बचेगा तो अवार्ड देने वाले और लेने वालो की चर्चा कौन करेगा |

भारत-सरकार के नाम से कैसे लोगों व उच्च स्तर की पढाई करने वाले लोगों को ढग कर बेबकूफ बनाया जा रहा है इसका प्रमाण सहित पुरा मामला आपके तत्वाधान में हैँ |

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