उत्तराखंड सरकार के शासकीय प्रबक्ता की प्रेस वार्ता के साथ अन्य खबरें पढें

देहरादून,जनपदों से ली गई सूचना के अनुसार जनपद देहरादून में हल्की वर्षा हो रही है, शेष जनपदों में बादल छाए हुए हैं।

ऋषिकेश-केदारनाथ राष्ट्रीयमार्ग गुप्तकाशी से आगे मलवा आने से जो मार्ग अवरुद्ध हो गया था वह खुल गया है।

ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पीपलकोटी के समीप मलवा आने से अवरुद्ध है वहां कार्य गतिमान है।पीपलकोटी कुहेड में jcb लगे हैं सड़क खोलने का कार्य गतिमान है।

शेष चार धाम मार्ग खुले हैं।

टनकपुर- पिथौरागढ़ NH-9 दिल्ली बैंड के समीप मलवा आने से अवरुद्ध है। मार्ग को सुचारू करने का कार्य किया जा रहा है।

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देहरादून,प्रदेश के शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि कोविड के प्रभाव से आने वाले प्रवासियों और उत्तराखण्ड राज्य निवासियों को रोजगार देने के लिए एक अम्ब्रेला के नीचे सभी विभागों की रोजगार परक योजना को अधिक आकर्षक और सुविधायुक्त बनाकर लाया गया है।

प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सुविधा और कौशल के अनुसार व्यवसाय चयन करने का रोजगार प्रदान करने का अवसर दिया गया है। अभी तक कुल प्रवासियों की संख्या 3 लाख 27 हजार है, यह संख्या और भी अधिक हो सकती है।

सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जनपद में प्रवासियों के लिए उपयुक्त स्वरोजगार प्रदान करने के लिए जिला उद्योग केन्द्र द्वारा काउंसलिंग की ली जाय और रोजगार प्रदान करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाये। विभिन्न व्यवसायों में विनिर्माण के क्षेत्र में 10 लाख से 25 लाख तक का ऋण 15, 20 और 25 प्रतिशत की सब्सिडी की व्यवस्था की गई है। अभी तक कुल 15109 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में एम.एस.एम.ई. विभाग में 15109 आवेदन में से अल्मोड़ा 1360, बागेश्वर 517, चमोली 847, चम्पावत 478, देहरादून 2682, हरिद्वार 1145, नैनीताल 1876, पौड़ी गढ़वाल 1278, पिथौरागढ़ 570, रूद्रप्रयाग 493, टिहरी गढ़वाल 1361, ऊधमसिंह नगर 1625, उत्तरकाशी 877 प्राप्त हुए हैं।

स्वरोजगार देने के लिए बने होप पोर्टल पर कुल 17653 युवा पंजीकृत हुए हैं। अल्मोड़ा 1574, बागेश्वर 517, चमोली 429, चम्पावत 674, देहरादून 3777, हरिद्वार 688, नैनीताल 1390, पौड़ी गढ़वाल 1616, पिथौरागढ़ 353, रूद्रप्रयाग 2365, टिहरी गढ़वाल 1818, ऊधमसिंह नगर 2066, उत्तरकाशी 388 युवा पंजीकृत हैं। पोर्टल पर 51 नियोजकों द्वारा 966 रिक्तियाँ स्वास्थ्य, आई.टी. और तकनीशियन क्षेत्र में अपलोड की गई हैं।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना डेयरी विभाग में पशुपाल, मत्स्य, डेयरी तथा सहकारिता के विकास हेतु राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना में एकीकृत कृषि सहकारिता परियोजना वित्तपोषित करते हुए डेयरी के 442.62 करोड़ रु0 स्वीकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत सहकारिता विभाग के द्वारा मोटर साईकिल, टैक्सी योजना संचालित की गयी है। प्रमुख पर्यटक स्थलों में पर्यटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए लाभार्थियों को 60 हजार रु0 से 1 लाख 25 हजार तक का ऋण 2 वर्ष के ब्याज मुक्त शर्त के साथ प्रदान किया जायेगा।

उद्यान विभाग के अन्तर्गत कृषकों एवं प्रवासियों हेतु विशेष योजना के अन्तर्गत मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना में सब्जी, आलू और मशाल, बीज, फल-पौध, पुष्प बीज के लिए 50 प्रतिशत अनुदान, कीटनाशक रसायन के लिए 60 प्रतिशत, कूल हाउस के लिए 50 प्रतिशत, रेफ्रिजरेटेड वैन 50 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा। इसके अतिरिक्त छोटी पौधशाला, अखरोट नर्सरी स्थापना 50 प्रतिशत अनुदान, मशरूम उत्पादन एवं विपणन योजना में 50 प्रतिशत अनुदान, मौन पालन में 50 प्रतिशत, उद्यान की घेरबाड़ी मंे 50 प्रतिशत, वर्मी कम्पोस्ट ईकाई में 75 प्रतिशत, उत्तर फसल प्रबन्धन में 50 प्रतिशत, मिशन एप्पल में 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है।

कोरोना काल में उपजे आर्थिक संकट से उबारने के लिए फेरी व्यवसायियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पी.एम. स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि योजना को लाया गया है। पात्र पथ विक्रेताओं को 10 हजार रु0 कार्यशील पूंजी ब्याज अनुदान आधारित आसान ऋण पर उपलब्ध करायी जायेगी। यह नियमित धन वापसी पर आधारित है और डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करती है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना लागू करने के बाद राज्य के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस प्रभाव के अन्तर्गत नवीन सेवा, व्यवसाय तथा सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना कर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा, युवा उद्यमियों, कुशल व अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पियों तथा शिक्षित शहरी व ग्रामीण बेरोजगारों को यथासम्भव उनके आवासीय स्थल के पास रोजगार के अवसर प्राप्त होगा।

इसके अतिरिक्त इस योजना से पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों से नौकरी की खोज में होने वाले पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी।

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देहरादून,मुख्य सचिव  उत्पल कुमार सिंह ने वाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत संचालित परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित परियोजनाओं का यथासमय पूर्ण होने पर अन्य योजनाओं को मंजूरी मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाईयों का निराकरण भी समयबद्वता के साथ किये जाने के निर्देश दिये हैं।
शुक्रवार को मुख्य सचिव सभागार में वाह्य सहायतित परियोजनाओं के तहत विभिन्न विभागों के स्तर पर संचालित परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सभी सम्बन्धित विभाग संचालनाधीन, परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देकर उन्हें पूर्ण करने का प्रयास करें। उन्होंने विकेन्द्रीकृत जलागम विकास परियोजना, बांध पुनर्वास, एकीकृत आजीविका सुधार, वन प्रबंधन एवं पर्यटन के लिये अवस्थापना विकास एवं निवेश कार्यक्रम के क्षेत्र में किये गये कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए अन्य विभागों को उनके द्वारा संचालित की जा रही परियोजनाओं को पूर्ण करने में तेजी लाने को कहा।
बैठक में बताया गया कि वाह्य सहायतित परियोजना के तहत 6818.68 करोड़ की विभिन्न विभागों द्वारा 10 परियोजनाएं संचालित की जा रही है। वन, आजीविका मिशन, जलागम विकास, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, पेयजल, वित्त, पर्यटन, कौशल विकास एवं चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कुल 2257.30 करोड़ लक्ष्य की प्रतिपूर्ति किये जाने के सापेक्ष 1724.92 करोड़ की प्रतिपूर्ति गत वर्ष के अंत तक हो सकी है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि उद्यान, पेयजल, नगर विकास, एम.एस.एम.ई, सिंचाई, पर्यटन एवं लोक निर्माण विभाग से सम्बन्घित विभिन्न योजनाओं के लिये 12906 करोड़ के प्रस्तावों को वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के स्तर पर संस्तुति प्रदान की गई हैं जिसके लिए फण्डिंग एजेंसी की स्वीकृति प्रक्रिया गतिमान है।
मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में शीघ्रता लाये जाने के साथ ही प्रगति के अनुरूप धनराशि की प्रतिपूर्ति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये भी समेकित प्रयास किये जाने चाहिए। उन्होंने योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा किये जाने के भी निर्देश दिए हैं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव श्रीमती मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव  आनन्द वर्द्धन, सचिव वित्त  अमित नेगी, सचिव पर्यटन  दिलीप जावलकर, सचिव श्रीमती सौजन्या,  रणजीत सिन्हा,  एस.ए. मुरूगेशन, अपर सचिव नियोजन मेजर योगेन्द्र यादव, अपर सचिव सुश्री सोनिका, अमिता जोशी, उदय राज सिंह सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

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देहरादून: चार धाम यात्रा 2020
ई -पास

दिनांक- 10 जुलाई शाम तक।
कुल जारी ई पास 577
श्री बदरीनाथ धाम -195
श्री केदारनाथ धाम- 285
श्री गंगोत्री- 66
श्री यमुनोत्री – 31

दिनांक 1 जुलाई – 10 जुलाई शाम तक 2020 तक जारी कुल ई पास
संयुक्त योग 7904

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देहरादून: मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार के माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और प्रबुद्धजनों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कोविड-19 के संदर्भ में राज्य में किए गए कार्यों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 25 जनवरी को हमें पहली बार सूचना मिली कि नेपाल में कोरोना का केस आया है। हमने केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय और गृह मंत्रालय को सूचित किया। भारत-नेपाल सीमा पर चैकसी बरती जाने लगी। वहां से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रिनिंग की गई। 12 मार्च को शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश् दिएा। 15 मार्च को उत्तराखण्ड में पहला केस बाहर से आया। 15 मार्च को होटल, रेस्टोरेंट आदि के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए। 18 मार्च को सरकारी कार्यालयों को कोविड-19 के संबंध में वर्क फ्राॅम होम का निर्देश जारी किया। इसी प्रकार का आदेश निजी कार्यालयों/व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक संस्थानों के लिए भी जारी किया गया। 22 मार्च को जनता कफ्र्यू के दिन से ही प्रदेश में लगातार लाॅकडाउन रखा गया। इस प्रकार लाॅकडाउन लागू करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य था। हमने अपनी पूरे सिस्टम को कोविड से लड़ाई में लगाया। इसमें स्वयं सेवी संस्थाओं और आम जनता का भी पूरा सहयोग मिला। इसका परिणाम भी मिला। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि प्रवासियों ने उत्तराखण्ड में आने की बात कही। हमने निर्णय लिया कि संकट के समय अपने लोगों को ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। हम रेल, बस आदि माध्यमों से लगभग 3 लाख 27 हजार प्रवासी भाईयों को वापस लाए। इनको लाने में सारे हेल्थ प्रोटोकाल का पालन किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 से लड़ाई लम्बी है। हमने डेडिकेटेड कोविड अस्पताल, कोविड केयर सेंटर बनाए। कोविड केयर सेंटर में लगभग 22 हजार बेड उपलब्ध हैं। आवश्यकता से कहीं अधिक स्तर पर हमने तैयारी की। हमने इस दौरान 400 से अधिक डाक्टर भर्ती किए। मेडिकल और पेरा मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया। आज 5 सरकारी और 2 प्राईवेट लेब में कोविड-19 के संक्रमण के सैम्पल की जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त एनसीडी दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ में भी सेम्पल टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। मार्च में हमारे यहां कोरोना संक्रमण की टेस्टिंग सुविधा नहीं थी। आज हमारे पास 20 टूªनेट मशीनें हैं। कुछ और एडवांस मशीनों के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। क्वारेंटाईन सेंटरों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्घ कराई गईं। हमने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरत हो तो होटलों में भी इसकी व्यवस्था की जा सकती है। इस दौरान वेंटिलेटरों की संख्या में काफी वृद्धि की गई। बाईपेप मशीनें बढ़ाईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहर से  3 लाख से अधिक प्रवासी आए। इनको रोजगार मिल सके, इसके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की। ऐसा करने वाला उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है। इसमें 10 से लेकर 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी है। इसमें 150 से अधिक कार्य किए जा सकते हैं। हमने डेरी, कृषि, उद्यान, ऊर्जा को भी इसमें लिया है। हमारी कोशिश है कि हमारे जो लोग वापस आए हैं, वे अपने घर में ही रहकर काम करें और उत्तराखण्ड के विकास में योगदान करें। सभी विभागों को 15 दिन में आजीविका प्लान देने के निर्देश दिए हैं। डेरी में 20 हजार दुधारू पशुओं के लिए स्वीकृति दी है। किसानों को 1 लाख रूपए तक ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा था, अब उसकी सीमा बढ़ाकर 3 लाख रूपए कर दी है। अभी कुछ और योजनाओं पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। पर्यटन के क्षेत्र में 10 हजार मोटर बाईक के लिए अनुमति दी है। इसमें दो वर्ष का ब्याज राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
पर्वतीय कृषि के संबंध में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में कृषि व इससे जुड़ी सभी गतिविधियों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार, रूरल ग्रोथ सेंटर की परिकल्पना पर भी काम कर रही है। लगभग 100 ग्रोथ सेंटरों केा मंजूरी दी जा चुकी है। बहुत से ग्रोथ सेंटर शुरू भी हो गए हैं। 670 ग्रोथ सेंटर बनाए जाएंगे। उत्तराखण्ड में किसानों को बिचैलियों से मुक्ति के लिए डायरेक्ट मार्केटिंग पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन महत्वपूर्ण क्षेत्र है। थीम आधार पर 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टीनेशन विकसित किए जा रहे हैं। एडवेंचर टूरिज्म भविष्य का टूरिज्म है। हमने एडवेंचर टूरिज्म की विंग अलग से बनाई है। बहुआयामी पर्यटन पर ध्यान दिया जा रहा है। उद्योगों और निवेशकों के अनुकूल वातावरण बनाया गया है। उद्योग जीडीपी और रोजगार की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। पर्यावरण और उद्योग में संतुलन बनाकर ही विकास किया जा सकता है। जो भी व्यक्ति स्वरोजगार में कुछ करना चाहता है, सरकार उसके साथ खड़ी है। हमारे पास, वापिस आए हर प्रवासी की पूरी जानकारी है। प्रवासियों और उद्योगों में समन्वय के लिए होप पोर्टल बनाया गया है। धन की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री राहत कोष में लोगों ने बढ़ चढ़कर योगदान दिया। जनता ने हम पर विश्वास किया है, हम इसके एक-एक पैसे का हिसाब रखेंगे। कोविड-19 का ये दौर निकलेगा, हम इससे सम्भलेंगें और आगे बढ़ेंगे।
वेबिनार में  अजय रावत,  राकेश ओबेराय,  अनूप नौटियाल, राधा बहन,  अशोक बंसल,  संदीप साहनी ने भी अपने विचार रखे।संचालन अमर उजाला के सम्पादक  संजय अभिज्ञान ने किया।

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देहरादून,  नरेश बंसल  उपाध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा स्तर) राज्य स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम एवं कार्यान्वयन समिति की अध्यक्षता में सभी जनपदों के जिलाधिकारियों/मुख्य विकास अधिकारियों तथा कार्यक्रम के संबन्धित अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बीस सूत्री कार्यक्रम के अन्तर्गत रैकिंग योजनाओं वर्ष 2019-20 की समीक्षा की गयी। प्रदेश स्तर पर 25 मदों में 17 मदें ‘ए’ श्रेणी में वर्गीकृत है तथा 8 मदें ‘बी’ श्रेणी में वर्गीकृत रही। ‘सी’ व ‘डी’ श्रेणी में कोई भी योजना वर्गीकृत न होने पर संबन्धित सभी विभागों की सराहना की गयी। रैंकिंग के अनुसार चम्पावत प्रथम, हरिद्वार द्वितीय तथा पिथौरागढ़ तृतीय स्थान पर रहे हंै। इन जनपदों के अच्छे प्रदर्शन पर मा0 उपाध्यक्ष जी द्वारा जनपदों के समस्त जिलाधिकारियों व अधिकारियों को बधाई देते हुए अवगत कराया कि अच्छे प्रदर्शन के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करने के लिए विचार किया जायेगा यह भी अवगत कराया कि सभी अधिकारी वर्ष 2020-21 में सभी जनपदों को शत् प्रतिशत लक्ष्यों की पूर्ति करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे ताकि सभी जनपदों का प्रदर्शन अच्छा रहे।
बीस सूत्री कार्यक्रम में विशेषकर वर्ष 2019-20 में रूटीन टीकाकरण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वंय सहायता समूह के मदों में अधिकांश जनपद पिछड़े होने के कारण मा0 उपाध्यक्ष जी द्वारा निर्देशित किया गया कि महत्वपूर्ण मदों में प्रत्येक माह मानक के अनुसार प्रगति लाये जाने का दायित्व संबन्धित विभाग का है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में मानक के अनुसार जनपदों द्वारा प्रयास न किया जाना गम्भीर है। जिस पर लगातार अनुश्रवण करने की आवश्यकता है।  उपाध्यक्ष द्वारा बताया गया कि आगामी माहों में सभी जनपदों में जाकर समीक्षा बैठकें किया जाना प्रस्तावित है। इसलिए सभी नोडल अधिकारी लक्ष्यों से संबन्धित प्रस्ताव अपने विभागाध्यक्ष को तत्काल प्रेषित करनी चाहिए। वित्तीय वर्ष के त्रैमासान्त के उपरान्त किसी प्रकार के लक्ष्य संशोधन की कार्यवाही अपेक्षित नहीं होगी।
मा0 उपाध्यक्ष जी द्वारा अपने प्रयासों से बनाये गए बीस सूत्री कार्यक्रम के फ्रेम में संकेतकों को जोड़े जाने अथवा हटाये जाने से संबन्धित सुझाव जिलाधिकारियों के माध्यम से भेजे जाने से अवगत कराया तथा आशा व्यक्त की कि इस कार्य को मूर्त रूप देंगे।

जनपद तथा मण्डल स्तर पर गठित टास्कफोर्स मंे 50 प्रतिशत से कम निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अगले वित्तीय वर्ष में अधिक से अधिक निरीक्षण कर लक्ष्य की पूर्ति करें तथा निरीक्षण नोट जिलाधिकारी को प्रस्तुत करेंगे। बैठक में जनधन योजना, किसान सम्मान निधि, होम स्टे, श्रमिक कल्याण के अतिरिक्त कोरोना के दौरान प्रदेश में आये प्रवासियों को मनरेगा से दिए गए रोजगार तथा  मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से जोड़े जाने पर भी विस्तृत चर्चा की गयी तथा उपाध्यक्ष  द्वारा निर्देश दिए गए कि सभी जनपद इन योजनाओं का डाटा 10 दिन के अन्तर्गत बीस सूत्री कार्यक्रम विभाग को उपलब्ध करायेंगे।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में सभी जनपदों के जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी के साथ-साथ जनपदों के जनपद स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम के मा0 उपाध्यक्ष थे। राज्य स्तर से  सुशील कुमार, विभागाध्यक्ष/निदेशक, उप निदेशक श्रीमती गीतांजली शर्मा गोयल व जे0सी0 चन्दोला, चीफ कार्टोग्राफर, श्रीमती किरन शर्मा, अपर सांख्यिकीय अधिकारी आदि बीस सूत्री कार्यक्रम के विभागीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

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