कोरोन संक्रमण से बचने के लिए पुलिस के पास नही पर्याप्त संसाधन

देहरादून। उत्तराखंड के बॉर्डर पर राज्य में आ रहे प्रवासियों की पुलिस स्क्रीनिंग करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दे रही है। ऐसे में पुलिसकर्मी सीधे तौर पर प्रवासियों के संपर्क में आ रहे हैं। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों के पास पीपीई किट नहीं है। पुलिसकर्मी सिर्फ मास्क, फेसगार्ड और दस्घ्ताने पहनकर ही आने वाली गाड़ियों के साथ प्रवासियों की लाइन लगवा कर चेकिंग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिकर्मियों के संक्रमण होने का ज्यादा खतरा हो सकता है।
उत्तराखंड में लगभग 2 लाख 45 हजार प्रवासियों ने राज्य में आने के लिए पंजीकरण करवाया है। इनमें से करीब एक से डेढ़ लाख प्रवासी राज्य में आ चुके हैं। साथ ही इनमें से ही सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव के मरीज सामने आये हैं। प्रदेश में लगातार प्रवासी आ रहे हैं और राज्य के बॉर्डर चेक पोस्ट पर पुलिसकर्मी ही चेकिंग भी कर रहे हैं। पुलिसकर्मी जो सबसे नजदीक से इन प्रवासियों से संपर्क कर रहे हैं, उनके पास पीपीई किट नहीं हैं. हालांकि, बॉर्डर पर मेडिकल स्टाफ और कुछ पुलिसकर्मियों के पास पीपीई किट जरूर है पर ज्यादातर पुलिसकर्मियों के पास जो बॉर्डर पर चेकिंग कर रहे हैं उनके पास किट नहीं है. ऐसे में इनके संक्रमण होने का ज्यादा खतरा है।
डीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अशोक कुमार के मुताबिक, जो सीधे तौर पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं उनको पीपीई किट दिया जा रहा है। इसके साथ ही बाकी पुलिसकर्मियों को मास्क, सेनिटाइजर, फेसगार्ड और हैण्ड गलब्स दिए गए हैं। साथ ही पूरी सावधानी बरती जा रही है। वहीं, बॉर्डर पर मौजूद पुलिसकर्मी का कहना है कि पूरे दिन में तीन बार शिफ्ट चेंज होती है और ऐसे में 36 पीपीई किट की आवश्यकता पड़ती है।

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