सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय
भारत सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय, साउथ ब्लॉक, रायसीना हिल,
नई दिल्ली-110011
विषयः पंजाब नेशनल बैंक, शाखा भानियावाला, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड के प्रबंधक एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी, अनियमितताओं, आर्थिक शोषण एवं अवैध कब्जे के विरुद्ध शिकायत याचिका तथा पीड़ित परिवार को न्याय एवं जीवन रक्षा हेतु अनुरोध ।
मान्यवर,
मैं, देवेश्वर काला, पुत्र स्वर्गीय सालिक राम काला, निवासी ग्राम जोगीवालामाफी पोस्ट छिददरवाला, तहसील ऋषिकेश, जनपद देहरादून, उत्तराखंड, मोबाइल नंबरः 8006608737 एवं 7017804400, आधार कार्ड नंबरः 591567044077, आपके समक्ष इस शिकायत याचिका के माध्यम से अपनी पीड़ा एवं अन्याय का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कर रहा हूं। यह याचिका भारतीय संविधान, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी), बैंकिंग विनियमन अधि अधिनियम, 1949, सुरक्षितीकरण एवं वित्तीय संपत्तियों के पुनर्निर्माण तथा सुरक्षा हितों का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (सरफेसी एक्ट), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिशानिर्देशों एवं अन्य संबंधित कानूनों, धाराओं, अनुच्छेदों, उपबंधों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए तैयार की गई है। मैंने इस मामले में डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) एवं हाई कोर्ट में केस दायर किए हैं, फिर भी बैंक द्वारा अवैध कार्यवाही जारी है, जो न्यायालय की अवमानना के समान है।
तथ्यों का विस्तृत विवरणः
सन् 2017 में मैंने पंजाब नेशनल बैंक, शाखा भानियावाला, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड से खाता संख्या 723200NC00000045 एवं 7232009900000011 के माध्यम से कुल 19.50 लाख रुपये +25 लाख रुपये (कुल 44.50 लाख रुपये) का ऋण प्राप्त किया था। मैंने समय पर किश्तें जमा कीं एवं कुल 26 लाख रुपये जमा कर दिए थे। हालांकि, बैंक प्रबंधक द्वारा की गई अनियमितताओं, जैसे खाते में हेराफेरी, मानकों से छेड़छाड़ एवं अधिक ब्याज लगाने के कारण खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया। कोरोना काल (2020) में आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार ऋण मोरेटोरियम की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन बैंक ने इसका लाभ नहीं दिया एवं मेरे खाते को प्रभावित होने दिया।
बैंक प्रबंधक ने मेरी जानकारी एवं सहमति के बिना एक अतिरिक्त फर्जी ऋण मेरे खाते में जोड़ दिया, जिसे उन्होंने रिश्वत के रूप में काट लिया। इसके अलावा, प्रॉपर्टी डीलर से मिलीभगत कर मेरी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया गया। मेरी अनुपस्थिति में पुलिस प्रशासन के सहयोग से यह कार्यवाही की गई, जो पूर्णतः गैरकानूनी है। मेरे परिवार को आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है, जिससे हम डिप्रेशन में हैं एवं आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं। मैंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड), वित्त मंत्री, विधायक, सांसद, आरबीआई एवं अन्य अधिकारियों को अनेक पत्र भेजे हैं।
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कानूनी उल्लंघनों का विश्लेषण, व्याख्या, उदाहरण सहित विवरणः
इस मामले में बैंक एवं संबंधितों द्वारा निम्नलिखित कानूनों का उल्लंघन किया गया है। प्रत्येक का विस्तृत विश्लेषण, व्याख्या एवं उदाहरण नीचे दिया गया है, जो मेरी याचिका को मजबूत बनाते हैं:-
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी एवं शोषणः
धारा 415 एवं 420 (धोखाधड़ी एवं धोखे से संपत्ति प्राप्त करना): धारा 415 के अनुसार, कोई व्यक्ति
किसी अन्य को धोखा देकर उसकी संपत्ति प्राप्त करे या नुकसान पहुंचाए, तो यह धोखाधड़ी है। धारा 420 में इसका दंड 7 वर्ष तक की कैद एवं जुर्माना है।
विश्लेषण एवं व्याख्याः बैंक प्रबंधक ने मेरे खाते में फर्जी ऋण जोड़कर एवं हेराफेरी कर मुझे धोखा दिया, जिससे मेरी संपत्ति पर कब्जा हुआ। यह स्पष्ट धोखाधड़ी है, क्योंकि मेरी सहमति नहीं ली गई। उदाहरणः पंजाब नेशनल बैंक स्कैंडल (नीरव मोदी केस) में इसी धारा के तहत मुकदमा चला, जहां बैंक अधिकारियों ने धोखे से ऋण जारी किए।
धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) यदि कोई व्यक्ति किसी की संपत्ति का विश्वासघात करे, तो 3
वर्ष तक की कैद। विश्लेषणः बैंक ने मेरे जमा 26 लाख रुपये को सही तरीके से एडजस्ट नहीं किया एवं फर्जी ऋण जोड़ा। उदाहरणः बैंक कर्मचारी द्वारा ग्राहक के पैसे का दुरुपयोग करने के मामलों में यह धारा लागू होती है।
धारा 465, 467, 468 (जालसाजी) : धारा 467 में दस्तावेजों में जालसाजी के लिए आजीवन कारावास तक दंड। व्याख्याः बैंक ने मेरे खाते के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की, जो जालसाजी है। उदाहरणः फर्जी हस्ताक्षर से ऋण जारी करने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को दंडित किया।
धारा 120बी (षड्यंत्र): कई व्यक्तियों द्वारा अपराध करने का षड्यंत्र। विश्लेषणः बैंक प्रबंधक, प्रॉपर्टी डीलर एवं पुलिस का मिलीभगत स्पष्ट है। उदाहरणः कोऑपरेटिव बैंक घोटालों में यह धारा प्रयोग की जाती है।
धारा 506 (आपराधिक धमकी): शोषण एवं प्रताड़ना के लिए। व्याख्याः बैंक की कार्यवाही से परिवार को मानसिक यातना। उदाहरणः ऋण वसूली में धमकी देने के मामलों में लागू।
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) :
धारा 154 (एफआईआर पंजीकरण): पुलिस को अपराध की सूचना पर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। विश्लेषणः मैंने पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं, इसलिए धारा 156 (3) के तहत मजिस्ट्रेट से आदेश मांगा जा सकता है। उदाहरणः ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) में सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य एफआईआर का आदेश दिया।
धारा 200-204 (निजी शिकायत): यदि पुलिस न सुने, तो मजिस्ट्रेट में शिकायत। व्याख्याः मेरी शिकायतों की अनदेखी पर लागू।
नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी):
आदेश 39 नियम 1-2 (अस्थायी निषेधाज्ञा): संपत्ति पर अवैध कब्जे के विरुद्ध। विश्लेषणः हाई कोर्ट में मेरे केस में स्टे प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरणः संपत्ति विवादों में अदालतें Status Quo बनाए रखती।
सरफेसी एक्ट, 2002 (एनपीए वसूली) :
धारा 13(2): एनपीए घोषणा के बाद 60 दिन की नोटिस । विश्लेषणः बैंक ने फर्जी तरीके से एनपीए घोषित किया, नोटिस में तथ्य छुपाए। धारा 13 (4) के तहत कब्जा अवैध, क्योंकि पुलिस का दुरुपयोग। व्याख्याः एक्ट का उद्देश्य तेज वसूली है, लेकिन उचित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य। उदाहरणः मेरा केस बनाम आईडीबीआई बैंक (2020) में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जे को रद्द किया, क्योंकि मोरेटोरियम उल्लंघन ।
धारा 17: डीआरटी में अपील। विश्लेषणः मेरा केस डीआरटी में है, लेकिन बैंक कार्यवाही जारी रख रहा, जो अवमानना है।
आरबीआई दिशानिर्देश (कोविड मोरेटोरियम):
आरबीआई ने 27 मार्च 2020 को 3 महीने (मार्च-मई 2020) का मोरेटोरियम घोषित किया, बाद में विस्तारित । ब्याज लगता है, लेकिन एनपीए वर्गीकरण नहीं। विश्लेषणः बैंक ने इसका उल्लंघन कर एनपीए बनाया एवं अधिक ब्याज लगाया। उदाहरणः स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2021) में सुप्रीम कोर्ट ने मोरेटोरियम उल्लंघन पर राहत दी।
बैंकिंग लोकपाल योजनाः बैंक शिकायत के बाद cms.rbi.org.in पर शिकायत । व्याख्याः मैंने ऐसा किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेदः
अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानताः बैंक की मनमानी असमानता है। विश्लेषणः सभी ग्राहकों को समान व्यवहार, लेकिन मेरे साथ भेदभाव। उदाहरणः मेनका गांधी केस (1978) में उचित प्रक्रिया पर जोर।
अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार): शोषण से जीवन गरिमा प्रभावित । व्याख्याः आर्थिक यातना आत्महत्या की ओर धकेल रही। उदाहरणः ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम (1985) में जीवन अधिकार में आजीविका शामिल।
अनुच्छेद ३००ए (संपत्ति से वंचित न करना) केवल कानून द्वारा। विश्लेषणः अवैध कब्जा उल्लंघन । उदाहरणः केशवानंद भारती केस में संपत्ति अधिकार संरक्षित ।
अनुच्छेद 23-24 (शोषण के विरुद्ध अधिकार): जबरन श्रम एवं शोषण निषेध। व्याख्याः आर्थिक शोषण इसके अंतर्गत ।
प्रार्थना (राहत की मांग) :
बैंक प्रबंधक एवं संबंधितों के विरुद्ध आईपीसी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच कराएं।
सरफेसी एक्ट उल्लंघन पर संपत्ति कब्जा रद्द करें एवं मूल स्थिति बहाल करें।
फर्जी ऋण रद्द करें, अधिक ब्याज माफ करें एवं जमा राशि एडजस्ट करें।
पुलिस एवं बैंक की मिलीभगत की सीबीआई जांच।
परिवार को मुआवजा एवं सुरक्षा प्रदान करें।
यदि कोई हानि हुई, तो बैंक एवं अधिकारियों जिम्मेदार ।
यह मेरी अंतिम याचिका है। कृपया तत्काल कार्रवाई करें, अन्यथा परिवार आत्महत्या करने पर मजबूर होगा।
भवदीय
दिनांकः 27 अगस्त 2025
(देवेश्वर काला)
पुत्र स्व० सालिक राम काला ग्राम जोगीवालामाफी पोस्ट छिददरवाला तहसील ऋषिकेश जनपद देहरादून-249204 उत्तराखण्ड
मो.नं. 8006608737


