केदारनाथ यात्रा आस्था के नाम पर लूट का जरिया बनता जा रहा है |

केदारनाथ  यात्रा आस्था के नाम पर यात्रियों से लूट का जरिया बनता जा रहा है।.

 

बाकी धामो का पता नही पर केदारनाथ में तो खुलेआम लूट मची हुई है इस वक़्त ..

 

1. प्रशासन आंखे मूंद हर दिन घंटो लगे जाम को देख रहा है .. बाकी यात्री अस्त व्यस्त है यहाँ के हिसाब से बद्रीनाथ धाम मे व्यवस्था ठीक है।

 

2. सोनप्रयाग से गौरी कुंड जाने के लिए 5km का सफर कम से कम 2 से 3 घंटे लग रहा है ..

 

3. गौरी कुंड से ऊपर जाने के लिए घोड़े खच्चर के मल मूत्रो और कीचड़ से के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है फिर रुद्रप्रयाग का प्रशाशन कर क्या रहा है ..

 

4. पैदल यात्रा करते समय घोड़े खच्चरों वालो का ही बोलबाला है प्रशाशन सिर्फ रसीद काटने तक ही सीमित है उन लोगो पर कोई लगाम नही 

 

5. यात्रा करते समय नीचे 5 की चीज़ 10 रुपये की है तो ऊपर सीधा 15 रुपये का रेट है, वही पानी की बोटल 50 से 60 रुपये और मैगी पराठे 50 रुपये के नीचे नही वही चाय के 15 से 20रुपये तो कॉफी के 30 से 45 रुपये तक के रेट  है वही एक खीरा नीचे 20 तो थोड़ा ऊपर 30 तक बिक रहे है..

 

6. जंहा हर 1, 2 km पर पुलिस प्रशासन होनी चाहिए यात्रा के दौरान , वही उनका एक बार दर्शन हुए 14 km के सफर में . हजारों यात्रियों के लिए या घोड़े खच्चर पर लगाम लगाने के लिए सबकी आंखे बंद है ..

 

7. केदारनाथ मंदिर में जो घोड़े खच्चरों या हवाई जहाज में दर्शन कर रहे है उनका तो ठीक वो एक दिन मैं आ जाते है , बाकी पैदल आने वालों में जिसने पहले रूम बुक कर दिया उनका ठीक वरना 10 बजे 11 बजे दर्शन करने के उपरांत रात्री को यात्री व्यवस्था न होने के कारण नीचे आने में विवश है यंहा तक कि छोटे छोटे बच्चें लेकर आये परिवार को भी एक रूम 6000 के नीचे नही मिल रहा है ..

 

8. मंदिर के आस पास लाइन को नियंत्रण करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है

 

9.मंदिर के अंदर प्रसाद ले जाने का कुछ अर्थ कुछ नही है 250 रुपये की थैली में सिर्फ थैली ही सबसे बढ़िया है बाकी चीज़ खत्म है ..और बाकी आपके प्रसाद का भोग भगवान के आगे नही लगता और नही आपको मंदिर के अंदर तिलक लगाया जाता है बस पुलिस अंदर है जो सिर्फ आपको आगे भगाने के लिए कर्मबंध है ..

 

10. देखा जाए तो आउट ऑफ कंट्रोल पर है रुद्रप्रयाग का प्रशासन,  पुलिस एक हिसाब से यात्रा को।फैल कराने में विशेष भूमिका निभा रहे है ऐसा लगता है ..गलत कार्यो पर भी आंखे मूंदे है ..

 

11. हमारे लोगो के लिए ठीक पर बाहर से आने वालों को काफी दिक्कत हो रही है पूरे यात्रा में जिस से गलत सन्देश  भी जाता है .. लूट तो सरे आम है ..

 

12. व्यवस्था दुरुस्त करने के बजाए वंहा के एसडीएम इस्तीफा दे रहे है , इनका ही नही सबका हाल यही है  अधिकारी काम करने से कन्नी काट रहे है .. भौगोलिक परीस्तिथि विकट के कारण ऐसा करंगे तटो यात्रियों ने कान्हा जाना..किस से हेल्प मांगनी.

 

बाकी कुछ अखबारों के कट आउट सचाई बयान कर देते है डेली जो आ रहा है .. किसी की भावना को ठेस पहुचना मकसद नही पर  जो लोग बाहर से आ रहे है उनके पास हमारा उत्तराखण्ड के लिए गलत सन्देश है जो कि अच्छा नही है ..बाकी  इतना तो है कि रुद्रप्रयाग प्रशासन , और पुलिस प्रशासन  काम पर लगे हुए भी है पर व्यवस्था बनाये रखने में लगभग फेल होते हुए दिखाई देते हैं।.                        रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल आम यात्री बन कर रविवार आधी रात के बाद केदारनाथ धाम के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड पहुंचे तो हकीकत आखे खोलने वाली थी। पड़ावों पर गंदगी से पटे शौचालय, पानी की सूखी टोटियां, पुलिस कर्मियों की लापरवाही देख जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। यात्रा व्यवस्थाओं में लापरवाही की इंतेहा देख उन्होंने गौरीकुंड के सेक्टर मजिस्ट्रेट का तबादला केदारनाथ कर दिया। वह यहीं पर नहीं रुके, तत्काल जलसंस्थान के सहायक अभियंता और अवर अभियंता के निलंबन की संस्तुति कर डाली। गौरीकुंड में सुलभ शौचालय का हाल देख उन्होंने सुलभ इंटरनेशनल पर पांच लाख का जुर्माना ठोका। डीएम पुलिस अधीक्षक को कहा कि गौरीकुंड के चौकी प्रभारी को भी तत्काल हटाया जाए। पूरी रात उन्होंने गौरीकुंड के घोड़ा पड़ाव पर यात्रियों के बीच गुजारी। दोपहर 12 बजे वह मुख्यालय लौटे।

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