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दीपावली 2025 पर उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल” दैवज्ञ” का बहु प्रतीक्षित निर्णायक बयान जारी

Pahado Ki Goonj
  • धर्मपुर: *विधायक की पत्नी को चुनाव हराकर इतिहास बनाने वाली ज्योति पटवाल ने लिया ज्योतिष गुरु डॉ दैवज्ञ का आशीर्वाद।*

*देहरादून*। लैंसडाउन के विधायक दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत को जिला पंचायत चुनाव में जबरदस्त पटखनी देकर प्रदेश में इतिहास बनाने वाली ज्योति पटवाल ने अपने ज्योतिष गुरु आचार्य चंडी प्रसाद “दैवज्ञ” से आशीर्वाद लिया।

*भारतीय जनता पार्टी के नेता मनदीप पटवाल ने बताया कि हम लोग काफी वर्षों से ज्योतिष गुरु आचार्य दैवज्ञ के अनुयाई हैं उनके मार्गदर्शन में ही कार्य करते हैं ,और इस बार जिला पंचायत चुनाव में पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन विधानसभा क्षेत्र के जहरी खाल जिला पंचायत सीट से उनकी पत्नी ज्योति पटवाल निर्दलीय चुनाव लड़ी और आचार्य दैवज्ञ के आशीर्वाद से इस क्षेत्र से तीसरी बार के विधायक दिलीप रावत की पत्नी नीतू रावत को लगभग 500 वोटो से हराकर प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।*

आशीर्वाद लेते हुए ज्योति पटवाल ने कहा कि मुश्किल समय में भी ज्योतिष गुरु आचार्य दैवज्ञ ने उनका मार्गदर्शन किया और उसका परिणाम है, कि वह इस जिला पंचायत चुनाव में प्रतिष्ठा की लड़ाई में इतिहास बनाने में सफल रही आज उन्होंने डॉ दैवज्ञ के निजी आवास व्हाइट हाउस धर्मपुर देहरादून पहुंचकर धन्यवाद करते हुए सपरिवार आशीर्वाद ग्रहण किया।

*संपर्क करने पर अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रसिद्ध उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” ने पुष्टि करते हुए कहा कि मनदीप पटवाल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बहुत अच्छे कार्यकर्ता रहते हुए कोटद्वार डिग्री कॉलेज के अध्यक्ष रहे और उनकी पत्नी ज्योति पटवाल बहुत व्यवहार कुशल और उच्च शिक्षित है, दोनों पति-पत्नी के ग्रह नक्षत्र आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बहुत अनुकूल नजर आते हैं।*

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धर्मपुर: *समर्थ घिल्डियाल ने देहरादून के सर्वश्रेष्ठ छात्रों में बनाया स्थान।*

*देहरादून।* सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं के छात्र समर्थ घिल्डियाल ने देहरादून के सर्वश्रेष्ठ छात्रों में अपना स्थान बनाकर सर्वश्रेष्ठ छात्र 2025 सम्मान प्राप्त किया है।

राजधानी के सुभाष नगर क्लेमेंट टाउन में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित” *गुरु बंदन छात्र प्रतिभा अभिनंदन”* कार्यक्रम में मुख्य अतिथि फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून के पूर्व महानिदेशक एवं फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ अश्विनी कुमार शर्मा ने राजधानी के नामीचीन विद्यालयों के *वर्ष 2025 की बोर्ड परीक्षाओं में टॉपर्स के बीच बलूनी पब्लिक स्कूल से सर्वश्रेष्ठ छात्र के रूप में चयनित होकर आए समर्थ घिल्डियाल को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देते हुए कहा कि गणित जैसे विषय में 100% अंक प्राप्त करना अपने आप में बहुत बड़ा रिकॉर्ड है, उन्होंने अपेक्षा की की समर्थ आगे भी रिकॉर्ड बनाकर उत्तराखंड की राजधानी का नाम पूरे विश्व में रोशन करेगा।*

भारत विकास परिषद के सचिव आरपी श्रीवास्तव ने कहा कि विभिन्न विद्यालयों से कहा गया था कि परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ अंकों के साथ-साथ अनुशासन एवं अन्य एक्टिविटीज में भी आगे रहने वाले प्रतिभा संपन्न छात्र-छात्राओं को यह सम्मान दिया जाएगा इस मानदंड पर चयनित करके भेजे गए सम्मान प्राप्त करने वाले छात्रों को भविष्य के लिए उत्साह वर्धन हेतु आकर्षक उपहार भेंट किए गए हैं।

*समर्थ घिल्डियाल ने इस सम्मान का श्रेय बलूनी पब्लिक स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन बलूनी, प्रधानाचार्य पंकज नौटियाल एवं सीनियर एकेडमिक हेड एसएस नेगी सहित सभी शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया। मौके पर समर्थ के पिता सहायक निदेशक डॉक्टर सीपी घिल्डियाल, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल की माता श्रीमती रजनी थपलियाल, डीके शर्मा, कर्नल आरएस बिष्ट, जेके मैदोला ,अभय उनियाल, श्रीमती पवन शर्मा, अनीता कपूर, अंजना महेश्वरी, संध्या वत्स ,भैरवी सिंह एवं महक शर्मा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।*

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धर्मपुर: “*दीपावली 2025 पर उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल” दैवज्ञ” का बहु प्रतीक्षित निर्णायक बयान जारी।*”

*देश के अन्य हिस्सों में दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को जबकि उत्तराखंड में 21 अक्टूबर को मनाना शास्त्र सम्मत: डॉक्टर दैवज्ञ ।*

*देहरादून ।* दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर 2025 को है, अथवा 21 अक्टूबर 2025 को है ,इस विषय पर देश के विद्वानों में सोशल मीडिया पर सीधी बहस के बीच *उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” का बहु प्रतीक्षित निर्णायक बयान आया है* उन्होंने कहा है कि पर्व निर्णय धर्मशास्त्र का विषय है, और काल गणना करना ज्योतिष शास्त्र का विषय है, सूर्य उदय और सूर्यास्त में देशांतर के कारण भारत में ही 1 घंटे से 30 ,40 ,50 मिनट तक का भी अंतर आ जाता है। भारत के विभिन्न नगरों का अक्षांतर एवं देशांतर अलग-अलग होने के कारण पर्व निर्णय में समानता नहीं हो पाती है।

सौर वैज्ञानिक डॉक्टर चंडी प्रसाद “दैवज्ञ” ने स्पष्ट किया है, कि काशी विद्वत परिषद ने स्थानीय काल की गणना करके शास्त्र प्रमाण के आधार पर 20 अक्टूबर को दीपावली मनाने का निर्णय दिया है, अन्य प्रदेशों की विद्वत परिषदों ने भी स्थान, काल गणना के आधार पर किसी ने 20 अक्टूबर तो किसी ने 21 अक्टूबर 2025 को दीपावली मनाने का निर्णय दिया है। *सटीक भविष्यवाणियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात आचार्य चंडी प्रसाद का कहना है कि उत्तराखंड गढ़वाल मंडल के सभी पंचांग अक्षांश 26 30 से 29 30 के आधार पर ही बनते हैं। रेलवे टाइम से 10 मिनट से अधिकतम 18 मिनट तक का अंतर होता है ,इसलिए यहां सभी पर्व एक ही समय पर मनाए जाने की परंपरा रही है। इस वर्ष 2025 में 20 अक्टूबर एवं 21 अक्टूबर दोनों दिन अमावस्या तिथि है ,अब लोगों के सामने बड़ा सवाल है कि लक्ष्मी पूजन किस दिन करें? धर्मशास्त्र निर्णय सिंधु के अनुसार महालक्ष्मी पूजन एवं दीपोत्सव प्रदोष काल अमावस्या एवं तंत्र-मंत्र साधना निशीथ काल में ही हो सकती है, इसमें विद्वानों का कर्तव्य है कि लोगों का सही मार्गदर्शन करें।

*धर्मशास्त्र सम्मत निर्णय*

*जनमानस में राजगुरु के नाम से प्रसिद्ध डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहते हैं, कि देश भर के लगभग 21 पंचांगों के अनुसार 20 अक्टूबर को चतुर्दशी तिथि अपराह्न 3:45 पर समाप्त हो रही है, उसके बाद अमावस्या प्रदोष काल को व्याप्त करते हुए निशीथ काल को व्याप्त करते हुए अगले दिन अर्थात 21 अक्टूबर को शाम 5:55 तक विद्यमान है ,और सूर्यास्त 5:35 पर हो रहा है, तो निश्चित रूप से दोनों दिन प्रदोष काल में अमावस्या है*।,

*निर्णयसिन्धु निर्णयानुसार*

*प्रदोषसमये लक्ष्मीं पूजयित्वा तत:क्रमात्, दीपवृक्षाश्च दातव्या: शक्त्या देवगृहेषु च।।*
*कार्तिके मास्यमावास्यां तस्यां दीप प्रदीपनम्।*
*शालायां ब्राह्मण: कुर्यात स गच्छेत् परमं पदम्।*
दर्श अमावास्या प्रदोष काल से आधीरात तक रहने वाली श्रेष्ठ होती है। यदि आधी रात तक न हो तो तो प्रदोष व्यापिनी को लेना चाहिए। *क्योंकि प्रदोष काल लक्ष्मी पूजन के लिए अधिक बलवान होता है। दोनों दिन संयोग वसात आ जाये तो कृष्णपक्ष में चतुर्दशी विद्धा के बजाय प्रतिपदा संयुक्त अमावस्या श्रेष्ठ होती है, जो इस वर्ष 21 अक्टूबर को ही है*।

इस प्रकार “यस्यय:कालस्तत्कालव्यापिनी तिथि।तया कर्माणि कुर्वीत ह्रासवृद्धि न कारणम्।। (बृ० या०)” *या तिथिं समनुप्राप्य उदयं याति भास्कर:। सा तिथि: सकला ज्ञेया स्नानदान जपादिषु।।)(देवल स्मृ०)*
*प्रदोषो$स्तमयादूर्ध्वं घटिकाद्वयमिष्यते। अर्थात सूर्यास्त के पश्चात दो घटि तक तिथि हो तो वह प्रदोष व्यापिनी तिथि कही गयी है। धर्मसिन्धु के अनुसार दोनों दिन प्रदोष में अमावास्या होतो परा लेने का निर्णय किया गया है ( अस्तोत्तरं घटिकाधिकरात्रीव्यापिनी दर्शे सति न सन्देह : )*

धर्म शास्त्रों का हवाला देते हुए उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य *दैवज्ञ* ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अक्षांश और देशांतर में अंतर होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य भागों में दीपावली 20 अक्टूबर को मनाया जाना सही है, पूरे भारतवर्ष में मंत्र और तंत्र सिद्धि के लिए भी निशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में 20 अक्टूबर को अर्धरात्रि में साधना की जाएगी । *परंतु पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित गढ़वाल और कुमाऊं मिलाकर पूरे उत्तराखंड में 20 अक्टूबर को छोटी दीपावली तथा 21 अक्टूबर को प्रदोष काल में सायंकाल 5:35 से 8:14 तक प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन तथा दीपोत्सव का त्योहार मनाना शास्त्र सम्मत है।*
[12/10, 12:40 pm] Dr.CP Ghildiyal 2 धर्मपुर: *शनिवार और मंगलवार को स्पर्श करने की वजह से दीपावली का त्यौहार नवग्रहो के उपचार की दृष्टि से अद्भुत है : आचार्य दैवज्ञ*।

*देहरादून*। इस वर्ष दीपावली का त्यौहार धनतेरस 18 अक्टूबर शनिवार से प्रारंभ होकर 21 अक्टूबर लक्ष्मी पूजन मंगलवार तक होने की वजह से नवग्रहो के उपचार के लिए यंत्र और मंत्र साधना के लिए अद्भुत संयोग बन रहा है।

*मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करने का विज्ञान विकसित करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ”विश्लेषण करते हुए कहते हैं*, कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह धन और संपदा में वृद्धि करने वाला तथा मंगल ग्रह राज्य लक्ष्मी का कारक होने से इन दोनों के बीच दीपावली के त्यौहार का पड़ना अपने आप में बहुत बड़ा अद्भुत संयोग है, जिसका फायदा लोगों को उठाना चाहिए।

*आचार्य दैवज्ञ कहते हैं कि जिन लोगों की जन्म कुंडली में आयु, स्वास्थ्य,संतान, विद्या ,रोजगार, विवाह , लक्ष्मी प्राप्ति, व्यापार में लाभ ,राजनीति में लाभ, राजकीय सेवा में उच्च पद की प्राप्ति, भूमि भवन का लाभ के लिए ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं है ,उनके लिए इस दौरान मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करके ग्रहों की यंत्र सिद्धि से सभी परिस्थितियों को अनुकूल किया जा सकता है*।

डॉ दैवज्ञ ने लोगों को सलाह दी है कि समय पर अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण करवा कर इस अद्भुत संयोग का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि कोई भी मनुष्य बलवान अथवा निर्बल नहीं होता है यदि होता है तो सब कुछ समय होता है और समय को अनुकूल और प्रतिकूल समझने और करने के विज्ञान का नाम ही ज्योतिष है।

*उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चिंता करने से हम मौसम की प्रतिकूलता को नहीं बदल सकते हैं, परंतु छाता बनाने का चिंतन करके मौसम की प्रतिकूलता से बचा जा सकता है ठीक इसी प्रकार से भाग्य में लिखे हुए के प्रति चिंता करने के बजाय ज्योतिष के उपायों से भी पूर्ण रूप से रक्षा हो जाती है।*
[20/10, 3:02 pm] Dr.CP Ghildiyal 2 धर्मपुर: *दीपावली के लिए दुल्हन की तरह सजा उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य दैवज्ञ का धर्मपुर स्थित व्हाइट हाउस।*

*देहरादून*। दीपावली 2025 के लिए देहरादून धर्मपुर का व्हाइट हाउस उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल *दैवज्ञ* के अनुयायियों ने दुल्हन की तरह सजा दिया है।
*डॉ दैवज्ञ के कार्यक्रम प्रभारी खेम सिंह चौहान ने बताया कि इस बार अमावस्या तिथि दो दिन होने से दीप उत्सव का त्योहार 5 दिन तक मनाया जा रहा है 18 तारीख धनतेरस से ही आचार्य श्री के अनुयायियों ने उनके आवास को मल्टी कलर वाली इंडियन लाइटिंग से चारों तरफ से सजा रखा है।*

खेम सिंह ने बताया कि ज्योतिष रत्न डॉक्टर घिल्डियाल अपने आवास व्हाइट हाउस पर ही मंत्रों और यंत्रों की साधना करके अपने से जुड़े हुए विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, नौकरशाहों एवं व्यापारियों का कल्याण करेंगे, बताया कि इसके लिए 15 दिन पूर्व से ही लोगों ने अपने नाम कुंडली सहित दर्ज करवा दिए थे, *बताया कि आचार्य श्री 20 तारीख को रात्रिभर साधना करेंगे और 21 तारीख को सायं काल 6:00 बजे से 8:15 तक अति विशिष्ट पद्धति से महालक्ष्मी पूजन करेंगे।*

*विदित है कि उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डॉक्टर चंडी प्रसाद घिल्डियाल “दैवज्ञ” की भविष्यवाणीयां एकदम सटीक साबित होती हैं और वह मंत्रों की ध्वनि को यंत्रों में परिवर्तित करके लोगों की विभिन्न समस्याओं का वैज्ञानिक पद्धति से समाधान भी कर देते हैं।*

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