मंगेश ने बदला जब भेष :- नबल खाली

मंगेश ने बदला जब  भेष – नवल खाली

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रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश ने भेष बदलकर जब केदारनाथ यात्रा का जायजा लिया तो कई चीजों की हकीकतें खुलकर सामने आ गयी ।

पौराणिक काल मे भेष बदलने की प्रथा चरम पर थी , देवता और  ऋषि मुनि भेष बदलकर परीक्षाएं लेते थे वहीं  दैत्य लोग भेष बदलकर छल कपट किया करते  थे ।

डीएम मंगेश जी ने भेष बदलने की इस परंपरा को आगे बढाते हुए जब अपने कर्मचारियों की परीक्षा ली तो कर्मचारी इस परीक्षा में फेल पाए गए ।

वो तो मंगेश जैसे ऋषि हैं जो शांत स्वभाव के हैं , दीपक रावत हरिद्वार वाले ऋषि होते तो अब तक श्राप भी दे चुके होते ।

डीएम मंगेश ने भेष बदलकर अपने राजकाज की पड़ताल की जोकि एक अच्छे राजा की निशानी भी है ।

अगर यही काम हमारे द्वारा चुने गए मंत्री सन्तरी भी करते तो राज्य की व्यवस्थाओं में काफी सुधार होता ।

पर भेष बदलना आसान नही है , अगर मंत्री सन्तरी ऐसा वाला भेष भी बदलेंगे तो तुरंत पकड़ में आ जाएंगे ,क्योंकि बताया जाता है कि वो एक विशेष प्रकार की गंध छोड़ते हैं ,जिससे उन्हें श्वान तक तुरन्त पहचान लेता है ।  ये लोग भेष तो बदलते हैं पर ये आंतरिक भेष बदलने में माहिर होते हैं । वोटिंग से पहले और वोटिंग के बाद वाला इनका भेष देखने लायक होता है ।

भेष बदलना आसान कार्य नही है । हर अधिकारी को भेष बदलकर समय समय पर अपने अधीनस्थों की परीक्षा लेनी चाहिए । कई बार कागजो की मूल्यांकन प्रणाली तो दैत्य टाइप कर्मचारियों द्वारा छल कपट से तैयार की जाती है पर भेष बदलकर किया गया मूल्यांकन धरातलीय व सटीक होता है ।

रुद्रप्रयाग डीएम मंगेश ने भेष बदलकर इतिहास रच दिया है । जनता चाहती है कि वो समय समय पर यूँ ही भेष बदलकर परीक्षाएं लेते रहें ।

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