रविवार को विश्व योग दिवस

देहरादून। योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है. इसे ही अगर दूसरे शब्‍दों में कहें तो योग सही तरह से जीने का विज्ञान है। इसमें शरीर, मन और आत्मा एक साथ आ जाते हैं। योग शब्‍द का अर्थ होता है, ‘बांधना’. योग शब्‍द संस्‍कृत के एक शब्‍द ‘युज’ से बना है। ‘युज’ का मतलब होता है जुड़ना। 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में धूमधाम से मनाया गया। इस दिन करोड़ों लोगों ने विश्व में जो योग किया वो एक रिकॉर्ड था। इस बार भी योग दिवस पूरे तरीके से मनाया जाएगा। योग व्यायाम का ऐसा प्रभावशाली प्रकार है, जिसके माध्यम से न केवल शरीर के अंगों बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा में संतुलन बनाया जाता है। यही कारण है कि योग से शा‍रीरिक व्याधियों के अलावा मानसिक समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है।हिमालय की गोद में बसा भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक उत्तराखंड एक ऐसी भूमि है, जो आश्चर्यजनक प्राकृतिक सुंदरता से संपन्न है। इसे अपने मंदिरों और तीर्थस्थलों के कारण भगवान की भूमि भी कहा जाता है। यह स्वाभाविक है कि ऐसा निर्मल स्थान योग की प्राचीन कला का घर होगा और इसके शुद्ध और प्राचीन वातावरण के बीच योग से संबंधित कार्यक्रम होते हैं। योग की भूमि उत्तराखंड आपके शरीर के लिए एकदम सही जगह है जहां आपको शांति, आराम महसूस होगा। आप तरोताजा महसूस करेंगे। आपके भीतर की नकारत्मकता निकल जाएगी। उत्तराखंड की समृद्ध विरासत और इतिहास प्राचीन और मध्यकालीन युग के बारे में बहुत कुछ जाना और लिखा गया है। भारत योग और ध्यान के लिए एक आदर्श गंतव्य रहा है। लोगों को एक स्वस्थ जीवन शैली चुनने और उनके तनाव से छुटकारा पाने में मदद करता है, तो वहीं मेडिटेशन के साथ योग और आयुर्वेद दोनों ही शेड्यूल की सेटिंग के माध्यम से मानसिक और शारीरिक रूप से आराम प्राप्त करने में सहायता करते हैं। इसमें विशेष आहार, व्यायाम, श्वास अभ्यास, हर्बल उपचार, ध्यान और शारीरिक उपचार शामिल हैं। कई संतों ने दुनिया भर में योग का अभ्यास किया है। इस धरती से हमारा योग विदेशों में चला गया था और धीरे-धीरे योग से योगा में बदल गया। लगभग 20 साल पहले बाबा रामदेव ने योग को विश्व मंच पर अपने मूल स्वरूप में वापस लाने के प्रयास शुरू किए। उत्तराखंड की भूमि ऋषियों की कर्मभूमि रही है। स्वतंत्रता के बाद, उसी धार्मिक भूमि के संतों ने विदेशों में योग फैलाना शुरू किया। उन योगियों में स्वामी शिवानंद, स्वामी राम, स्वामी ओंकारानंद, महेश योगी, योगेश्वर, महेशानंद, राम मूलख आदि प्रोफेसरों एम लाल और श्याम लाल ने भी योग को फैलाने का काम किया।

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