अब इनका क्या करें ,ये कवि अब्दुल गफ्फार हैं

#अब_इनका_क्या_करे..?

#ये_कवि_अब्दुल_गफ्फार_है

शंख बजा है महा समर का, वीरों की मच धूम रही..
धूर्त लोमड़ी लिए निमंत्रण, जंगल जंगल घूम रही..

सांप, नेवले, बंदर, भालू, राग भैरवी गा बैठे..
एक सिंह से डरकर सारे, इक पंगत में आ बैठे..

इसीलिए सबसे कहता हूं,सोच समझकर आना है….
हमको अपने सपनों वाला हिंदुस्तान बचाना है…..

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एक, वंश का ध्रुव सितारा, केवल बांह चढ़ाता है..
देखो भैया-देखो भैया कहके क़दम बढाता है..

वो हरदम नौटंकी करता, करता नहीं हारता है..
उसे वोट क्या देना जो संसद में आंख़ मारता है..

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एक शख़्स ऐसा है जिसमें संस्कार का नाम नहीं..
टोंटी चोरी, छीना,झपटी सिवा कहीं कुछ काम नहीं..

इसको अपना चाचा, ताऊ, भाई, कोय नहीं भाया…
ये शातिर तो वृद्ध पिता की साइकिल तक छीन लाया…

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एक भुवाजी बिना तवे के अपनी रोटी सेक रही..
लोग रात को सपने देखे, ये दिन में ही देख़ रही..

भ्रष्टाचारी नक़दी पाकर अटल अड़ी है छाती पर..
जातिवाद का झंडा लेकर, ख़ड़ी हुई है हाथी पर..

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एक “आप” का ढ़ोंगी चहरा मफ़लर बाज शिकारी है..
येन-केन-प्रकरेण चाहता, वोटों का व्यापारी है..

अन्ना के सिद्धांत सभी अब उसको सपने लगते हैं…
भारत राष्ट्र तोड़ने वाले, उसको अपने लगते हैं…

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एक मुई कलकत्ते वाली रातों में भी जगती है..
बंग्लादेसी घुसपैठी की असल भुवाजी लगती है..

वो यदि दिल्ली आय गई तो, नीयत साफ़ जना देगी..
पूरा भारत देश हमारा, बंग्लादेश बना देगी..

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इसीलिए कहता हूं सबसे ध्यान लगाकर बात सुनो..
सिर्फ़ नहीं है मेरे, पूरे भारत के जज़्बात सुनो..

वोट उसे दो जिसके आगे हर दुश्मन थर्राता है…
वोट उसे दो जिसका चर्चा परदेसों तक जाता है…

वोट उसे दो जिसने ताक़त का प्रयोग भरपूर किया..
पाकिस्तानी हुक्कामों को झुकने पर मजबूर किया..

वोट उसे दो जिसके कारण उत्पाती भय खाते हैं…
रोज़ जनाज़ा उठता है,आतंकी मारे जाते हैं…

वोट उसे दो जिसके कारण भारत का बल जाग गया..
डोकलाम से पूंछ दबाकर,धूर्त चायना भाग गया..

वोट उसे दो जिसकी ताक़त सकल विश्व पहचान रहा…
अमरीका भी हाथ जोड़कर जिसको जीजा मान रहा…

सोन चिरैया के स्वरूप को अब फ़िर से चमकाना है
हमको अपने सपनों वाला हिंदुस्तान बचाना है…..

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