HTML tutorial

वनाग्नि रोकथाम हेतु प्रशिक्षण व मॉक अभ्यास आयोजितवनाग्नि रोकथाम हेतु प्रशिक्षण व मॉक अभ्यास आयोजित

Pahado Ki Goonj

वनाग्नि रोकथाम हेतु प्रशिक्षण व मॉक अभ्यास आयोजितवनाग्नि रोकथाम हेतु प्रशिक्षण व मॉक अभ्यास आयोजित
ग्रीष्मकाल के दौरान होने वाली वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से वनाग्नि रोकथाम संबंधी प्रशिक्षण/कार्यशाला एवं मॉक अभ्यास विभिन्न तिथियों में आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 11 मार्च 2026 को विकासखंड परिसर नौगांव में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट साधु लाल तथा वन क्षेत्राधिकारी नौगांव रेंज गोविंद सिंह भंडारी की उपस्थिति में अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट की रंवाई, मूंगरसित, नौगांव, कुथनौर और यमुनोत्री रेंज तथा उत्तराखंड वन निगम टोंस पुरोला अनुभाग बड़कोट से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण के दौरान मॉक अभ्यास के माध्यम से आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई। इस प्रशिक्षण एवं मॉक अभ्यास में वन विभाग के अलावा अन्य विभागों के लगभग 70 अधिकारियों और कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने वनाग्नि से निपटने और आपदा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, उत्तरकाशी के मास्टर ट्रेनर मस्तान भंडारी ने आपदा से संबंधित जानकारी देते हुए खोज एवं बचाव उपकरणों, सैटेलाइट फोन के उपयोग तथा राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के संपर्क सूत्रों के बारे में बताया। उन्होंने 108 और 112 जैसे आपातकालीन नंबरों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
एसडीआरएफ के एसआई आनंद मेहता और आरक्षी बलवंत सिंह ने वनाग्नि की स्थिति में घायलों के रेस्क्यू तथा उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
पुलिस संचार विभाग के एएसआई कुलबीर सिंह जयाड़ा ने जंगलों में वायरलेस सेट के माध्यम से सूचना संप्रेषण तथा उनके इंस्टॉलेशन से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्रदान की।
फायर सर्विस के अग्निशमन अधिकारी सूरत सिंह चौहान तथा फायर यूनिट इंचार्ज अखिलेश ने घरेलू आग और वनाग्नि की घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वन संपदा को बचाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के प्रयोग की विधि समझाई।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष कुमार ने वनाग्नि के दौरान घायल व्यक्तियों को दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा और उपचार संबंधी आवश्यक जानकारी दी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।

ग्रीष्मकाल के दौरान होने वाली वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से वनाग्नि रोकथाम संबंधी प्रशिक्षण/कार्यशाला एवं मॉक अभ्यास विभिन्न तिथियों में आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 11 मार्च 2026 को विकासखंड परिसर नौगांव में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में वन विभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट साधु लाल तथा वन क्षेत्राधिकारी नौगांव रेंज गोविंद सिंह भंडारी की उपस्थिति में अपर यमुना वन प्रभाग बड़कोट की रंवाई, मूंगरसित, नौगांव, कुथनौर और यमुनोत्री रेंज तथा उत्तराखंड वन निगम टोंस पुरोला अनुभाग बड़कोट से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण के दौरान मॉक अभ्यास के माध्यम से आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की प्रक्रिया भी समझाई गई। इस प्रशिक्षण एवं मॉक अभ्यास में वन विभाग के अलावा अन्य विभागों के लगभग 70 अधिकारियों और कार्मिकों ने प्रतिभाग किया।
प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने वनाग्नि से निपटने और आपदा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, उत्तरकाशी के मास्टर ट्रेनर मस्तान भंडारी ने आपदा से संबंधित जानकारी देते हुए खोज एवं बचाव उपकरणों, सैटेलाइट फोन के उपयोग तथा राज्य और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के संपर्क सूत्रों के बारे में बताया। उन्होंने 108 और 112 जैसे आपातकालीन नंबरों की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
एसडीआरएफ के एसआई आनंद मेहता और आरक्षी बलवंत सिंह ने वनाग्नि की स्थिति में घायलों के रेस्क्यू तथा उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
पुलिस संचार विभाग के एएसआई कुलबीर सिंह जयाड़ा ने जंगलों में वायरलेस सेट के माध्यम से सूचना संप्रेषण तथा उनके इंस्टॉलेशन से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्रदान की।
फायर सर्विस के अग्निशमन अधिकारी सूरत सिंह चौहान तथा फायर यूनिट इंचार्ज अखिलेश ने घरेलू आग और वनाग्नि की घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए वन संपदा को बचाने के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के प्रयोग की विधि समझाई।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष कुमार ने वनाग्नि के दौरान घायल व्यक्तियों को दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा और उपचार संबंधी आवश्यक जानकारी दी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं के दौरान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा।

You May Like