वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल के निधन पर दुख व्यक्त किया 

महान व्यक्तित्व के धनी वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर नौटियाल के निधन पर दुख व्यक्त किया
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रचार समन्वयक धीरेंद्र प्रताप ने वरिष्ठ पत्रकार और ब्लिटज के संपादक नंदकिशोर नौटियाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्वर्गीय नंदकिशोर नौटियाल को पत्रकारिता जगत का भीष्म पितामह बताते हुए कहा है कि उन्होंने मुंबई में रहते हुए व ब्लिट्ज का संपादन करते हुए स्वर्गीय आर के कंरजिया के साथ पत्रकारिता के नए मानदंड स्थापित किए थे। उन्होंने सारा जीवन सादगी पूर्वक बिताया और उत्तराखंड के गठन के बाद बद्रीनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में बद्रीनाथ मंदिर के उद्धार में भी चार चांद लगाए। उन्होंने कहा स्वर्गीय नंदकिशोर नौटियाल कलम के धनी थे और उन्होंने देश को कई यशस्वी पत्रकारों की एक लंबी कड़ी उपलब्ध कराई। ब्लिटज और नूतन सवेरा  के संपादक के रूप में उन्होंने देश को कई ऐसे समाचार दिए जो वर्षों तक खोजपूर्ण पत्रकारिता के लिए चर्चित रहे। उन्होंने कहा उन्होंने पत्रकारिता में अपना एक विशिष्ट स्थान बनाया और एक कंपोजिटर से संपादक के पद तक पहुंचकर उत्तराखंड और गढ़वाल का नाम भारत ही नहीं पूरे एशिया के एशिया के पत्रकारिता जगत में उन्होंने उनको निधन को पत्रकारिता जगत की और समाज सेवा क्षेत्र की भी महान क्षति बताया है।
वहीं, उत्तराखण्ड प्रदेश कंाग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने श्रीबद्रीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति के पूर्व अध्यक्ष ,वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार नन्द किशोर नौटियाल के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। अपने शोक संदेश में प्रीतम सिंह ने कहा कि स्व0 नन्द किशोर नौटियाल लम्बे समय से साहित्य जगत से जुड़े रहे तथा ब्लिट्ज एवं नूतन सवेरा के सम्पादक के रूप में उन्होंने पत्रकारिता में एक नई पहचान बनाई। उनका निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूर्णीय क्षति है। प्रीतम सिह ने कहा कि नन्द किशोर नौटियाल ने श्रीबद्रीनाथ-केदारनाथ मन्दिर समिति के अध्यक्ष के रूप में अविस्मरणीय कार्य किय जिसके लिए उन्हंे सदैव याद किया जाता रहेगा। प्रीतम सिंह ने कहा कि ईश्वर स्व0 नन्द किशोर नौटियाल की आत्मा को शांन्ति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति देवें। हमारे पुज्य नोटियाल जी से वर्ष1974 नवम्बर मे पहली बार मुलाकात हुई तब से यदाकदा मुलाकात दिल्ली ,देहरादून ,लखनऊ, टिहरी पौड़ी सामान्य रूप से होती थी वर्ष1997-98 घटना है कि गांगोत्री में मेरे कमर की नस चढ़ गई चला नहीं जारहा था नोटियाल जी और उनके साथ एक सज्जन साथ थे।उन्होंने आत्मीयता से पूछा कि आप यहाँ कब आये ,एक सप्ताह भर होगया है गुरु जी ।यह क्या होगया आपको मैन कहा सर कमर की नस चढ़ गई है।बोले कोई बात नही हम गुजरात वाले धर्मशाला में ठहरने जारहे हैं आप धीरे धीरे पहुंचे मेरे पहुंच ने में 50 मिनट  लगा होगा तब तक दोनों अथिति मेरा इन्जार करते रहे ।पहुँने पर उनके साथ आये डॉ शर्मा से परिचय कराया उन्होंने दवाई दी उसका लेने के बाद असर  दिखाई देने लगा कमर दर्द कम होना सुरु था वह मानवीय संवेदना के व्यक्त करने वालों महामनीषी थे।बोले यह डॉक्टर गांगोत्री नहीं रहे थे यह तुम्हारे भाग्य की वजह से इनको  गांगोत्री आने का मौका मिला। उनसे सेम मुखेम नागराज की ख्याति के प्रकाशित करने की कृपा करें ।उन्होंने कहा कि वहां जाने पर अपने आप करेंगे।वह उत्तरद्वारिका आये नोटियाल जी ने अधरभूत विकास के लिए कार्य किया ।उनके विचार जनजन के लिये प्रेरणा दायक है।हमेशा याद करने पर उनके समाज के विकास के लिए दूर दृष्टि प्रेरणा देगी।भगवान उनकी महान आत्मा को शांति प्रदान करते हुएभगवान अपने श्रीचरणों में स्थान दे एवं दुःखी परिवार को धैर्य प्रदान करे। ॐ शान्ति ॐ शान्ति ।।

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