विश्व में पर्यावरण का पुरुस्कार देने और पानेवाले मित्रों को समाचार पोर्टल लिखवार गाँव आमंत्रित करते है

विश्व में पर्यावरण का पुरुस्कार देने और पानेवाले मित्रों को समाचार पोर्टल लिखवार गाँव आमंत्रित करते है।

विश्व में पर्यावरण पर पुरुस्कार  करने मित्रों
व्यबस्था
और  http:// ukpkg.com समाचार पोर्टल अपने र्टेहरी जनपद विकास खण्ड प्रतापनगर ,लिखवार गाँव आमंत्रित करते है जहाँ ग्राम प्रधान श्री परमा नंद पैन्यूली ने  अपने  संसाधनों से  गावँ के जंगल चौकीदारी के लिए व्यबस्था की साथ ही हमारे पूर्वजों ने अपने जंगल के चारों तरफ खेतों की उर्बरा शक्ति बढ़ाने के लिए खेतों के बीच मे बांज का जंगल  को बढ़ावा दिया गया है। विश्व मे पर्यवरण के लिये कार्य करने वाले  एवं पर्यावरण के लिए पुरष्कार देने वाली संस्थाओं से गावँ में जंगल पनपा कर पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए 350 साल पूर्व के समय से कार्य करते आरहे व्यबस्था को लेकर आगे बढ़ाने के लिए स्व श्री रैठा राम ,स्व श्री माघे लाल ,स्व श्री दया राम पैन्यूली अपनी सेवाएं चोकदारी में दे चुके थे ।उस समय पर्यावरण बचाने के लिए आठ आना (जो कि अब चलन से बाहर कर दिया) प्रति व्यक्ति साल भर का हिस्सा देता था आज 500 रुपये प्रति परिवार सालभर का दे रहा है प्रति परिवार से आठ आना वसूली का पर्चा उस समय के प्रचलन में आने वाले मटमैले कागज पर है। स्थाई हल का प्रयास 1960 के

दशक में गावँ के प्रधान स्व श्री परमानंद पैन्यूली ने देने के लिये सयुंक्त प्रान्त उत्तरप्रदेश वन विभाग के सेवा निवृत्त सचे न्याय प्रिय कर्मचारी स्व श्री ज्ञान चंद सिंह नेगी निवासी ग्राम आबकी को चौकीदार पर रखने से जंगल में वृक्षों की वृद्धि कराई इनके समय जंगल से 24 दिन के लिए चारा पति उपलब्ध साल भर में मिलने लगी सुबह सायं के बीच के समय जंगल की चोरी होने लगी  नुकसान बढ़ने से चोरों की वजह से चारा पति 11 दिन की मिलने पर आगई ।इनके 3 साल के बाद गावँ के स्व श्री पूर्णा नन्द पैन्यूली को चौकीदार रखने केलिये तैयार किया उन्होंने जंगल को बढ़ाने में अपनी उर्जा को दिन रात जंगल  में लगाया इनके कार्य काल के सुरु मे चारा पति 11दिन मिलती थी वह  इनके 33 साल के कार्य काल  में 111से115  दिन गावँ वालो को चारा मिलने लगा ।ईनकी चोकदारी करने से जँहा जंगल का रकबा बढ़ा वहीं पर्यावरण की रक्षा करने में गावँ की अपनी विशेष पहचान बनाये रखने के लिए प्रयास रत रहे हैं ।चोकदारी के मान देय के लिये गावँ बैठक होती थी उसमें अपनी सहयोग हिस्सा (फॉन्ट) राशि देने की व्यबस्था रही जो आज भी जारी है ।उस व्यबस्था की जनकारी आपको अबलोकन के लिये है।

साथ पहले आमवस्या संक्रांति एवं नवरात्रि में हवन किया करते थे ।

60- के दशक में प्रधान रहे पर्यावरण के लिये काम करने वाली मूल्यांकन करने कमेटियों का गावं में स्वागत है।आइये ओर अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट पुरस्कार देने वाली सरकार को जरूर देवें।

 

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