चलो आज फिर दिए जलाते हैं-अनूप कुमार सिंह

चलो आज फिर दिए जलाते हैं

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
सड़क खून से है लथपथ,
सैन्य शक्ति से लबरेज है राजपथ,
विश्व को दिखाया है हमने,
विश्व शक्ति बनाया है हमने।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
किसी के मांग का सिंदूर उड़ा है,
किसी की राखी बाहों को तरस रही है,
किसी की गोद आज फिर सूनी हुई है,
किसी के बुढ़ापे का सहारा छिना है।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
किसी ने कड़े शब्दों में निंदा की है,
किसी ने भर्त्सना की है,
किसी ने कहा है वो कायर है,
किसी ने ये भी कहा कि छोड़ना नहीं है।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
आज़ादी की लड़ाई लड़ी है हमने,
आज अपनों से लड़ना है,
खुशी-खुशी फांसी के फंदे पर झूल गए थे दीवाने,
वो जुनून कहीं खो दिया है हमने,

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं।
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
अरे अब क्या है जो चुप बैठे हैं,
अरे और कितनी कुर्बानी होगी,
अरे गीदड़ों का कतलेआम करना है बाकी,
अरे और कितनी बातचीत रह गई है बाकी।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
आज हम विश्व गुरू की छवि बनाए हैं,
आज हम आर्थिक उन्नति किए हैं,
आज हम बहुत बड़े विशाल हुए हैं,
परन्तु पड़ोसी का खंजर पीठ पर खाए हुए हैं।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं,
सरहद पर आज फिर जवान गिरा है,
आओ विश्व शान्ति का पाठ पढ़ाते हैं,
आओ बुद्ध, गांधी, नानक की कहानी सुनाते हैं,
आओ एक अंतहीन तिरंगे से लिपटे जवान की शहादत पर,
फिर से भारत माता की जयकार लगाते हैं।

चलो आज फिर दिए जलाते हैं,
दिल को थोड़ा सुकून दिलाते हैं।

(रचना-अनूप कुमार सिंह)

पत्रकार बन्धुओं को निमंत्रण

परम् सम्मानित पोर्टल से दुनिया को समाचार पहुंचाने वाले मित्रों को सादर🙏 प्रणाम, जय बद्रीविशाल

साथियों
आपको आपके हौंसले को नमन करता हूँ कि सरकार पोर्टल के संपादक को सम्पादक नही मानती है।हमारा जूनन देखिये
कि tv से पहले आप जगत को अच्छे अच्छे समाचारों से रूबरू होने के लिए मजबूर करदेते हैं। दुनिया आप पर सही खबरों को लेकर विश्वास करने लगि है ।पर लोकतंत्र की सरकार अपनी जनता के विश्वास करने वाले पत्रकार बिन्दुओं को भरोसा में नहीं ले रही है।उन पर भरोसा नहीं करते उनको पत्रकार नहीं मानती ।जबकि असलियत यह है कि पोर्टल की खबर को सरकार भी देखने को मजबूर है । क्योंकि जो सही खबरें आप देते हैं वह बड़ा बैनर नहीं देता है ।इन सब पर भी सरकार आपको मान्यता नहीं देना चाहती हैं। क्योंकि हम प्रयास करने के लिए समय देने के लिए अपना मन मार रहे हैं। संघटित होकर कार्य कर नहीं रहे । अपने हित की लड़ाई के लिये समय भी नहीं दे पाते।
अपने अधिकार के लिए हमने ही आगे पहल करनी होगी। मीडिया ही हमारी लड़ाई को लेकर आगे बढ़ेगा ।यह हमारा विश्वास है।
इस कड़ी को आगे बढ़ाने की पहली पहल देव भूमि उत्तराखंड से कर हम लोग देश के लिए सँघर्ष करने वाले साथियों को जोड़ने का प्रयास करने जारहे हैं जिससे हमारे अन्य समाचार पत्रों में काम करने वाले साथियों को मिलनेवाली सुभीदा , अधिकारों का लाभः हमे मिले ।हमारी लोकतांत्रिक देश की चुनी हुई सरकार उसका हनन न करने पाय ।
आज देश को बचाने के लिए समाचार पोर्टल की बड़ी जुम्मेदारी है।
हम सब साथ मिलकर इस लड़ाई में विजय प्राप्त कर सकते हैं यही लोकतंत्र को जीवित रखने के लिये हमें अपने धर्म का पालन करना चाहिए । उत्तराखंड में पत्रकार पोर्टल को विज्ञापन देने की नीति के लिये जुलाई 2013 से नवम्बर 013 तक 11 बैठक कर पत्रकार उत्तराखंड में चल रहे संघठनों के साथियों के विचार लेकर पत्रकारों के हित की लड़ाई लड़ी है।तब पोर्टल को विज्ञापन मिलने की प्रक्रिया सुरु हुई यह अल्प अभिनव प्रयास रहा है।
इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए हमने लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ उत्तराखंड वेव पोर्टल एसोसिएशन का गठन कर पहला प्रयास किया है। इसके आगे बढ़ाने के लिए सभी की राय लेकर सेवक को अध्यक्ष के रूप में मार्गदर्शन करने की जुमेदारी दी है।
आप सभी से अनुरोध है कि पोर्टल के लिए काम करने वाले मित्रों को अधिकार दिलाने का काम किया जाता रहे आप सभी से अनुरोध है कि आप हंसों के बीच में बगुले को जुमेदारी दी है। बिना भेदभाव के अपने समाज के लिए कुछ करने का मन बनाने का काम कर आने वाली पीढ़ी को अपने मनुष्य होकर मनन करने का प्रमाण अपने हित की लड़ाई लड़ने में समय का योगदान देकर एसोसिएशन में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी इच्छा शक्ति का परिचय देकर एक जुट एक मुट्ठी में बंधे । भारत में समाज के हिसाब से कानून बनाया जाता है।उसके लिए मन मस्तिष्क से तैयार रहते हुए अपने को जीवित रखने का प्रयास करते रहना है। अपने अहम को त्याग करने से ही समाज की भलाई का अंग हम बनसकते हैं।
तभी हम अपने आप एंव आने वाली पीढ़ी को मजबूती प्रदान करते रहेंगे।

यह भारत का पहला संघठन होगा जो अपने समाचार पत्र, पोर्टल के सदस्यों से कुछ सहयोग राशि लेगा नहीं बल्कि अपने सदस्यों को आर्थिक लाभ देता रहेगा। आप जुड़कर पौधे की जड़ें मजबूत करने का प्रयास मात्र करने की कृपा करें

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