मित्रों शाह जी को मैंने संघठन के संरक्षक मंडल के रूप में आश्वस्त किया है

मित्रों नैनिताल से बरिष्ट पत्रकार शाह जी को मैंने संघठन के संरक्षक मंडल के रूप में आश्वस्त किया है।मेरे पास पत्र ,पोर्टल के साधन के अलावा लंबा आंदोलन करते रहने, कराने का सफर की लंबाई नापने का सटीक पैरामीटर है जिसका अपने सम्बोधन में कुछ बोलने का प्रयास किया है।

एक पत्रकार भविष्य में होने वाले घटनाओं का दृष्टिकोण रखता है

इस का उदाहरण आपको नजीर के तौर पर करता हूँ।
कि हम टिहरी बांध का समर्थन विकास के लिए करते रहे थे ।उसमे परिवार के सम्बंध खराब होने की बात तक आई फिर आगे पीछे दुनिया घूम कर आने वालों विदेशी संसद को सम्बोधित करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुंदर लाल बहुगुणा जी के अनुभव को देखते हुए विरोध में उत्तर आये जिस कुटिया का ज़िक्र पर्वत जन में किया गया उसको बनाने में ऊर्जा लगाई लड़के का हाथ फ़्रैक्चर हुआ पलस्तर दिन में चढ़ाया रात को डैम साइट से गिरफ्तार कर फरवरी की ठंड में नई टिहरी जेल लेगये पर्सनल बांड पर छूटे, नंगे पांव पाले में चलकर बाजार आये व्यवस्था की धरना प्रदर्शन के लिए फिर आये।
इन संघर्ष में भविष्य में घटना घटने की जनकारी का एहसास होने लगता है।अब बांध का काम जोरो पर चल रहा था कि वहाँ बिस्फोट की गर्मी से आसमान में बादल वर्षा के लिए आते और छंटने लगते तो मैने 1985 में मा मुख्यमंत्री स्व नारयण दत तिवारी जी को पत्र लिखा कि अब टिहरी बांध निर्माण में विस्फोटक सामग्री से गरम बातावरण होने से सूखा पढ़ने वाले एरिया के लिए सरकार की प्रोजेक्ट की मदद से राहत देने की योजना क्या है।मुख्यमंत्री जी का हवाला देकर
कृषि मंत्री शिव बालक पासी जी का पत्र प्राप्त होता है उसमें लिखा था कि ऐसी स्थिति के लिए जनता को राहत की सुभिधा देने पर बिचार किया जाएगा ।पत्र हमने भी सम्भाल कर रख दिया ।जिलाधकारी के पास इसका संज्ञान लेने के लिये sdm प्रतापनगर को पत्र पर मार्क करा दिया।अब 1986 -87 सूखा पड़ा तो मेरे पत्र की ढूंढ होने लगी तब उस पत्र के आधार पर इलाके में खाद्यान्न बंटा गया।
जैसे खाद्यान्न बंटा भीड़ आंदोलन के लिए मरमिटने वाली भीड़ छटने लगी।
कहने का तात्पर्य यह है कि विज्ञापन/प्रलोभन को लेकर कुछ का तो आज साथ छूट गया।कुछ का विज्ञापन मिलने के बाद छूटने के नम्बर होगा।
पर आंदोलनकारी जानता है कि जोश मे आकर कुछ करूंगा तो मुकदमा चलाने पर इकैले भुगतना पड़ता है।
इसके लिए मेरा सुझाव पर यदि मनन कर रहे होंगे तो मेरा दावा है कि मेरे सुझावों को अमल मे लाने पर 8से 9 अरब के बिजनेस आपको मिलेगा यह हम ऊर्जावान युवा वर्ग के सहयोग से करेंगे और अब तक हमारे उत्तराखंड वेव पोर्टल एसोसिएशन में जितने लोग जुड़े हैं उनको अभी तक पैसे के लेन देन में कोई शिकायत नहीं है औऱ न रहेगी ।

अब बात आई साथियों के अलग होने की माल हमारे सिद्धान्तों से आएगा।इतना आएगा कि आप को इज्जत मिलने लगेगी तो पारदर्शिता से काम करते हुए कहाँ जायेंगे।और जायेंगे तो अपना नुकसान करेंगे। यह मेरा मानना है
आपको सेमवाल जी की टीम ने एक महीने का समय दिया है।तो बहुत कम समय दिया है।फिर भी जो दिया है उसको पूर्ण करने के लिए हमे काम करने के लिए साथ देना होगा।
साथ युवा लोग ,निजी अस्पताल ,स्कूल विश्व विद्यालय, आश्रम,कंस्ट्रक्शन कंपनी, उद्योगों की सूची उत्तरकशी,टिहरी, रुद्रप्रयाग,देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, पौड़ी, चमोली,नैनिताल, उधमसिंह नगर ,अल्मोड़ा,पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत,की बनाने का काम 5अगस्त तक करें ।फिर 10से 12 अगस्त को अपने करने का परिणाम ईमानदारी से मिलने लग जायेंगे।
फिर देखे कोन फुट डालते हैं
कम बोलें भलाई के संघर्ष में ज्यादा नहीं बोले न बोलने वाले लोगों को ज्यादा जुमेदार समझा जाता है

यह ज्ञान की बात है कि समझने की है।

*_संगठन शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है । क्योंकि…._*

संगठन में – *कायदा नहीं, व्यवस्था होती है*।
संगठन में – *सूचना नहीं, समझ होती है*।
संगठन में – *क़ानून नहीं,अनुशासन होता है*।
संगठन में – *भय नहीं, भरोसा होता है*।
संगठन में – *शोषण नहीं, पोषण होता है*।
संगठन में – *आग्रह नहीं, आदर होता है*।
संगठन में – *संपर्क नहीं, सम्बन्ध होता है*।
संगठन में – *अर्पण नहीं, समर्पण होता है*।
संगठन में – *मैं”नही “हम”होता है*।
संगठन में- *”आत्मप्रशंसा” नहीं “सर्व सम्मान” होता है।*

*इसलिए स्वयं को संगठन से जोड़े रखें।*

*संगठन सामूहिक हित के लिए होता है, व्यक्तिगत “स्पर्धा” और “स्वार्थ” के लिए नही।*

*प्रशंसा सबकी करो निंदा किसी की नहीं।*

*व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा वाला पदाधिकारी संगठन में कभी भी सर्वप्रिय नहीं हो सकता*

*सबसे स्नेह, सबका सम्मान।*

 

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