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देहरादून 21 जनवरी, 2026
मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में सिंचाई विभाग द्वारा निर्माणाधीन जमरानी एवं सौंग बांध परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने दोनों महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की एवं दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्ट्स को समय पर पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने जमरानी बांध बहुद्देेश्यीय परियोजना सौंग बांध पेयजल परियोजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए सिंचाई विभाग को परियोजना निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध सभी निविदा एवं आवश्यक अन्य प्रक्रियाएं समय पर पूर्ण कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण परियोजना का फ्लो चार्ट तैयार कर प्रत्येक चरण को निर्धारित समय पर पूर्ण कराया जाए। मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों में तेजी लाए जाने हेतु आवश्यक सामग्री की उपलब्धता को बढ़ाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए आवश्यक फर्स्ट पार्टी, सेकंड पार्टी एवं थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल एवं मूल्यांकन भी नियमित तौर पर कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
(जीतमणि पैन्यूली संपादक ७९८३८२५३३६ )
मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं से प्रभावितों के पुनर्वास कार्य पर समयबद्धता एवं तत्परता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने प्रभावितों को मुआवजा, पुनर्वास और आबंटन का कार्य आपसी तालमेल और विश्वास में लेकर किया जाए इसके लिए लगातार संवाद जारी रखे जाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर सचिव सिंचाई श्री युगल किशोर पंत ने बताया कि जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना की कुल लागत ₹ 3678.23 करोड़ है। इस परियोजना को जून 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सौंग बांध परियोजना 130.60 मीटर ऊंचा, 150 एमएलडी की गुरुत्व आधारित पेयजल परियोजना है, जिसकी लागत ₹ 2524.42 करोड़ है। इसके निर्माण कार्य नवम्बर 2029 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष सिंचाई श्री सुभाष चंद्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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*बिल्ड बैक बैटर के लक्ष्य को ध्यान में रखें विभाग-सुमन*
*सचिव आपदा प्रबंधन ने की सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत विभागीय प्रगति की समीक्षा*
*एक सप्ताह में एक्शन प्लान बनाने के दिए निर्देश*
देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा सेंडई फ्रेमवर्क के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में उन्होंने सेंडई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी विभागों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने विभाग का एक्शन प्लान प्रस्तुत करने को कहा।
समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क आपदाओं से होने वाली जनहानि, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा बुनियादी सेवाओं और महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक वैश्विक रूपरेखा प्रदान करता है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य के सभी विभागों को अपनी विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी तथा प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी।
श्री सुमन ने कहा कि सेंदाई फ्रेमवर्क की पहली प्राथमिकता आपदा जोखिम को समझना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपदा से संबंधित आंकड़ों का व्यवस्थित संग्रह, विश्लेषण एवं उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत आपदाओं से हुई क्षति का वैज्ञानिक मूल्यांकन, सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं सांस्कृतिक विरासत पर पड़ने वाले प्रभावों की समझ, प्रशिक्षण एवं शिक्षा के माध्यम से सभी हितधारकों की क्षमता वृद्धि तथा वैज्ञानिक ज्ञान के साथ स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभवों के समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरी प्राथमिकता, आपदा जोखिम प्रबंधन को सुदृढ़ करना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा। भूमि उपयोग, शहरी नियोजन, भवन निर्माण संहिता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित नियमों को सुदृढ़ करते हुए उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही जनपद एवं राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित संस्थागत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
तीसरी प्राथमिकता आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कम करने हेतु योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। विकास योजनाओं में आपदा जोखिम मूल्यांकन, मानचित्रण एवं प्रबंधन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा तथा राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं और सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियाँ अपनाई जाएंगी। साथ ही स्थानीय, जनपद एवं राज्य स्तर पर जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाने वाले विभागों एवं संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चैथी प्राथमिकता आपदा के प्रति तैयारी तथा प्रभावी प्रतिक्रिया एवं पुनर्निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि आपदा पूर्व तैयारी, जन-जागरूकता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा तकनीकी एवं लॉजिस्टिक क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक है। आपदा पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को अपनाते हुए भविष्य की आपदाओं के प्रति जोखिम को कम किया जाएगा। इसके अंतर्गत बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा चेतावनी के समयबद्ध और प्रभावी प्रसार पर भी बल दिया गया।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। विभागीय परिसंपत्तियों एवं अवसंरचनाओं पर संभावित खतरों का आकलन, जोखिम कम करने हेतु योजनाओं का विकास एवं क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, प्रशिक्षण, शोध एवं क्षमता विकास को प्राथमिकता दी जाए। सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से एक सुदृढ़ एवं समग्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण तंत्र विकसित किया जाएगा।
बैठक में वरिष्ठ आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डाॅ. पीडी माथुर ने बताया गया कि सेंडई फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों में आपदाओं से होने वाली मृत्यु दर में कमी, प्रभावित लोगों की संख्या में कमी, सकल घरेलू उत्पाद के सापेक्ष आर्थिक क्षति में कमी, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी सेवाओं तथा महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान में कमी तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाने वाले विभागों की संख्या में वृद्धि शामिल है।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
*सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत क्या-क्या किया जाना है:-*
👉 प्रत्येक विभाग द्वारा विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
👉 सभी प्रमुख आपदाओं के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया एवं कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा।
👉 प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।
👉 जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
👉 सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को शामिल किया जाएगा।
👉 विभागीय परिसंपत्तियों का खतरा, जोखिम, संवेदनशीलता एवं क्षमता आकलन किया जाएगा।
👉 सभी भवनों, संरचनाओं एवं अवसंरचनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
👉 सभी परिसंपत्तियों की GIS आधारित मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित तथा असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
👉 भवन उपविधि, सुरक्षा मानक, भूमि उपयोग एवं क्षेत्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन।
👉 भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग, बाढ़ एवं भूस्खलन जोनिंग को योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
👉 राज्य, जिला एवं विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
👉 सुरक्षा ऑडिट के आधार पर कमजोर अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा।
👉 सभी नई परियोजनाओं में बहु-आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को अपनाया जाएगा।
👉 रिटेनिंग वॉल, तटबंध, शेल्टर, बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जाएगा।
👉 सभी विभागों द्वारा पूर्व चेतावनी संदेश प्राप्त एवं प्रसारित करने की व्यवस्था की जाएगी।
👉 राहत शिविर, सुरक्षित खुले स्थल, निकासी मार्गों की पहचान एवं मैपिंग की जाएगी।
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23 जनवरी को बारिश एवं बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट*
*सचिव आपदा प्रबंधन ने जनपदों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश*
*मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनपदों के साथ बैठक*
देहरादून। मौसम विभाग द्वारा दिनांक 23 जनवरी को उत्तराखंड में बारिश एवं बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर एवं पिथौरागढ़ जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट, जबकि देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, अल्मोड़ा एवं नैनीताल जनपदों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। चेतावनी को दृष्टिगत रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए मा0 मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बुधवार को सभी संबंधित जनपदों के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में संभावित बारिश, बर्फबारी, पाला, शीतलहर एवं उससे उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के मद्देनजर जनपदों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सचिव श्री सुमन ने सभी जनपदों को निर्देशित किया कि मौसम खराब रहने की संभावना के दौरान अत्यधिक सतर्कता बरती जाए तथा सभी कार्यदायी एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। विशेष रूप से पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, पशुपालन एवं नगर निकाय विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए। गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सचिव ने निर्देश दिए कि संवेदनशील, दूरस्थ एवं उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित प्रसव के लिए पूर्व से ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। आवश्यकता पड़ने पर समय रहते गर्भवती महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए तथा एंबुलेंस सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए।
बर्फबारी के कारण मार्ग अवरुद्ध होने की आशंका को देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि संवेदनशील एवं उच्च हिमालयी मार्गों पर जेसीबी, स्नो कटर एवं अन्य आवश्यक मशीनरी की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोलना सुनिश्चित किया जाए, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।
फिसलन एवं दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने के लिए श्री सुमन ने पाला प्रभावित क्षेत्रों में नमक एवं चूने के छिड़काव के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी जनपद संवेदनशील सड़कों, पुलों एवं पैदल मार्गों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित या अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाए।
ठंड से बचाव के लिए सचिव ने निर्देश दिए कि सार्वजनिक स्थलों एवं जरूरतमंद क्षेत्रों में अलाव की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों एवं अधिक ठंड प्रभावित इलाकों में रेनबसेरों में बिजली, पेयजल, पर्याप्त बिस्तर, हीटर तथा पानी गर्म करने की रॉड जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि ठंड के दौरान कोई भी व्यक्ति असुरक्षित न रहे।
पशुधन की सुरक्षा पर जोर देते हुए सचिव ने निर्देश दिए कि पशुओं को ठंड, बर्फबारी एवं पाले से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएं। इसके अंतर्गत पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, चारे एवं पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
इसके साथ ही सचिव ने निर्देश दिए कि जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को कंबल का वितरण समय से सुनिश्चित किया जाए तथा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को दी जाए तथा जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष 24×7 सक्रिय रखे जाएं।
इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ आदि मौजूद थे।
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जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सुशासन का प्रभावी मॉडल*
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम आम जनता तक शासन की सीधी पहुँच का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। आज 21 जनवरी 2026 तक प्रदेश के सभी जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 427 कैम्पों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें 3 लाख 44 हजार 85 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की है। यह आंकड़े राज्य सरकार की जन-केंद्रित कार्यशैली और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
इन कैम्पों के माध्यम से प्रदेशभर से कुल 35,079 शिकायत पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 23,844 शिकायतों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उस नीति का प्रमाण है, जिसमें समस्याओं को केवल सुनना ही नहीं, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा नागरिकों को त्वरित सेवाएँ प्रदान करते हुए 46,901 आवेदन प्रमाण पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं हेतु प्राप्त किए गए, जिन पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। साथ ही राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1,86,795 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभान्वित किया गया, जो सरकार की समावेशी विकास नीति को दर्शाता है।
जनपदवार आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो अल्मोड़ा में 50 कैम्पों के माध्यम से 46,035 नागरिकों की सहभागिता दर्ज हुई, वहीं हरिद्वार में 36 कैम्पों में 66,862 लोगों ने भाग लिया। उधम सिंह नगर में 28 कैम्पों के माध्यम से 33,382 प्रतिभागी जुड़े, जबकि टिहरी जनपद में 25 कैम्पों के माध्यम से 41,889 नागरिकों तक सरकार की पहुँच बनी।
देहरादून, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, चम्पावत, बागेश्वर एवं उत्तरकाशी सहित सभी जनपदों में समान रूप से यह अभियान प्रभावी रहा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास के सेतु के रूप में स्थापित हुआ है। समस्याओं का त्वरित समाधान, सेवाओं की सरल उपलब्धता और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना—यह सब इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड सरकार सुशासन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रही है।
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच, संवेदनशील नेतृत्व और जनसेवा के प्रति दृढ़ संकल्प का जीवंत उदाहरण बन चुका है।


