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उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को सहेजने की ” जागर” फिल्म द्वारा एक अनूठी पहल

Pahado Ki Goonj
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को सहेजने की ” जागर” फिल्म द्वारा एक अनूठी पहल
पिछले सप्ताह मुखवा गांव और हरसिल घाटी के अन्य इलाकों में प्रियांशु पैन्यूली और वंदना पैन्यूली द्वारा ” जागर” फिल्म बनाने कार्य संपन्न हुआ।
प्रियांशु पैन्यूली  उत्तराखंड के टिहरी जिले के मूल निवासी और उत्तराखंड से हिंदी फिल्म उद्योग बॉलीवुड में एक प्रतिभाशाली फिल्म कलाकार हैं। उन्होंने सिनेमा को सिर्फ एक कला के रूप में नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति और सामाजिक सरोकारों को सशक्त तरीके से प्रस्तुत करने का माध्यम बनाया है। अपने गहरे जुड़ाव और समर्पण के साथ, वह उत्तराखंड की समृद्ध लोककथाओं और परंपराओं को बड़े पर्दे पर जीवंत कर रहे हैं।
प्रियांशु पैन्यूली वर्तमान में “जागर फिल्म” का निर्देशन कर रहे हैं, जो उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मुद्दों को दर्शाने का एक प्रयास है। फिल्म का हर दृश्य उत्तराखंड की आध्यात्मिकता, लोककथाओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की एक कोशिश है।
उनका प्रयास ” जागर” फिल्म को विश्व पटल पर ले जाने का है।
  • उत्तराखंड की लोकसंस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है, और इस अनमोल धरोहर को सहेजने के लिए प्रियांशु पैन्यूली ने अपनी पूरी क्षमता और संसाधन इस फिल्म में झोंक दिए हैं। उन्होंने जागर फिल्म में उत्तराखंड के कलाकारों और कई लोक पारंपरिक वाद्य यंत्रों के वाजकों को इस फिल्म में समलित किया है। इस फिल्म को बनाने में उत्तराखंड सरकार ने भी हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया है।
” जागर” एक मात्र फिल्म नहीं, बल्कि हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है।
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