लोकतंत्र की रसायन विज्ञान मोदी जी पढ़ा रहे है वह घातक लग रही है

देहरादून:देखो दोस्तों जिस रूप में मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में भारत के लोकतंत्र के लिए देखा है तो साफ हो गया है कि सत्ता सबको खो देती है।मेरा सार्वजनिक जीवन 1967 से जुड़ा है आज 56 वर्ष होगये सत्ता को नजदीक देखने का मौका मास्टर रतूड़ी जी राधास्वामी जी के प्रतिनिधि विधायक त्रेपन सिंह नेगी ,गोविंद सिंह नेगी विधायक ,खुशाल सिंह रांगड़ , मास्टर रामस्वरूप रतूड़ी जी मेरे नाना श्री नारायण दत्त रतूड़ी फंड सहाब के यहाँ उनका आना जाना बैशाख, जेठ में अकसर होता था उनके साथ नहाने के लिए गावँ से 1 किमी नीचे आकर जाना पड़ता था।नहाने भी गये सभी नेताओं के हाथ मे 5-10 लीटर पानी का वर्तन में भरकर नहाने के बाद घर के लिए लेजाना जरुरी होता था।अपने घर मे भले ही उन महान विभूतियों ने पानी नहीं लाया हो परन्तु वहां पर वह आत्मीयता से पानी सभी दलों के लोग एकसाथ लाते दिखाई दिये।उनके साथ लखनऊ मुख्यमंत्री स्व चन्द्रभान गुप्ता, चौधरी चरण सिंह, के समय से सबके साथ मिलने के लिए जाते रहते थे। सत्ता ने माया बाती को जहाँ खोया वहीं अखिलेश यादव  तो बाहर से पढ़ कर आये थे तो उनको भी खोदिया , पर इन पांच साल में जो लोकतंत्र की रसायन विज्ञान मोदी जी पढ़ा रहे हैं वह जो मैं देख रहा हूँ वह घातक लग रही है।
कहने का साफ साफ मतलब है कि पहले रहन सहन की बात है ।7रेसकोर्स प्रधानमंत्री निवास ,गाड़ी सब बतानुकूल है कितने पांच सितारा रहन सहन में रहकर कितना प्रदूषण देश को दे करजारहे हैं ।इसका मतलब देखें और वहाँ से निकल कर आप केदारनाथ में गुफाओं में बैठकर तपस्या करने का काम कर हमें16वीं सदी की यादें हमें जीने के लिए ताजा कराने जा रहे हैं । इसके इस भौतिक युग में क्या मायने निकल कर आरहे हैं। क्या जनता सोचेगी कि प्रधानमंत्री के निवास से आधुनिक सुभिधाएँ हटेंगी कि यह नाटक बाजी है ।गरीब के घर भोजन ,कृष्ण सुदामा का प्रेम का दिखावा है।  जनता का आज न्यायालय से भरोसा उठ रहा है, चुनाव आयोग की विशवसनियता को बहाल नेता कर पाएंगे, सीबीआई, आर बी आई कि शाख बनेगी। यह ज्वलंत उदाहरण मोदी ने पैदा कर दिये हैं जिससे लोकतंत्र का गला घोंटने के लिये सत्ता पाने की होड़ लगी है। देश में 70 लाख बचे कुपोषण के शिकार हैं 30करोड़ लोग रोज भूखे प्यासे सोते हैं 30 हजार करोड़ का राशन नाली में रोज बहाया जाता है ।556 लाख करोड़ रुपये बड़े उद्योगपति के माफ  किये हैं।यह विचारणीय प्रश्न है। शिक्षा का कृषि का बजट घटाया गया है। मकान का ऋण सस्ता, पढ़ाई का महंगे ऋण के साथ बेरोजगारी पैदा करदी है।आपने इन 5 साल क्या किया इसका जिक्र कहीं चुनाव में नहीं हुआ।अपने 5 साल भी मोदी ने अपने जोड़कर कहा कि70 साल में विकास हुआ बहिन भाइयों तो जबाब मांगे तो नहीं ।मतलब हमने याने मोदी ने भी विकास नहीं किया।जब नहीं किया तो क्यों जनता से आगे के लिए वोट मांगने लगे ।यह पूछने की हिम्मत राहुल गांधी प्रियंका बढेरा गांधी ने शिष्टाचार के अंदर रहते हुए रखी है।
आपने देखा होगा योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री रहकर भगवान रामचंद्र को ऐसे निहारने लगे कि मानो ऊपर से नीचे उतारा जाने वाले हैं।मोदी जी की केदारनाथ बद्रीनाथ धाम की लीला का बर्णन टीवी अखबार को तो पेमेंट लेने के चलते करना ही था। अमित शाह दक्षिण में भगवान को धरती पर लाने वाले लगाया गया था।यह सब से आम जनता को कुछ हासिल करने के लिए हुआ तो जबाब जनता से पूछें हैं तो क्या निकाल लोकतंत्र दिखाई देने वाली बात नहीं रही है। ये महान लोग खुद सत्ता में अपने नारायण मानते हैं भगवान से कुछ नहीं मांगते हैं।जरा सोचो कितना नजदीक हो जाते हैं भगवान के, कि हमें शक्तिशाली बनादिया कि हमही देने वाले होगये है।अब लोकतंत्र इन भगवान से देश के लिए कैसे बचाया जाय यह जुमेदारी युवाओं के कंधों पर है। उसे भगत सिंह ,उधम सिंह जैसे बचाने के लिए तैयार रहें । जय हिंद

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