लाॅकडाउनः:धरती का कंपन 30 से 50 प्रतिशत तक हुआ कम

वाशिंगटन। कोरोना संकट के बीच अधिकांश देशों में या तो लॉकडाउन है अथवा लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने के आदेश हैं। ऐसे में करीब चार अरब की आबादी वाली आधी दुनिया घरों में बंद है। परिवहन व उद्योग धंधों की रफ्तार भी थमी है।
इन सबके चलते भूगर्भ वैज्ञानिकों ने पाया कि यह शांति धरती की ऊपरी परत पर कंपन का स्तर बड़ी मात्रा में घटा रही है। बेल्जियम में रॉयल ऑब्जर्वेटरी के भूविज्ञानी थॉमस लेकोक ने कहा, ये कंपन बसों, कारों, ट्रेनों या फैक्ट्रियों के चलने से पैदा होते हैं। अकेले ब्रुसेल्स में ही मार्च में धरती का कंपन 30 से 50ः तक कम दर्ज हुआ। अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है कि पृथ्वी ग्रह के चार अरब लोगों ने अपनी गतिविधियां रोक दी हैं। इसका असर यह हुआ है कि भूकंप विज्ञानी इस वक्त छोटी से छोटी भूगर्भीय हलचल का भी पता लगा सकते हैं। लेकोक ने कहा, यह सब कम शोर से संभव हो पाया है।बेल्जियम स्थित रॉयल ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक, भूकंप वैज्ञानिक (सीस्मोलॉजिस्ट) धरती के कंपनों का पता लगाने के लिए जमीन के अंदर बने केंद्रों का उपयोग करते हैं। लेकिन, वर्तमान में धरती में स बात का निर्धारण किया जा सकता है कि किस देश के लोग लॉकडाउन के नियमों का ज्यादा पालन कर रहे हैं।छाई शांति के कारण इसे बाहर से भी उतनी ही अच्छी तरह सुना जा रहा है जितनी अच्छी तरह ये नीचे सुनाई देती हैं। भूगर्भ विज्ञानी लेकोक ने कहा कि धरती के ऊपरी परत के कंपन में आई कमी यह दर्शाता है कि पूरी दुनिया में लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धरती के कंपन में आई कमी के आंकड़ों से इ

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