यू पी के अधिकारियों की लपरवाही से लंबे समय से लटकी हुई है 7000 अध्यापकों की नियुक्ति

12460 शिक्षक भर्ती में चयनित अध्यापक नियुक्ति के लिए कर रहे हैं ऑनलाइन प्रदर्शन।

अधिकारियों की लपरवाही से लंबे समय से लटकी हुई है 7000 अध्यापकों की नियुक्ति।

अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से नाराज प्रदेश के विभिन्न जिलों के हज़ारों अभ्यर्थी रोज सोशल मीडिया पर धरना दे रहे हैं।
*मामला 12460 शिक्षक भर्ती का है।*

 12460 शिक्षक भर्ती 15 दिसम्बर 2016 को आई थी । जिसपर योगी सरकार बनते ही रोक लगा दी गयी । मार्च 2018 में पुनः मुख्यमंत्री जी ने भर्ती को हरी झंडी दी।

भर्ती में 51 जिलों में पद थे और 24 जिलों में पद शून्य थे अर्थात वहां पर एक भी पद नही थे लिहाजा सरकार ने इन 24 जनपद के लोगों को प्रथम वरीयता के आधार पर 51 जिलों में किसी एक जिले में प्रथम वरीयता के आधार पर आवेदन करने का अवसर दिया। सरकार के निर्देशानुसार ही 24 जनपद के हज़ारों युवाओं ने इस भर्ती में प्रतिभाग किया और अपने उच्च गुणांक (हाइ मेरिट) के बलबूते अपना चयन सुनिश्चित किया। लेकिन इसी दौरान कम मेरिट वाले अचयनित(जिनका चयन नही हुआ था) शिक्षामित्रों ने भर्ती को न्यायालय में उलझा दिया। इस पूरी प्रक्रिया के बीच भर्ती में लगभग 5000 लोगों को नियुक्ति प्रदान कर दी गयी और बाकी लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गयी।

नियुक्ति से वंचित लोगों के धरना प्रदर्शन के बाद और मीडिया के भारी दबाव के बाद सरकार ने कोर्ट में हमारे पक्ष में नवम्बर 2018 में…

619/2018 स्टेट आफ उत्तर प्रदेश थ्रू प्रिंसिपल सेक्रेटरी थ्रू प्रिंसिपल सेक्रेटरी बेसिक एजुकेशन v/s राम जनक मौर्य एंड टू अदर्श।

….दाखिल तो कर दिया लेकिन नवम्बर 2018 से लेकर आज के दिन तक भर्ती न्यायालय के चौखट पर ही रुकी हुई है। मामला डेट पर डेट खिंचता जा रहा है। अधिकारी न्यायलय में पैरवी नही कर रहे , सरकार ने भी हमे उपेक्षित कर दिया। जिससे हजारो हाई मेरिट वाले योग्य अभर्थियों की नियुक्ति रुकी हुई है। 2018 से लेकर आज के दिन तक इसपर एक भी सुनवाई नही हुई है और नियुक्ति से वंचित हज़ारो अध्यापक आज भी अपने नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे हैं।

नियुक्ति से वंचित 24 जिले के हज़ारो अभ्यर्थियों के मूल अभिलेख आज भी संबंधित जिले के बी एस ए दफ्तर में जमा है। जो स्कूल अलॉट हुए थे वहां आज भी पद खाली पड़े हैं। बावजूद इसके अधिकारियों को कोई फिक्र ही नही है और सरकार भी उपेक्षित कर रही है। सुनवाई में सरकार का पक्ष रखने के लिए महाधिवक्ता इंगेज हैं लेकिन एक भी सुनवाई पर नही गए। न्यायालय का काम काज देख रहे अधिकारी भी नही जाते।

 

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