विकास दुबे की मौत की जांच वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

नई दिल्ली |सुप्रीम कोर्ट में आज (मंगलवार) को विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत की जांच की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें से एक विकास को कानपुर के पास गोली मारने से एक घंटे पहले दायर किया गया था। मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल ने भी इस संबंध में एक याचिका दायर की है।
ई-मेल के माध्यम से 11 जुलाई की सुबह दायर की गई याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी कि मध्य प्रदेश में 10 जुलाई की सुबह गिरफ्तार किए गए दुबे को पुलिस फर्जी मुठभेड़ में न मार सके। मुख्य न्यायाधीश एस.ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ इस मांग पर भी विचार करनेवाली है कि सीबीआई द्वारा दुबे के पांच सहयोगियों की कथित मुठभेड़ में हत्या की जांच की निगरानी शीर्ष अदालत करे। डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में उस समय घात लगाकर हत्या कर दी गई जब वे दुबे को गिरफ्तार करने के लिए जा रहे थे। हमलावरों ने 3 जुलाई की आधी रात को छतों से गोलियां बरसा कर इन पुलिसकर्मियों को मार दिया था। दुबे 10 जुलाई की सुबह उस समय पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, जब उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रही पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और दुबे ने भागने की कोशिश की। दुबे की मुठभेड़ से पहले, उसके पांच साथी अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए। दुबे के मारे जाने से पहले याचिका दायर करने वाले वकील घनश्याम उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस से गैंगस्टर की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश मांगा था। बाद में, दिल्ली के एक वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने एक और याचिका दायर की, जिसने उत्तर प्रदेश में 8 पुलिस कर्मियों की हत्या में पुलिस-अपराधी-राजनेता की साठगांठ की सीबीआई या एनआईए द्वारा जांच की अदालत से निगरानी की मांग की है। शीर्ष अदालत में मंगलवार को उपाध्याय, अवस्थी और इस मामले से संबंधित एक अन्य याचिका पर सीजेआई के नेतृत्व वाली पीठ द्वारा सुनवाई की जाएगी। इन याचिकाओं के अलावा, उस पुलिस अधिकारी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है, जिस पर आरोप है कि उसने दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम का खुफिया जानकारी दुबे के लोगों तक पहुंचाई थी। इस आरोप में उसे निलंबित किया जा चुका है और उसे पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मारे जाने का डर सता रहा है। उनकी पत्नी विनीता सिरोही के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि उनके पति कृष्ण कुमार शर्मा को “अवैध और असंवैधानिक तरीकों” से मारा जा सकता है।

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